Tuesday, 31 December 2019

बेशक घिरे हो बादल घनेरे या फिर गरजे कोई अँधेरा..डरना क्यों है जब साथ है नया सवेरा..जब

तल्क़ सवेरा आने को है,चांदनी ने पुकारा अपने चाँद को बेहद प्यार से..भूल जा ना सारे शिकवे गिले

कल सवेरा आए गा और तुझे मुझे दूर दूर कर जाए गा..गरूर तुझे किस बात का है,रहना तो मुझे

तुझे अब साथ है..यह तो पुरानी रीत है,डर के कौन जी पाया है..साथ हू अपने चाँद के तो डर है किस

बात का..इस सवेरे के रंग मे तेरा मेरा वज़ूद,कमतर है मगर चांदनी फिर भी तेरे साथ है.. 
''सरगोशियां.इक प्रेम ग्रन्थ' की यह शायरा..अपने सभी दोस्तों को नए साल की मुबारकबाद देती है...२०१९ साल मे यह शायरा अपने शब्दों के जादू से कितना आप का मन जीत पाई,नहीं जानती..बस इतना जानती हू यह मेरी मेहनत और मेरे लफ्ज़ ही थे जो आप को यह सब पढने पे विवश करते रहे..२०२० साल मे मेरी पूरी कोशिश होगी कि मैं इस प्रेम ग्रन्थ को और जयदा भव्य और खूबसूरत लफ्ज़ो से सजा सकू...जिस मे प्रेम,प्यार और मुहब्बत का हर पहलू हो...प्रेम,विरह,विविशता,बेवफाई,समर्पण,अलगाव और भी ना जाने कितने रूपों से जुड़ा है प्रेम ग्रन्थ का यह दौर..अपने शब्दों से,अपनी कलम से मैं आप सभी के दिलो को छू सकू,यह मेरी पूरी कोशिश रहे गी..मेरी कलम किसी भी खास इंसान के लिए नहीं लिखती..यह सिर्फ प्रेम के हर उस पहलू को लिखती है,जो किसी के भी जीवन से जुड़ा हो सकता है..किसी की भावना को मेरे लिखे शब्दों से गर ठेस पहुंची हो तो माफ़ी चाहती हू..कोई भी इंसान यह ना सोचे कि यह उस के लिए लिखा गया है..प्रेम शुद्धता को पेश करता है और प्यार-मुहब्बत को इक नए सिरे से लिखता है..शुभकामनाये..
दोस्तों..आज हर दूसरी पोस्ट पे नए साल के लिए अलग अलग सन्देश दिख रहे है..कोई अपनी गलतियों के लिए माफ़ी मांगने का सन्देश दे रहा है तो कुछ सब की ख़ुशी के लिए दुआए..क्या फर्क है गुजरते साल मे और आने वाले कल के नए साल मे..कुछ भी तो नहीं..हा..फर्क है सिर्फ सही सोच का...अगर आप ने किसी बेकसूर का मन आहत किया है,सिर्फ इसलिए कि वो आप से बेहद सनेह-दुलार करता है या फिर वो आप से कही कमतर है..तो आज से अभी से अपनी गलती को स्वीकार कीजिए..और वो गलती अगले साल तक फिर ना हो,इस का वचन खुद को दीजिए.झूठ बोल कर किसी को दुखी मत कीजिए..आप जो है,जैसे है वैसे ही रहे...अगर हम सभी यह संकल्प आज और अभी ले तभी तो नए साल,नए दिन का महत्त्व है..बाकी लिखने के लिए तो कुछ भी लिख दे,क्या फर्क पड़ता है...अगर किसी को सम्मान नहीं दे सकते तो कम से कम उस का अपमान मत करे..हम हिन्दुस्तानी है,यही हमारे संस्कार बोलते है..किसी का दिल दुखा कर,उस को बेइज़्ज़त कर के आप या हम कभी सुखी और खुश नहीं हो सकते...नए साल का इस तरह से आगमन कीजिए ना...शुभकामनाये सभी के लिए..
बहुत ही खूबसूरत है यह फूलो की दुनियाँ..हज़ारो रंग हज़ारो रूप,महक हज़ारो भरी है इस मे..छूने

भर से महक जाते है हाथ..काश...दुनियाँ के इंसा भी ऐसे ही होते..खूबसूरत और दिल से महके..ना

देता कोई कष्ट किसी को ना देता अपमान..शायद किसी रोज़ बदल जाए इस दुनियाँ के इंसान,अंदर

से हो उतने ही सूंदर जितने दिखते बाहर से अनजान..बड़ी बड़ी बातो के मालिक,परखा तो दे गए

अपमान..शायद सतयुग फिर आ जाए और बदल जाए हर इंसान...

Monday, 30 December 2019

ख़ामोशीया बोलती है अक्सर यह बात..मैं हर पल तेरे साथ हू,तुझे सुनाई दे या ना दे तेरे हर एहसास

मे तेरे पास हू...तन्हा तन्हा जब भी हुए,आवाज़ ख़ामोशी की तभी सुनाई दी..अक्सर शोर मे खुद की

भी आवाज़ सुनाई नहीं देती फिर इस ख़ामोशी को कौन सुन पाता...किनारे दर किनारे,साँसों की

रफ़्तार को जब हौले से थामा हम ने..ख़ामोशी ने सवाल उठाया,क्यों पराया मुझे कर दिया तूने..सवाल

उस का वाजिब था मगर जवाब नहीं था पास हमारे..बस इतना कहा,तेरी बेकदरी अब से नहीं करे गे हम..
ऐतबार किया तभी तो प्यार का मतलब समझ आया..यकीन को खुद मे भरा तो फलसफा मुहब्बत

का नज़र आया..कुछ भी नहीं माँगा तभी तो जाना,मुहब्बत सज़दे के सिवा कुछ भी नहीं..सलामती

मांग कर भी खामोश रहे,मुहब्बत की दास्तां मे यह भी मुकाम खास पाया..रात भर जागे मगर उफ़ भी

ना की,तभी तो रात होने का मतलब खवाब ही पाया..सुबह सूरज की किरणों ने जगाया तो रात भर

जागने का मतलब समझ आया...
दर्द ही जीवन है और जीवन ही दर्द है..प्रेम को पाना भी दर्द है तो उस को खो देना भी तो दर्द है..

समझ समझ की बात है,दर्द और प्रेम जुड़े है इक दूजे के संग..मिला प्रेम तो मुस्कुरा दिए जो गम

मिला प्रेम मे तो क्यों रो दिए..प्रेम का दर्द झेलना जिसे आ गया,यक़ीनन उस को प्रेम करना आ गया..

दर्द मे भी गर इबादत प्रेम की सीख ली, तो प्रेम का सागर पा लिया..इसलिए दर्द ही जीवन है और 

जीवन ही दर्द है..

Sunday, 29 December 2019

कौन जाने कल क्या होने वाला है ..क्या पता किस को कहा जाना है..जीवन-रेखा से परे जहां कही

और बसाना है..यह कदम चलते-चलते कहा किस और मुड़ जाने है..बेफिक्री रहनी है या गहरे फ़िक्र

मे किसी को आना है..क्या पता इन सितारों की दिशा किस और जानी है..साँसों को मोहलत कितनी

किस को मिल जानी है..मुस्कुरा लेते है तब तल्क़,जब तक यह सांस आनी-जानी है..
बहुत लफ्ज़ो को उतारा हम ने इन पन्नो पे..भूले से भी याद क्यों ना आया कभी कि यह कलम तो हर

कदम साथ थी मेरे..लफ्ज़ लिखे जब जब मुहब्बत के तो साथ हमारे थिरकी यह..दर्द से भरा मन जब

भी मेरा तो भी साथ चलने से मना नहीं किया इस ने..कोई बेहतरीन ख़ुशी जो पाई मैंने,एक सच्चे दोस्त

की तरह आसमां मे छलांग नहीं लगाई इस ने..सरल सहज रहने का जो पाठ हम सिखाते रहे अपनी

कलम को,उस पे भी खरी उतर गई कलम मेरी..दुनियां का हर रिश्ता यह कलम है हमारी..तुझे आदाब

बजाए या यू कह दे तू ही हमसफ़र  हमराज़ है मेरी..
इन साँसों से पूछा मैंने,कब तक जहाँ मे रहने का इरादा है..कौन सी वजह है,जिस के लिए खुद को

दांव पे लगाना है..साँसों की हकीकत तो देखिए,बिंदास इस जहाँ मे रहती है..जवाब जो उस का सुना

मैंने तो क़यामत को भी मात दे जाती है..  ''मेरे साथ हर पल ज़िंदगी और मौत की बेला रहती है..इक

लम्हा मौत का होता है तो अगला पल ज़िंदगी का हो जाता है..खड़े है बिंदास बेखौफ,उस डगर पे जो

प्रेम की और जाती है..पाया जो परिशुद्ध प्रेम तो गले ज़िंदगी को लगा ले गे,नहीं तो मौत के साथ उसी के

देश चले जाए गे''......
प्यार को प्यार से ढाला और प्यार मुकम्मल हो गया...प्यार को जो नज़ाकत से तराशा तो वो सदा के लिए

हमारा हो गया..ना कोई बंदिश ना कोई वादा,फिर भी प्यार आसमां को छू गया...अब तो आसमां की

खवाइश है,वो रखे इस प्यार को आधा या फिर अधूरा..या मेहरबानी इतनी रहे,वो प्यार को दे आसरा

पूरा..प्यार मे तपिश रही इतनी जय्दा,आसमां आखिर झुका और धरती बनी गवाह उस से जयदा..अब

प्यार प्यार पे कुर्बान है खुद से भी जयदा..

Saturday, 28 December 2019

हंस दिए क्यों बिन बात पे...फिर अपनी ही राह पे चल दिए क्यों बिन बात के..महकने के लिए बस

काफी है खुद की ही दीदारे-नज़र..आईना भी कुछ कहता नहीं,हमारे हुस्न के रूहाब मे..मुस्कुरा दे

तो, ज़माना बात सिर्फ हमारी करता है..ओझल जो हो जाए नज़रो से,सलामती हमारी बस सोचता

रहता है..हम तो ठहरे आज़ाद परिंदे,किसी की कहां सुनते है..मस्त है बस अपनी ही धुन मे,किसी

के बारे मे नहीं सोचते है..हंस दिए यह सोच कर,खुद से प्यार कर गलत हम कहां हो गए...
निखर रही है क्यों रूप की यह चांदनी..कि रूहे-सनम मिलने आने वाला है..सजा ले हम भी अपनी

रूह को प्यार से कि सनम को हमारा रूहे-अंदाज़ बहुत पसंद है...नूर देख हमारे चेहरे का वो हम पे

फ़िदा होता है..सर्द हवा का मौसम है,सितारों से राह निकाल मेरे पास आना है..ताकीद तो है उस की

यही  कि हम उसी के जहां मे संग उसी के लौट जाए..याद उस को यह भी दिलाना है,वक़्त कम है

मगर जो वादा तुम से किया था कभी वो पूरा कर के ही आना है..
यह तो पायल की मर्ज़ी थी कि वो अपनी छन छन से धरा को मोहित कर दे..यह तो कंगना का फैसला

था वो कलाइयों को सजने का सरूर दे या ना दे..झुमकों ने तो बात मानी पायल और कंगन की,तेरे

बिना अब मेरा अस्तित्व कहां..करधनी है साथ मे,फिर मलाल किस बात का..सब ने कहा रूप से,है

तेरा वज़ूद बस हमीं से..रूप की यह खास अदा,साथ किसी का ना चाहिए..जो सादगी मेरे पास है,उस

के लिए तुम्हारे साथ की क्या बात है..मोहताज़ नहीं  किसी शृंगार के,हम तो भरे है नूर से बिन किसी के

साथ के..

Friday, 27 December 2019

''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ'' इस साल मेरी सरगोशियां मे आप सब  ने प्रेम के हज़ारो रंगो से इस को सजे देखा..कभी खुशियों से महकते,कभी दीवानगी मे रमे,कभी कभी रोते हुए यह सरगोशियां,हिम्मत भरे शब्द आप तक पहुँचाती रही...मुहब्बत की गहराई को समझाती,परिशुद्ध प्रेम की परिभाषा को कोमल शब्दों मे ढालती...समाज को प्यार-मुहब्बत का पाक मतलब बताती मेरी खूबसूरत सी सरगोशियां...दुःख-दर्द की सीमा से परे,प्यार को प्यार से समझाती मेरी सरगोशियां..राधा-कृष्णा के अलौकिक प्रेम का उदाहरण देती,सतयुग के प्रेम को फिर से इस कलयुग मे वापिस लाती मेरी सरगोशियां...देह-जिस्म के मोह से दूर,हवस की माया से परे..सिर्फ रूह के परिशुद्ध प्रेम मे डूबी हुई,अंत तक प्रेम मे समा जाने का मतलब समझाती मेरी सरगोशियां...साल २०१९ आप सभी का और हमारा साल रहा...सरगोशियां को बेहद प्यार से अपना बनाने का शुक्रिया...अगले साल यह सरगोशियां,फिर से प्यार के हज़ारो रंगो को साथ लिए,करोड़ो प्रेम शब्दों की जननी है मेरी सरगोशियां....''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ''  दोस्तों...बहुत बहुत शुक्रिया...इस को अपना समझने के लिए..आप की अपनी शायरा....''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ'' के अस्तित्व की धरोधर...
दो कदम तुम चले, पर चार कदम हम ने दिए..दो लफ्ज़ मुहब्बत के तुम ने कहे,हम ने प्रेम के कितने

शब्द ऐसे कहे...वो पाक थे कितने,वो खास थे कितने..पर तेरी समझ से बहुत बहुत दूर थे कितने..

ईश्वर कहे या बोले अल्लाह,या पढ़ ले रोज़ कुरान..दिल जो डोले इधर-उधर,लफ्ज़ तो सारे है बेकार..

निष्ठा है तो प्रेम टिके गा..सरल सहज सच मे मन है,तो प्रेम का साथ अनंत अनंत है...झूठी तारीफ वो

है सुनते,जो विश्वास खुद पे नहीं करते..कृष्णा-राधा संग रहे,क्यों कि मन दोनों के बेहद पाक-साफ़ रहे..

फुर्सत ही कहां है अरे ज़िंदगी,तेरे दिए दर्द-दुखो से मिलने की..बेबस कर तू चाहे जितना,कदम तो

 चले गे फिर भी उतने...हिम्मत जो छोड़ दे गे तो तेरे ही इंसा रुला रुला कर मार डाले गे..बेशक

एक अजब ताकत चल रही है साथ हमारे,जिस के तहत पूरा जहाँ जीत जाए गे..कुछ नरमी से तो

कुछ ख़ामोशी से,लाखो दिलो पे राज़ किया है हम ने..आज जो हासिल कर पाए है,किन्ही खास दुआओ

मे रह कर ही कर पाए है..बात याद हमेशा रखते है,ज़िंदगी और मौत मे ''सिर्फ एक सांस'' का फासला

होता है..

Thursday, 26 December 2019

शब्द कही पढ़े हम ने ''प्रेम के लिए ना जरुरत है देह की,ना किसी स्वर की..ना जरुरत मिलने की,ना

किसी रिश्ते की. ''   प्रेम तो इक बहुत शुद्ध सा वादा है,जैसा भी है बस इक सीधा-सादा नाता है..जिस

ने समझा वो रूह का पाक-साफ़ इरादे वाला है..दर्द मिले या सुख की बेला,प्रेम तो अनंत-काल का इक

सफर सुहाना है..रूप बदल कर जब रूहे मिलती है,परिशुद्ध प्रेम की परिक्रमा को दोहराती है..
रूप के चर्चे चारो और..निगाहो से घायल कितने लोग..फ़िज़ा मे आए तो फ़िज़ा बोली ,मेरा सलाम

तुझे बारम्बार...कदम रख दिए जहा भी हम ने,पिघली धरती झुका आसमान..एक इशारा पाते ही

सूरज छुपा बादलो के उस पार..नज़र लगे ना कही ऐसी वैसी,घटा काली आ गई हमारे साथ..देख

नज़ारा मौसम का,हम चल दिए फूलो के द्वार...थिरक रहे है कदम हमारे,क्यों कर रहे सब हम से

इतना प्यार...
बूंदे बरसती रही टप टप सारी रात...और हम समय को गिनते रहे सारी रात..दिल और दिमाग की

जंग मे पलड़ा भारी रहा दोनों का...दिल जो कलम को देता रहे गा शब्द मुहब्बत के..दिमाग जो साथ

दे गा शिद्दत से यह दिल को बताने के लिए..मुहब्बत को समझा इस ज़माने को यह बताने के लिए,

पाक रूह है तो मुहब्बत साथ देती जाए गी,जो मिलावट आ गई प्यार मे तो वो खुद ही खुद से रुखसत

हो जाए गी..ईमान जो डोला किसी और के लिए,दिल की ईमारत तो खुद ही हिल जाए गी..

Wednesday, 25 December 2019

यह तो हमारा रुतबा है..यह तो हमारा दावा है..ना है आसमां के और ना ही किसी लोक से है जुड़े..

टूटा जो किसी का अंतर्मन,रूठा जो किसी का उजलापन..अनमोल किसी डोर से बंधे,बचपन के

किसी परी-लोक से जुड़े..सब का दर्द हरते ही रहे..दुनिया समझी हम को दीवाना,पागल-अल्हड़

कितने और नामो से पुकारा..हम को तो जो करना है,राह अपनी पे चलना है..बेशक दर्द  कितने

मिले..यह तो रीत दुनिया की बहुत पुरानी है,जो पंख परिंदे को दे उस को उड़ा देता है..वही परिंदा

जाते-जाते नासूर गहरा दे जाता है..

शामियाना इन आँखों का,इन पलकों का..रेत जो उड़ी किसी और के रुखसार से,आँखों मे हुई किरकिरी

और सपने सारे धूमिल हो गए..भरी आँखों से जो समेटना चाहा इन बिखरे सपनो को,रेत जो फिर उड़ी

तेज़ रफ़्तार से,शामिल रही मर्ज़ी इसी मे आसमां के भेजे इस सैलाब से...जज़्बा तो गहरा है,आँखों का

धुंदलका रोशन फिर कर पाए गे..यह बात और है आँखों को,इन पलकों को,काजल से फिर ना भर

पाए गे...

Monday, 23 December 2019

यह नज़र जा रही है दूर तल्क़,शायद आसमां को छूने का इरादा है..यह कदम चल रहे है तेज़ी से,बेशक

मंज़िल को पा लेने की ख्वाईश है..खवाब अधूरे ना रह जाए,मेहनत करने की ज़िंदादिली तो अभी बाकी

है..खुशमिज़ाज़ रहे गे तभी तो जहां जीत पाए गे..दुनियां तो राहें रोकती आई है बार-बार,ज़िद तो हम ने

कहा छोड़ी है..किसी ने रुला दिया, किसी ने सजा दे कर तबाह कर दिया...कुछ दुआ थी साथ तो कुछ

कुदरत का नेक इरादा था,जहां जहां पांव रखे कुछ नेक इंसा भी मिले..आज जो पाया है,जज्बा ख़ुशी

का गहरा रंग लाया है..
क्यों खुश है आज,पता नहीं..बस चहक रहे है क्यों,पता नहीं..वजह तो हज़ारो है,क्यों बता दे..इरादा

क्या है पता नहीं..सुबह है आज इतनी खूबसूरत..दामन भरा है खुशियों से इतना,राज़ बता दे..शायद

नहीं नहीं..कल क्या था और आज क्या है..फर्क तो दिल की ख़ुशी का है..दिन तो रोज़ ही निकलता है

सूरज भी रोज़ चमकता है..फिर यह कदम हमारे उठ रहे है किस ख़ुशी से..क्यों बताए,यह भी तो

पता नहीं..
रात-रात भर हम जागे तेरी सलामती के लिए...तुझे कोई तकलीफ ना हो,सज़दे मे खरे उतरे..खुदा

को सच बताने के लिए..झूठ को पर्दानशीं का नाम क्यों देते,अपने भगवान् से भला धोखा क्यों करते..

हम ने आवाज़ दी उस को तुझे सौ बरस देने के लिए,सौ बरस मतलब ज़िंदगी को सहज जीने के लिए..

विश्वास की हर सीमा को पार किया,पूजा अपनी को सार्थक करने के लिए..फिर तेरी इस बात से क्यों

बेहद दर्द हुआ...कि अपने तो अपने होते है..

Sunday, 22 December 2019

सरगोशियां इक प्रेम ग्रन्थ...प्रेम,प्यार,विरह,अलगाव,नाराज़गी,तपिश और भी बहुत से रंगो से सजी है मेरी खूबसूरत सी सरगोशियां..मेरी कलम अक्सर प्यार,मुहब्बत के साथ-साथ परिशुद्ध प्रेम की परिभाषा भी लिखती है..इस संसार मे सच्चा प्यार लुप्त हो चूका है..तभी संसार मे हर दूसरा प्राणी दुखी है,क्षुब्ध है..वजह प्रेम को समझा नहीं जाता..प्यार सिर्फ देह तक,चेहरे के रूप-रंग तक ही सीमित रह गया है..आज तू साथ है तो कल कोई और साथ होगा..प्रेम की शुद्धता किस ने समझी..लोग सिर्फ चेहरे और जिस्म के सौंदर्य को देख रहे है..और उसी चेहरे के सौंदर्य का व्याख्यान भी अपनी नन्ही सोच के तहत कर रहे है..चेहरा जो सदा एक सा सौंदर्य कायम नहीं रखता..जिस्म जो सौंदर्य के माप-दंड बदलता रहता है..दुःख की बात,पुरुष स्त्री मे उस के रूप-रंग को ही देख पाता है..पुरुष की सोच ऊँची उठ नहीं पाती..क्यों ? स्त्री,जो पुरुष को तब भी प्यार करती है,जब वो उस से कम सूंदर है..वो उस को उस की कमियों का एहसास तक नहीं कराती..और यही पुरुष गलती कर देता है..वो खुद को भगवान् ही मान लेता है..और उसी स्त्री को सम्मान देना बंद कर देता है,जो उस को आत्म-विश्वास से भरती है..सरगोशियां,किसी भी खास स्त्री-पुरुष को सांकेतिक नहीं करती..अपनी कलम को अपने हिसाब से,हर पहलू पे लिखती है..किसी को बुरा लगे तो माफ़ी चाहती हू..मगर सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ है,जो बार-बार हर बार प्यार,प्रेम और मुहब्बत के हर रंग को उजागर करे गी..सरगोशियां इक प्रेम ग्रन्थ..प्रेम मे आत्म-सम्मान को सर्वोतम स्थान देती है..प्रेम,प्यार और मुहब्बत..तभी कायम है ,जब स्त्री-पुरुष दोनों अपने आत्म-सम्मान के लिए प्रेम को स्थान देते है..जहा आत्म-सम्मान है,वही प्रेम है..
कलम हमारी जब जब भी आवाज़ उठाती है..कभी टूटे दिलो को मिला देती है तो कभी खुद्दारी का

पाठ कितनो को सिखा देती है..लफ्ज़ मचलते है खुद ही किसी को पनाह देने के लिए..तो कभी सिरे

से किसी को पटक भी देते है..कितनो को सिखाया हंसना इस ने और कितने डूब गए इस कलम के

हसीन लफ्ज़ो मे..उदासी का जामा पहने बहुत बार यह कलम रोई है..मगर अपनी खुद्दारी से खुद ही

संभल जाती है..यह कलम तो सिर्फ हमारी है,आखिरी सांस तक लिखती जाए गी..बहुत कुछ लिखते

लिखते हज़ारो का नसीब बदल जाए गी....
देख अकेले ज़माना साथ चलने लगा,हम ख़ामोशी मे है वो दुखी होने लगा...हम आप के साथ है,बेवजह

करीब आने लगा..कुछ तो बोलिए,हमारी गुफ्तगू की इंतज़ार मे तरस देने लगा...हम जो हमेशा की

तरह तब भी और अब भी,शानो-शौकत की भाषा जानते है..ताकत से भरे है,मगर खुद को सभी से

जुदा रखते है..मुस्कुरा दिए ज़माने की सोच पे..''नादान है जो हम को नहीं समझते है..इस ज़माने की

बार-बार धज़्ज़ियाँ उड़ाते आए है..गिरते हुओ को उठाते आए है..ख़ामोशी को दर्द समझने की गलती

ना कर..ऐ,ज़माने,खुदा के दरबार मे खुद को साबित करते आए है''..
बरसों हम आगे बरसों तुम पीछे...कदम फिर भी हम साथ बढ़ाते रहे..रूह की कदर की और रूह

की और ही बढ़ते रहे..जाने-अनजाने भी ना सोचा,कदम कहाँ किस ने पहले रखा..वादा तो कदमो

की रफ़्तार का था..ज़िंदगी मे पहले कौन आया,किस ने कब किस को अपनाया...अनंत काल के प्रेम

मे कदमो की आहट कहाँ होती है..इबादत जहाँ होती है,वहाँ उम्र और पहल की दस्तक कहाँ सुनती

है...राधा सिर्फ राधा होती है,कृष्ण किस का है यह खबर उस को कहाँ होती है...परिशुद्ध प्रेम की

मिसाल सिर्फ राधा क्यों होती है,कृष्णा को परखने के लिए वो वचन-बद्ध होती है..

सो जा सकून से,दुआ करते है..सकून बेशक आज चुराया है तूने मेरा,मगर हम तो सदियों से आधे-अधूरे

है..जख्म देते है आप और हम खुद से मरहम लगाते है..दर्द की चादर ओढे हम फिर भी ज़िंदगी जी

लेते है..सर्द हवा का झौंका दर्द उड़ानें की कोशिश करता है..क्या कहे उस से,दर्द तो बरसो से हमारा

हमराज़ है..वो जानता है,किस्मत के छलावे को हम ने सर-आँखों पे बिठाया है..प्यार के बोल सुन कर,

दो पल के लिए खुश होते है..हकीकत तो यही है,सदियों से हम तो आधे-अधूरे है...
उजाले की हिफाज़त के लिए,अँधेरे को दूर रखा हम ने..अँधेरे जो बेइंतिहा दर्द देते रहे,अँधेरे जो हर

बार और बार-बार हिम्मत को तोड़ते रहे..खामोश रहना और अँधेरे का तमाम दर्द खुद से पी जाना..

और उफ़ भी ना करना..उजाले की इक नन्ही सी किरण के लिए,बहुत लड़े हम इन अंधेरो से...दुनियाँ

बेशक दाद देती रही हमारी हिम्मत की,पर ऐतबार किसी पे हम ना कर सके..मुस्कुराते रहे इतना कि

दर्द अँधेरे का हम से हार गया..उजाला मिला बरसो बाद मगर दर्द का इम्तिहान वो भी लेने लगा..अब

ऐतबार दोनों पे नहीं,ना अँधेरे पे ना उजाले पे..हिम्मत असली साथी है,जो हमकदम बन साथ चलता रहा..

Saturday, 21 December 2019

तन्हा ना रहो,ना उदास रहो..यह ज़िंदगी है यारा..इस से प्यार करो..कदम-कदम पे यहाँ बिकती है

ज़िल्लतो की कहानियाँ..बेवफा कब हो जाए यह ज़िंदगी की दास्तां,चुन ले फूल और भूल जा काँटों

की चुभती हुई काली कहानियाँ..जीना हम ने भी ऐसे ही सीखा है..जिन जिन काँटों ने दर्द दिया,प्यार

से दामन छुड़ा,आसमाँ की ऊचाईया को देखा और रास्ता खुद से खुद बना लिया..आज फूल साथ है,

इबादत की बात करे तो दिल मे खुदा का खौफ है..बस तन्हा ना रहो...यही ज़िंदगी है..यारा,इस से प्यार

करो...
बात लब पे ना आई,दिल ने भी ना कही..यह रूह ही है जो अपनी रूह को कही से भी ढूंढ लेती है..

''इज़हारे-दर्द बयां होता नहीं...तू क्यों रहे मेरे दर्द मे,ऐसी इंतिहा मैंने सोची भी नहीं..शरारत करू संग

तेरे,यह तो मुनासिब है..तुझे हंसा दू,यह मेरा वादा है..''  सदियों से चल रहे है साथ तेरे,तेरे दर्द को जान

लेते है तुझ से भी पहले...जिस्म दो है तो क्या हुआ,रूहों को तो यू जुदाई का सबब ना बना..तेरी रूह

मे शामिल रहती है रूह मेरी,दर्द तुझ को मिले तो रो देती है रूह यह भी मेरी..अब तू बेशक इज़हारे-

दर्द मुझे बयां करे  या ना करे ..तेरा दर्द तुझी से खींच लू,जान मेरी यह वादा तुझी से मेरा भी है...

Friday, 20 December 2019

नींद को आने दीजिए अब अपनी आगोश मे,कल की सुबह बहुत खूबसूरत होने को है...रात को ना

बिताना तारो को गिनते गिनते,कल मुहब्बत की फ़रियाद पूरी होने को है...बेवजह उदासी को अपना

साथी ना बना,तेरा हमराज़ तेरे हर राज़ को सुने,यह भी होने को है...कुदरत बिछा रही है फूलो को तेरे

कदमो के तले,अब यह नज़ारा तुझे दिख जाए..यक़ीनन यह बहार बस आने को है..नींद को अब आने

दीजिए अपनी आगोश मे,बस नई सुबह आने आने को है...
''दौलत और ऐशो-आराम साथ मे हो तो प्यार रंगीन हो जाता है--शब्दों मे नहीं, प्यार तो सिर्फ मंहगे

लिबासो मे होता है'' सुन के यह,दिल दर्द से भर आया.. हम प्यार बसाते रहे दुनियां के हर इंसा के

जज्बे मे.. मुहब्बत को आवाज़ लगाते रहे अपने पाक लफ्ज़ो से..परिशुद्ध प्रेम की परिभाषा के लिए

प्रेम-ग्रन्थ रचा हम ने..सादगी को अपना लिया,मुहब्बत को भी ढाला सादगी भरे शब्दों मे हम ने..जो

दौलत के तराज़ू मे तुल जाए तो प्यार कहा होगा..जो रख दे शर्ते हज़ारो,वो मुहब्बत का वारिस कहा

होगा..सीने मे बहुत दर्द उठता है,जब प्यार को दौलत के तराजू और गलत शर्तो मे तोला जाता है..
यू बार-बार राहें रोके गे हमारी तो साथ हमारे कैसे चल पाए गे...जरुरत मुझे तेरी और तुझे मेरी है,यह

बात बार-बार तुम को कैसे समझाए गे...चाँद की तरह बार-बार आप का यू छुप जाना,अँधेरा हुआ भी

नहीं और बिन बताए हमी से दूर चले जाना..तेरी रुखसती कितनी महंगी पड़ती है हमे,बताए तुझे कैसे

कि हम को बार-बार भूल जाना आदत है तेरी..और एक हम है आईना भी देखते है जब-जब,अपनी

सूरत मे तेरी ही सूरत दिखाई देती है हमे ...

Wednesday, 18 December 2019

ढाई अक्षर प्रेम के..जो ढूंढ़ने निकले इस जहान मे,कही ना कही कमी मिली हर किसी के प्रेम मे...

प्रेम जो था,किताबो की दुनियां मे..प्रेम जो था,दौलत के तहखानों मे..कही यह था,सिर्फ रूप-रंग के

हसीन तानो-बानो मे..कुछ सिर्फ प्रेम को हवस मान,दस्तूर इस का निभाते रहे..कही कोई दे गया आंसू

और ज़िंदगी प्रेम के लिए ख़ाक होती रही..क्या है प्रेम..ग्रन्थ पे ग्रन्थ लिखते रहे..पर कोई मिली ना राधा

ना कृष्ण कोई ऐसा मिला..जो प्रेम को सहेज ले सदियों तल्क़..अनंत से अनंत काल तक निभा दे ढाई

अक्षर प्रेम के...

कभी सूरज की तपिश मे रहे तो कभी चाँद की नरमी मे जिए..सुबह सूरज की भी मंजूर थी,चाँद की

सादगी भी कब नामंजूर थी..इंतज़ार तो उस क़यामत की रात का था,जो गुजरती इस तरह कि सूरज

को आना पड़ता यह बताने के लिए,सुबह भी कभी-कभी क़यामत को मात देती है..आगोश मे मेरी

खिलने के लिए,तुझे जरुरत तो मेरी ही होगी..चांदनी की आगोश मे चाँद जब-जब होगा,उस को खबर

तेरी कहां होगी..मेरी सुनहरी दुनिया की खूबसूरती बस इतनी है,तेरी मेहबूबा दिन के उजाले मे तुझ

से मिले..खौफ से परे ऐसी मुहब्बत कहां और होगी..

Tuesday, 17 December 2019

परदे मे रहे या बाहर इस परदे के,बात तो तेरे दीदार की है...खुली आँखों से देखे या बंद रहो इन आँखों

मे,तागीद तो सिर्फ तेरे सपनो मे आने की है...साथ मेरे हो या हज़ारो मीलो की दूरी हो,एहसास तो हर

पल तेरे नज़दीक होने का है..कौन कहता है,मुहब्बत साथ-साथ जीने का नाम है..हर लम्हा तेरा नाम

लबों पे रहे,सोते-जागते तू रूह मे रहे..हर सांस तेरे नाम से ले,फिर कौन कहां है इस की खबर कैसे

रहे..रूहे तो आज़ाद होती है,फिर तेरी रूह से मिलने के लिए..हम-तुम कही भी रहे,बात तो सिर्फ साथ

जुड़ने की है...

Monday, 16 December 2019

शाम ढलते ही तेरा रात को अलविदा कहना,यू लगता है मुझे अब सब कुछ ख़ाली-ख़ाली है...आसमां

मे बेशुमार सितारे है,रात भर वो हम से बात करते है...बात चलती है जब तेरी मौजूदगी की,हम तो कुछ

भी बोल नहीं पाते है..क्या कहे उन सब से,हमारा चाँद तो शाम ढलते ही ढल जाता है..बिन बादलों के

भी अपने मे ही ग़ुम हो जाता है..शायद शाम को ही रात का एहसास कराना,उस की खास आदत है...

पर खास आदत तो हमारी भी है,रात जब शबाब पे आये तो ही उस को रात कहते है..तेरी तरह शाम को

बेवजह ही रात नहीं कहते...

Sunday, 15 December 2019

अंदाज़े-बयां देख हमारा,उस की धड़कनो ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी..उस रफ़्तार की गूंज जब तक हम

तक पहुँचती,तब तल्क़ हम ने मुहब्बत की बाज़ी अपने हाथ मे ले ली..डरे-सहमे वो पास हमारे आए..

कुछ तो कीजिए ना इस रफ़्तार का,यह आप के सिवा किसी की बात कहा सुनती है..दिल के मरीज़ हो

तो पास हमारे क्यों आए हो..देख उन की रोनी सूरत,हम जो हँसे इतना हँसे..रफ्त्तार तो रफ्त्तार रही वो

तो हमारी जान के दुश्मन ही हो गए..
अपनी हर नाकामयाबी पे नाज़ है आज भी..कामयाबी जिस ने ऊँचा उठाया गर हम को,नाकामयाबी

की ठोकरों ने हौसला उतना ही बुलंद किया हमारा..गर्म रेत पे जितना झुलसे पाँव हमारे,शाँत हुए उतने

ही मन और दिमाग हमारे..मुश्किलात की राहें तब्दील हुई ऐसे,जुगनू चल रहे हो अँधेरी रातो मे जैसे..

रिमझिम बरखा सिखा गई आंसू पीने,सूरज की तेज़ रौशनी सिखा गई हर हालात मे जीना जीने..सिक्को

ने  सिखाया,सब कुछ मैं ही नहीं..मुझ से ऊपर है संस्कार तेरे...

Saturday, 14 December 2019

हम को..हमारे लफ्ज़ो को पढ़ने के लिए दिल जरा मजबूत होना चाहिए..हम हमेशा प्यार-प्रेम को

पन्नो पे नहीं बिखेरते..दर्द का पलड़ा भी साथ-साथ रहता है,उस के साथ जीवन का गहरा पैगाम भी

उसी का साथ देता लगता है...प्रेम भी तो मांगता है कुछ बलिदान..सब कुछ प्यार मे आसानी से मिल

जाता तो मशक्कत कौन करता मुहब्बत मे फ़ना होने के लिए...हज़ारो दिए जलते है तो दूर कुछ

अँधेरा होता है..सोचिए मुहब्बत तो रूह का साज़ है,इस को समझने के लिए दिल तो मजबूत होना

ही चाहिए..
कितनी ही खुशियाँ बिखरी है आगे ज़िंदगी की राहो मे..फिर क्यों कहे ऐ ज़िंदगी,तेरा ऐतबार हम

नहीं करते..हा सच यह भी है,तू दर्द जब जब देती है,बेइंतिहा देती है..पर शायद तू बेखबर है मेरे

दिल की झंकार से,जो ना तब डरा जब दर्द से बेहाल था..दर्द तो आज भी है इतने,जो तुझ को बताया

तुम तो फिर से बेइंतिहा हो जाओ गी..और हम अब वैसे रहे नहीं,जो तेरी बेइंतिहाई से खौफ खा मर

जाए गे..काश तुझे यह खबर हो जाए,तेरे दिए दर्द की चादर इतनी बड़ी नहीं,जितना हमारी हिम्मत का

समंदर  गहरा है...फिर भी तुझे प्यार तो करते रहे गे अरे ज़िंदगी...
बहुत शिद्दत से बिछ रहे है आप की राहो मे..कोई कांटा कही आप को दर्द भी ना दे,यह सोच कर

हम ने खुद को सिरे से सजा दिया आप की मुश्किल राहो मे...अनंत काल का यह प्यार,किसी सीमा

से नहीं बंधा...आप से क्या मांगे गे,क्या आप दे पाए गे...इन सवालों से परे,किसी भी सवाल के घेरे

मे नहीं डाले गे हम आप को...पाक रहे गे तो खुद ही खुदा की नज़रों मे उठ जाए गे..इम्तिहान तो उसी

को देना है,आप को बेवजह कुछ भी ना बताए गे...
कलम तो हाथ मे लिए बैठे है..मगर लिखावट तो दिल की ही है...दिल जो गूढ़ प्यार की बात करता है..

और कलम तो कलम है,उसी का आदेश मान पन्नो पे सब उतारती रहती है...दिल जो भरा है बेहिसाब

प्यार से,कलम को बस लिखना है इस को प्रेम-ग्रन्थ के हिसाब से...रहने के लिए सदा तो नहीं आए इस

 जहान मे..फिर क्यों ना ऐसा लिख जाए जिसे सदियों याद रखे यह जहाँ,हमारे नाम से..नफरत नहीं बस

प्रेम को हर दिल मे यू बसा जाए गे,जब भी प्यार की बात होगी लोगो को हम ही हम...याद आए गे..
मुहब्बत को जो सादगी से देखा तो इस का रूप मासूम और निष्पाप नज़र आया..बात जब समर्पण

पे आई ,साफ़ आसमाँ की तरह बेदाग़ नज़र आया ..हल्का सा पाप मुहब्बत को दाग़दार कर देता

है..झुकना और दिल के हर कोने से मुहब्बत को सैलाब की तरह बहा देना..राहो मे कदम-कदम

पे बिछ जाना,गरूर से नहीं मुहब्बत से अपनी जान को जीत लेना...जो बसा हो रूह मे,जिस्म के

मायने इस के आगे क्या होंगे..बात उठे गी जब भी शुद्ध प्रेम की,हम याद करे गे कृष्णा-राधा के

परिशुद्ध प्रेम की...

डर डर के जीना..जीवन की हर परेशानी को पहेली बना उलझा लेना..जरा से दर्द पे घबरा जाना..

ऊपरी सतह से दुनियाँ को जताना,हम बहुत काबिल है..बीच राह मे इत्तेफाक से हम को मिलना..

हम,जो जंग को भी लड़ते है इत्मीनान से..दुखों से सौदा करते है तो भी सकून और आराम से..

दुनियाँ ख़िताब देती है,ख़ुशनसीब इंसान का..हा,खुशनसीबी से भरे है सारे के सारे..मुश्किले डर

कर खुद ही हमे रास्ता देती है..हम मुस्कुरा दे तो बाइज़्ज़त खुद को ही बरी कर देती है..हा,दुनियाँ

वालो....यक़ीनन खुशनसीब है हम..दर्दो से मुहब्बत कर के,खुद ही को प्यार कर लेते है हम...

Friday, 13 December 2019

खड़े थे हम सामने और वो हमी को देख मुस्कुरा दिए..सोच मे हम पड़ गए,क्या कीमत अदा करे अब

तेरी पहली पहली मुस्कान की..सोच मे इतना पड़े कि बरखा आ गई आसमान से..शायद उस को भी

इंतज़ार था तेरी इसी भोली सी पहली मुस्कान का..नज़र उतार दी झट से हम ने मासूम सी इस मुस्कान

की..अभी तो बरखा ने किया है तेरा इस्तकबाल,अब कही धरती ना झूमे ख़ुशी से बारम्बार..देख ना,इस

मुस्कान की कीमत बहुत खास है,होश मे हम नहीं और तू माशाल्लाह...लाजवाब है...

Thursday, 12 December 2019

दो जोड़ी आँखों का हर जगह रहना..तुझे तो खबर ही नहीं,अपनी पलकों के आशियाने से तेरी हर बला

को टाल देना..रूहे-ताकत बहुत है हम मे..रेत मे भी जब चलते है हमारे कदम,वही रेत बिखरती है तेरी

राहो को सँवारने के लिए...हंस के ना टाल मेरी बात को,मेरी ख़ामोशी तक खुदा के दरबार तक जाती

है...वो जो कह दे दुनियाँ की भीड़ मे खो जा,उस का हुकम जो हो जाए हम तो अपनी साँसों को भी किसी

को दे जाए..यह ताकत भी उसी का वरदान है,जिस के कदमो मे हर पल हमारी पहचान है..
यू तो दरख्तों को इज़ाज़त नहीं दी हम ने,बेवजह झुकने के लिए...हज़ारो आँधिया आती रहे बेशक,तुम

रहना सदा रुतबे को संभाले हुए..धूप-छाँव का खेल भी बहुत सताए गा तुझे,बारिशों का मौसम बेवजह

भिगोए गा तुझे..कमजोर हुए जो खुद के अंदर से,यह ज़माना सीधे से काट डालें गा तुझे..खफा ना होना

उस बहते नीर से,जो हर मौसम मे सँवारे गा तुझे..ताकत तो वही बने गा तेरी हरदम,जो तेरी जड़ो को

सींचे गा दुलार से अपने..याद रहे,हज़ारो फलों से जब लद जाओ गे,तभी इज़ाज़त दे गे  हम तुझे झुकने के

लिए...

Wednesday, 11 December 2019

शहजादी हू मैं,बेनाम देश की...परी हू मैं,अनजाने से आसमां की..कुछ खास नहीं,पर बहुत खास हू...

जो सब के दिलो को छू जाए,ऐसी इंसान हू..दर्द जो अपना छुपा ले,मगर तकलीफ जो सभी की जाने..

हाथ मे बेशक कुछ भी नहीं,मगर दुआ से भरी हू सभी के लिए..हाथ की इन लकीरो मे क्या है मेरे,पर

हर जरूरतमंद के लिए यह हाथ उठे रहे है मेरे...लाड-दुलार की मांग लिए,सब से सम्मान का एहसास

लिए..ऐसी ही परी और ऐसी ही इक शहजादी हू मैं....
''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ'' शुद्ध प्रेम को परिशुद्ध प्रेम मे ढालती,सुर-ताल को मुहब्बत का नया आयाम देती,चूड़ियों की खनक को साजन के प्यार मे ग़ुम करती,प्यार जो ना सूरत से होता है,ना रंग-रूप से ,ना दौलत की खनक से..जो प्रेम दौलत के लालच  से बंधा हो,वो प्रेम हो ही नहीं सकता..प्रेमी के सुख-दुःख मे-उस की तकलीफ मे अपनी दुआ का रंग भरती,ग़ुरबत मे भी उस के संग-साथ रहने का वादा करती,उस से जुड़े हर इंसान को प्यार से अपना लेती.प्रेम मे झूठ की कोई जगह नहीं होती,झूठ प्रेम को खतम कर देता है......यह है मेरी खूबसूरत सरगोशियां,जो प्रेम के हर रंग हर रूप को आप के सामने लाती है..भावनाओं की इबादत करती मेरी यह सरगोशियां...इस के हर लफ्ज़ को प्यार और सम्मान देने के लिए,आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया..आभार..अभिनन्दन..  आप की अपनी शायरा 

Tuesday, 10 December 2019

रास्तों मे अँधेरा बार-बार आए गा..कभी-कभी अनजान रास्तों को,अपनी झूठी रौशनी से भी तुझ को

लुभाए गा..दौलत और ऐशो-आराम का वादा दे कर,बीच राह धोखा दे जाए गा..चकाचौँध दौलत की

कही तुझे अपनों से बहुत दूर ना कर दे..सकून की तलाश पाने के लिए,सकून को ही मत खो देना..

जीने के लिए दौलत जरुरी है,पर प्यार के बिना भी तो ज़िंदगी अधूरी है..हम रुके है इसी मोड़ पे,क्यों

कि हम को तो सिक्को से जय्दा,प्यार की जरुरत है...
जिस्मो-जान हो या मेरी रूह की ताकत..पलकों का आशियाना हो या इन आँखों की नमी..तेरे लिए

दुआ की कही कोई कमी आज भी नहीं..तू है पूजा का वो फूल,जिस के लिए इबादत भी है और तेरी

इनायत भी की है मैंने...कौन सी राह ऐसी होगी,जहा तेरे चलने से पहले खुद को ना बिछाया होगा मैंने..

बस एक गुजारिश,प्यार से सींचे रहना दामन मेरा..साँसों का यह पिंजरा ताउम्र  कैद रहे बस तेरी उल्फत

की छाँव तले..

Monday, 9 December 2019

सब गर एक ही सिक्के के पहलू होते,तो हम सब से अलग क्यों होते..बने जब तेरे लिए ही है तो यह

सिक्के हमारे लिए क्या मायने रखते...शाम के धुंधलके से परे,सुबह की लाली से परे..दुनियां का साज़

तुम्ही से तो है...मुस्कुराना बस तुझ को सिखा दे,दुनियां की जंग मे हिम्मत से रहना भी सिखा दे..यह

फ़र्ज़ नहीं,यह तो हमारा रुतबा है..हमारी चमक हमारी हंसी,जीने की बिंदास अदा..अनंत काल तक

मजबूर तुझे हमारा होने पे कर दे..अलग-थलग है तभी तो तेरी राधा है..
ग़ुरबत मे रहो या ऐशो-आराम मे..आसमां की खुली छांव मिले सोने के लिए या बिछौना चादर का..

बात तो तेरे साथ की है..कहने को तो सब कह देते है निभा दे गे दूर तक,पर जब आती है निभाने पे

तो प्यार हवा हो जाता है..वादे सारे धरे के धरे रह जाते है..शुद्ध प्रेम की परिभाषा जब भी लिखते है,

तब तब इन सब से बरी हो कर ही लिखते है..दूर तक प्यार निभाने के लिए,साथी को ग़ुरबत मे भी

समझने के लिए..खुद से बहुत ऊपर उठना होगा..तभी तो साथी को हर बार,हर जन्म पाना होगा..

Sunday, 8 December 2019

सिर्फ चेहरा अगर प्यार का दर्पण होता,तो प्यार-मुहब्बत का मायना यही तक सीमित होता..देह का

सुंदर रूप जब तक रहता,प्यार-मुहब्बत क्या तभी तक होता..प्यार की शुद्धता,उस का मायना..कितनो

ने ठीक से समझा..चेहरा सुंदर,देह भी सुंदर..मन और रूह है बहुत बदसूरत..क्या प्यार तब ज़िंदा रह

पाए गा..कर्कश वाणी,मैली काया..क्या साजन को लुभा पाए गी..प्रेम-प्यार का असली गहना,रूह से

सुंदर.मन से सुंदर .मंत्र-मुग्ध से बोल अनोखे..जो तू प्यार से मुझ को सींचे,रूह के बंधन सदा ही तेरे..
यह कलम हमारी जब भी लिखती है ..कायनात मे छिपी सारी मुहब्बत को,रफ्ता-रफ्ता पन्नो पे उतारती

है..कलम मुहब्बत की पाकीज़गी से भरे लफ्ज़ ही उठाती है.. मुहब्बत,जो बेदाग़ है..मुहब्बत,जो निष्पाप

है..मुहब्बत,जो रूहों का अनकहा एहसास है..ना जाने इसी पाकीज मुहब्बत के लिए,कितने लफ्ज़ पन्नो

पे और उतारे गे..मुहब्बत और क़ुरबानी,इक दूजे का नाता है..मुहब्बत,जो सिर्फ देती है..वक़्त आए तो

क़ुरबानी भी दे जाती है..तभी तो पाक कहलाती है..
वो कहते है हर चेहरे मे,उन को हमारी झलक दिखती है..अल्लाह-तौबा,कभी कहते हो हम जैसा कोई

और नहीं..तुम हो बेहद खास बहुत ही खास..जब है हम इतने खास,तो हर चेहरा हम जैसा क्यों होगा..

फिर यह मुहब्बत नहीं,यह तो नज़र का धोखा है..इज़ाज़त तो हम अपने आइने को भी नहीं देते कि वो

हम को हम से जयदा झलका दे..तेरी बात करे तो कहते है,तेरा चेहरा सुभान-अल्लाह..इस के जैसा

कोई और ना ठहरा..यह है मुहब्बत का ऐसा पहरा,तेरा जैसा और ना दूजा...

Saturday, 7 December 2019

धड़कनें बहुत धक् धक् करे गर आज तेरी..तो समझ लेना दिल कही दूर जाने को है...पसीना गर माथे

पे बरबस आने लगे,समझना तू खुद से ही जुदा होने को है..कदम बेसाख्ता मेरी और चलने लगे,नशा

मुहब्बत का भारी होने को है...नींद की आगोश मे जाते-जाते गर ख्याल हमारा,नींद उड़ाने लगे तो या

अल्लाह--तेरा अंजाम खतरे मे आने को है..इतना कुछ गर होने को है,तो तौबा तौबा मेरी..तेरी मंज़िले-

मुहब्बत बस तेरी होने को है...
गुस्ताखी कर ना कर,राहों मे तेरी फिर भी आए गे..कशिश ही कुछ ऐसी है हम मे,तेरे दिल को तुझी

से ले जाए गे..नज़ारा देखा है कभी समंदर का,बहुत गुमान है उस को अपनी गहराई पे..अक्सर रुक

जाता है सतह पे,खुद को सहज बताने के लिए...यह जाने बगैर कि वो खारा है अंदर से कितना..वही

बात तो तुझ मे है..एहसास है तुझे कि तू कितना खारा है,बिन मेरे तेरा कहा गुजारा है..आना ही पड़े गा

पास मेरे तुझ को,कि मीठा होना हम ने ही तुझ को सिखाया है...
धरती-आसमां कब मिला करते है..गज़ब तो यह है कि वो ना मिल के भी हर वक़्त मिला करते है...दूरी

भले है कितनी,देख कर रोज़ दोनों इक दूजे को संभाला करते है..एहसास ही तो है,जिस ने दोनों को साथ

ना हो के भी साथ बांधे रखा है..लाजवाब है रिश्ता,जिस को कोई ना तोड़ सकता है..नाराज़ है धरा अगर

तो आसमां खुल के रोया करता है..गज़ब रिश्ते का नाम है ,धरती भी उस के नीर को खुद मे पूरी तरह

जज्ब कर लिया करती है...
शुद्ध है या परिशुद्ध है प्रेम,यह तो इंतज़ार ही बताता जाए गा..मिलना है या फिर कभी भी नहीं मिलना

है,यह तो कुदरत का फैसला ही बतलाए गा...इबादत मे ताकत किस की होगी,जवाब तक़दीर का खास

दिन ही बताए गा..दुःख-तकलीफ़ों को कौन जयदा सह पाए गा,पैमाना सहने का ही बता पाए गा..सब

छोड़ दे खुदा की मर्ज़ी पे,तेरा-मेरा मुक़द्दर लिखने वो ही आए गा..हिम्मत को साथ रखना है,मुस्कराहट

को संभाल कर रखना है..देख शुद्ध प्रेम,खुदा भी रास्ता खोलने आ जाए गा..

Friday, 6 December 2019

ना जुबाँ से कुछ कहा ना निग़ाहों ने कुछ कहा...बस आँखों की चमक ने, उस के दिल का दरवाजा खोल

दिया..इकरार ना उस ने किया ना हाले-दिल हम से कहा गया..मगर मुहब्बत का दिया रौशन जहाँ बस

कर गया..अब तो याद यह भी नहीं कि प्यार की राह पे,कदम पहले किस ने रखा...जहाँ तक यादों मे

आता है,कदम शुरू मे भी साथ चले थे..जैसे अब साथ चलते है...बस कुदरत के करिश्मे पे फिर से

यकीं हो जाता है..नाम तो आज भी याद कर,चेहरा सुर्ख हो जाता है..शायद रंग प्यार का ऐसा ही होता

है...

Thursday, 5 December 2019

परतें जब जब दिल की खुलने लगी..मन की गांठे एक एक कर सुलझने लगी..रफ्ता रफ्ता करीब आने

लगे..शाम के धुंधलके की इंतज़ार मे,दो दिल गुफ्तगू की तलाश मे नज़दीक आने लगे..कुछ मासूम सी

बातें,कभी इक दूजे को समझने के लिए अनकही छोटी छोटी मुलाकातें...शुद्ध है प्रेम इतना,जन्मो का

गहरा नाता बदल रहा है दोनों को,एक-दूजे जैसा..बेशक दो जिस्म दिखते है,मगर रूह मे तो एक जैसे

है..सदियों बाद दो रूहे धरती पे उतरी है,कौन जाने कब से धरा पे आने को तरसी है...

Wednesday, 4 December 2019

''आबाद तुझे बहुत ज़िंदगियां करनी होगी..कितनों को शिखर पे पहुँचाना होगा..दर्द तेरे दिल मे कितना

भी भरा हो बेशक..मगर औरो के सुख और ख़ुशी के लिए तुझे खुद को,पूजा के धागों को निश्छल मन

से बुनना होगा..मेरे दिए संस्कारो को आखिरी सांस तक तुझ को निभाना ही होगा.'' गूंज रहे है वो लफ्ज़

हर पल मेरे कानो मे..संस्कारो को अपनी आखिरी सांस तक निभाए गे बाबा..सब को दे गे ख़ुशी,जितने

धागे पूजा के बांध सके दूजो की ख़ुशी के लिए,बांधे गे..डर के नहीं जीना है,खुद्दारी मे अपनी रहना है..

यह वचन भी बाबा,आप की कसम मरते दम तक निभाए गे..सहज सरल हमेशा रह कर,आप की बेटी

होने का धर्म निभाए गे..

Tuesday, 3 December 2019

 तकरार से हासिल क्या होगा,जब प्यार नख से शिख तक बरस रहा है..तुझे जीतना क्यों,तुझे हासिल

भी करना क्यों..जब मुहब्बत हमारी खुद ही तुझे हम से बांधे है..साफगोई मन मे लिए,निश्छल प्यार

जब है कायम रूह मे तेरे लिए..सदियों तल्क़ कोई शिकायत भी नहीं तेरे लिए..बस एक ही गुजारिश

तेरे लिए,प्यार का यह दर खोले रखना सिर्फ और सिर्फ...सिर्फ और सिर्फ..मेरे लिए..इस के सिवा कुछ

और ना चाहिए होगा मुझे तुझ से कभी मेरेलिए ...
खुशबू तेरी साँसों की,महक तेरे जिस्म की..मेरे जिस्म मेरी रूह मे इस कदर शामिल है..कही भी जाऊ

किसी भी महफ़िल मे रहू,तेरी ही परछाई साथ मेरे रहती है..वो तेरी गहरी काली झील सी आंखे,वो

तेरी अनकही कुछ बातें..अब कुछ कुछ समझ मुझे आने लगी है...समर्पण की बेला मे भी मेरे सम्मान

को कायम रखना,बाइज़्ज़त मुझे अपना कहना..इबादत मेरी भी उतनी ही करना,जितनी खुदा के बाद

मेरा हक़ होना...तुझे फ़रिश्ता कहे या मेरे नसीब का गहना..इस से जयदा अल्फ़ाज़ तेरे लिए,अब कहां

से लाए मेरे सनम...
तुझे जीना सिखाए गे..तुझे हंसना भी सिखाए गे..यह लब जो हमेशा सिले रहते है,इन को बोलना भी

सिखाए गे..नन्ही नन्ही बातो पे बेवजह खफ़ा हो जाना..गुफ्तगू हमीं से करने का दिल होना,पर फिर

भी चुप रहना..खुदा से हमारी ही सलामती मांगना,मगर हम को ही नज़रअंदाज़ कर देना..झूठ बोलना

और हम से ही सच छिपा लेना..जब इतना कुछ सिखाए गे तुझे,तो सच बोलना जरूर सिखाए गे..कि

सच तेरे ही मुँह से सुने,यह भी जानम तुझ को ही सिखाए गे..

Monday, 2 December 2019

नींद की परतों से जागे आज तो लगा बरसो बाद सोए है...नींद ने ऐसे लिया अपनी आगोश मे,सितारों

के बीच चाँद जैसे खो गया हो मदहोश मे..सपनो की दुनियां मे थे या हकीकत के किसी खवाब मे..

जहा भी थे बहुत सकून बहुत आराम से थे...शामियाना पलकों का यू बंद था,कमरे मे रात थी लेकिन

उजाला आँखों मे था..मुद्दत का सपना साकार होने को है,कि नींद की परतों से जागे आज तो लगा

बरसो बाद आज ही तो सोए है...
मोड़ ज़िंदगी मे बहुत आते है,आते रहे गे..कभी यह ज़िंदगी ले जाए गी आसमां के उस पार तो कभी

तक़दीर के तहत धरा पे पलट-गिरा जाए गी...ना इतराना आसमां मे अपने पंखो की उड़ान पर,ना

दर्द से बेहाल होना अपने गिर जाने के खौफ पर..तक़्दीरों के खेल बहुत न्यारे होते है,मुट्ठी खुली है

आज तो कल बंद भी हो सकती है..यारा,सुन जरा..जो मिट्ठी से सने तेरे कदमो को भी चूम ले,जो

तेरी भीगे पलकों को भी अपने आंचल से सोख ले..बस वही सच है,जो हर मोड़ पर खरा और खड़ा

रह पाए गा साथ तेरे...

Sunday, 1 December 2019

याद कीजिए गा आहिस्ता आहिस्ता तो सब कुछ याद आता चला जाए गा..बंधनो का राज़ खुद ही

खुलता चला जाए गा..तुम कौन हो और हम कौन है,वक़्त के साथ खुद ही समझ आता चला जाए

गा...क्या चाहे गे तुम से,कुछ भी नहीं..कुछ भी तो नहीं...कलयुग मे राधा भी है तो कृष्ण यही साथ

होंगे..बात रिश्ते की करे तो सतयुग के साथ होंगे...ना राधा जी पाए गी अपने कृष्णा बिन तो कृष्णा

कहा अधूरे जी पाए गे..बात यकीन की है,तो कहे गे धर्म तो रूहों ने भी निभाए है..
बेबसी मे क्यों नीर इन नैनो से निकल आए...तू बहुत दूर है मुझ से,यह सोच कर नैना फिर भर आए..

इक सांस जो आती है,इक सांस जो जाती है..तेरे नाम को याद करते आती-जाती है..तेरा आना भी

नामुमकिन है,तेरा मिलना तो बहुत दूर का कोई सपना है..ख़ामोशियों मे अक्सर तेरी आवाज़ सुनाई

देती है..आंख से निकल कर दो बून्द आंसू पन्नो पे गिर जाते है..तेरे लिखे नाम को यह फिर भी ना

मिटा पाते है...
रूप के यह मेले,मेरे या फिर तेरे..कुछ वक़्त के है..ना गुमान कर सूरत की रोशनाई पे,जो ना सदा

तेरी रहनी है और ना मेरी ही रहनी है..प्यार करना है तो बस रूह से कर,जो अनंत काल तक ऐसे

ही रहनी है...रूप से जो प्यार करे गा,वो तेरे दर्द-दुःख का हमराज़ कहा होगा..नकली प्यार का नकली

मुखौटा जल्द ही सामने आ जाये गा..मन सूंदर और रूह सूंदर,वाणी हो मीठी-मीठी..जो तेरा दर्द

तुझ से पहले समझे,तेरी पीड़ा खुद ही हर ले..अब तू ही बता,रूप है पहले या रूह की पहचान है

पहले...

Saturday, 30 November 2019

ग्रन्थ प्रेम का है तो प्रेम ही लिखना होगा..दुनिया को प्रेम का मायना तो बताना होगा..लो प्रेम की जब

जलती है तो मन-आंगन महकाती है..आखिरी सांस तक दिया अपने मन का जलाती है..बीच राह मे

दिए की लो को खुद से बुझा देना,फिर उन्ही लपटों मे देर-सवेर खुद ही जलना..वक़्त रहते जो ना

समझा,प्रेम की लपटे खाक खुद ही खुद से कर जाती है..देह का प्रेम प्रेम नहीं होता..प्रेम तो सिर्फ

समर्पण की बेला का मोहक रूप होता है..जो छू ले रूह साथी की,वह प्रेम अमर हो जाता है...
वो दूर तक जाने की ललक,मंज़िल को पा लेने की कसक..चलना है अब बेशक अकेले ही सही,मगर

मंज़िल की ख़्वाइश जरुरी है अभी..कोशिश करना,फिर गिरना फिर से गिरना..हिम्मत टूटने का पैमाना

तो नहीं..जाबांज है कोई मिट्टी का खिलौना तो नहीं...जो खुद से हासिल कर पाए तो जीत तेरी-मेरी ही

होगी,बेशक चलना है अकेले ही सही..तू साथ नहीं पर मेरी साँसों मे तो है..इतना ही काफी है तेरा नाम

मेरे नाम के साथ बाकी तो है...
सूरत खूबसूरत है या श्याम सूरत..प्यार का इस से क्या लेना क्या देना..ना उम्र ना बंधन ना जात-पात,

इन सब से मुहब्बत का नहीं कोई वास्ता..मन है निहायत खूबसूरत,तो ही रूहे फ़िदा हुआ करती है..

ख़ुशी से महक जाया करती है..तभी तो सदियों साथ रहा करती है..रूप बदल बदल हर जन्म मिला

करती है..यह जाने बगैर सूरत तेरी-मेरी हर बार क्या मायने रखती है..

Friday, 29 November 2019

हम खामोश क्यों है इतना.गर इतना ही पूछ लिया होता हम से, तो जान पाते कि क्यों इतना खामोश

है..सागर की अपार गहराई मे छिपे मोती,निकाल लेना आसान नहीं होता..बस वैसे ही हम को जान

पाना आसान नहीं होता..साँसों का साँसों के सामने निकलना,कभी देखा है..जो अपना नहीं मगर,उस

को अपनी आँखों के सामने जाते देखा है..अंतर बेशक जय्दा नहीं,पर यह भी तभी जान पाते जब हम

से यह पूछा होता कि हम इतने खामोश क्यों है...

Thursday, 28 November 2019

मौत से जंग लड़ के आए है इस प्यार की दुनियाँ मे जीने के लिए...जीना है कितना इस को, बताए गे

प्यार की भाषा के तले...तिनका-तिनका चुना और घरौंदा खुद से बना,किसी को आने की इजाजत ना

देते बना..जज्बातों के सागर से नींव बनी..पलकों से बना शामियाना,दिल ने सजाए अरमां इस मे और

धड़कनें भूल गई सारा जमाना...जब तक है साँसे,यह शामियाना हमारा है कि मौत की बाज़ी जीती है

हम ने इस प्यार की दुनियाँ मे जीने के लिए...
यह वैसी ही कोई शाम है या यादों का धुंधलका...प्रेम की मीठी बतिया चुग रही है आज भी यादों से

दाना..कौन कहता है,सारे प्रेम सही होते है शुरुआत मे,संदिग्ध हो जाते है मध्य मे और गलत हो जाते

है अंत मे..मुस्कुरा दिए इस प्रेम की बात पे..प्रेम की शुद्धता जानी है जिस ने रूह की पुकार से,वो कहा

माने गा प्रेम का कौन सा आधार है..ना इस की कोई शुरुआत है,ना मध्य है ना ही अंत है..जो लिपटा है

इबादत के मासूम महीन धागो मे,जो रहा सदा पूजा के थाल मे..जो अब भी रचा है उसी अनोखी शाम मे.
दिन और तारीख का इस मुहब्बत से क्या वास्ता..बंधे जब सुर-ताल साथ मे तो वक़्त से क्या लेना

मशवरा..दूरियां बेशक रहे,गुफ्तगू भी रहे ना रहे,सिलसिले बेशक रुकते रहे..अंकुर जो बोए प्रेम

के,वो तो खुद ब खुद अंकुरित होते रहे..संबंधो का अंत कभी होता नहीं,मर कर भी दूर कोई जाता

नहीं..प्रेम तो प्रेम है..मौन से है जिस का वास्ता,मौन है जिस का रास्ता..रूहानी-खेल है प्रेम यह..

अनंत था,अनंत है अनंत ही रहे गा प्रेम यह.....

Wednesday, 27 November 2019

मन जब निर्मल रहा सदा,इक रेत का कण भी क्यों बीच मे आया..वाणी रही सहज सरल,तूफान का

रुख क्यों अचनाक बीच मे आया..खामोश बहुत था आसमाँ,अचनाक बादलों ने क्यों उत्पात मचाया..

क्या यह लेखा-जोखा था तक़दीरो का या दर्द खुद ही खुद से चल कर आया..सब कुछ बदला,क्यों कर

बदला..शायद होता है कभी कभी,साफ़ महकती धारा मे मिल जाता है कीचड़ कभी कभी..
लफ्ज़ो को निखारने के लिए,खुद पे भारी होना जरुरी है..जान-जिस्म खुद से बेज़ार है,मगर लफ्ज़ो का सही

चलना जरुरी है..प्रेम को लिखने के लिए कलम का लिखना जरुरी है..यह जहाँ वैसे ही बेख़याल है प्यार

से,गर प्रेम की परिभाषा को ही लिखना छोड़ दिया तो नफरत का सैलाब उमड़े गा पुरज़ोर से..प्यार कभी

मरता नहीं,प्यार के मायने बदलते है वक़्त से...प्यार,प्रेम और मुहब्बत..जो कण कण मे सांस लेता है ऐसे,

इक नन्ही सी धारा होती है नन्ही,मगर सागर मे मिल जाती है बखूबी मदहोश से...

Wednesday, 20 November 2019

खुद को खास इतना भी ना बना कि फिर आम ही ना रह पाए..मुद्दतो कोई पीछे-पीछे आया नहीं करता..

बार-बार कोई इतना मनाया भी नहीं करता..रफ्तार तेरी ज़िंदगी की तेज़ है इतनी,हमारे सिवा तेरा साथ

कोई निभाया नहीं करता..सूरत को तेरी ध्यान से कब देखा हम ने,रूह से ही जुड़े थे बस इतना ही सोचा

था हम ने...कुछ वक़्त और इंतज़ार करे गे तेरा,लाज़मी हो जाये गा हमारे लिए फिर से उन अंधेरो मे

लौटना,जहा हम अपने अंधेरो से लड़ कर,दुसरो को जीवन दिया करते है...जहां परिंदे भी हम से मिला

करते है..
अनंत,अथाह,अखंड प्रेम करते रहे...पर कसूरवार सिर्फ इतना रहे,प्रमाण इस का तुझे कोई दे नहीं पाए..

ख़ामोशी का प्यार कभी बोला नहीं करता..रूह मे जो दबा हो वो बाहर आ नहीं सकता..तक़्दीरों के खेल

बहुत ही निराले है,जो मिट जाते है प्यार मे वो सदा आधे-अधूरे रहते है..जो करते है दिखावा इस प्यार

मे,जो चलते है गहरी चाल इस राह मे..जिन के लिए प्यार इक सौदा है,तक़दीर भी जिन के लिए धोखा

है..समझ तो अब आया कि प्यार का नाम भी धोखा होता है...

Monday, 18 November 2019

जो रूह से महसूस हो कर सीधा रूह मे उतरे...जिस को ना कभी देखा,ना कभी मिले ना कभी मिले गे...

प्यार ऐसा भी होता है...फिर भी जो इक दूजे को समर्पित हो,खामोश हो..वो प्यार शुद्धता से भी,कही

जयदा शुद्ध है...कोई कहे यह अलौकिक है...ना कुछ रिश्ता,ना कोई मांग है..फिर भी रूह के बहुत पास

है..सदियों मे मिलती है ऐसी रूहे,तक़दीर वाली होती है ऐसी रूहे..तक़दीर वाले ही इस प्यार को समझ

सकते है..''यह है वो बेखौफ रूहे जो सिर्फ सपनो मे ही मिला करती है''...

Sunday, 17 November 2019

चुन चुन के हज़ारो लफ्ज़ लिखे..पर प्रेम पे अभी भी सब आधे-अधूरे ही रहे..कितना और लिखे गे,खुद

को भी नहीं पता..शायद तब तक,जब तक यह जग जाने गा इस प्रेम की भाषा...तकरार रहे मगर इक

विश्वास रहे..साथ नहीं पर साथ तो है..जीवन है या फिर मौत के धागे,प्यार हमेशा सब से आगे..मौत

कब छीन पाती है इस प्यार का धागा..जन्म-जन्म का है यह नाता..बहुत लफ्ज़ है लिखने बाकी,प्यार

की भाषा बहुत अनोखी..विरले समझे इस भाषा को,तभी तो लिखना है बहुत कुछ बाकी... 
तू अजनबी भी नहीं,बेगाना भी नहीं...कौन है तू,इस की खबर तुझ को भी नहीं..झूठ को हमेशा सच

साबित करना और सच की दुनियाँ से कोसो दूर रहना...यह ज़िंदगी है यारा,मतलब के यहाँ रिश्ते है..

साथ तब तल्क़ है,जब तल्क़ सर झुकते है..वज़ूद तेरा भी है और वज़ूद मेरा भी तो है...राहें हम ने भी

खास ऐसी चुनी,जिन पे चलना पहली सांस से जरुरी है...नूर बरसता है आप के चेहरे से,सुन कर यू

लगता है कि जो बाबा ने कहां,वो यक़ीनन सच लगता है..पर सच तो यह भी है कि तू आज भी अज़नबी

नहीं,ना ही बेगाना लगता है...
खुश रहने की वजह क्या होगी...जहां दिल की ख़ुशी होगी..यह वादियां बला की खूबसूरत है,लगता है

ओस की चादर ओढ़े है..नन्हे नन्हे पग जब चलते है इन राहो पे,दौड़ते है संग इन के मासूम इशारो पे..

यह कहते है परी हम को,हम ढूंढ़ते है अर्थ ज़िंदगी का हर दम..जो नसीब से हट के मिले,वो हमारा होता

है...जो कदर हमारी जरा ना करे,वो सिर्फ दर्द होता है...
प्यार की इंतिहा है कितनी..यह सवाल तेरा कैसा है..''जब हर कण मे प्यार दिखे,हर पत्ते मे,हर जीव

मे प्यार दिखे..हवा के हर झोके मे,धरा से आसमां तक..हमारी नज़र मे प्यार ही प्यार हर और है..तेरा

सवाल बेबुनियाद  है..जब हम को हर जान-बेजान मे प्यार दिखे तो सोचिए जानम,तेरी जगह कैसी

होगी..शक ना कर अपने प्यार पे,तूने ही पूछी है इंतिहा मेरे प्यार की..सब जगह प्यार ही प्यार है,मगर

मुहब्बत की खास जगह तो तेरे साथ है'' ...

Friday, 15 November 2019

तू करीब से गुजरा इक तूफानी झौंके की तरह...हम ने सराहा तुझे इक मुहब्बत की तरह..हवा के रुख

से तू निकल गया किसी अनजान राह पे,बस हम ही रुके रहे तेरे छोड़े हुए उसी मोड़ पे ..आज भी खड़े

है उसी मोड़ पे,जहां से आगे ना ही पीछे कोई रास्ता है किसी और नाम से...परिशुद्ध था प्यार मेरा या

तेरे लिए कोई अनोखी दास्तां...समझ तेरी तेरे साथ है,वफ़ा की पहचान हमारी बात है...
गीली रेत पे पाँव रखे तो सर्द मौसम का एहसास हुआ, याद आया गर्म मौसम तो अब विदा हुआ.. ''सरगोशियां ''  आप की शायरा 
'' राहें खोलिए हमारी '' आप के साथ से अब दम घुटता है..नहीं चाहिए इतना प्यार कि तुम्हारे इतने

प्यार से अब डर लगता है...सुन कर हम बदहवास हो रो उठे...वो भी क्या ज़माना था जब हमारे साथ

से आप को सकून मिलता था..खत्म ना होती थी बाते,वक़्त कब कैसे गुजर जाता था..आज काम है

बहुत जयदा,यह बता कर वो हम से बहुत दूर हो गए..आज समझ आया हम को,जयदा प्यार से भी

 दम घुट जाता है..हंस दिए खुद के प्यार पे,कशिश प्यार की संभाले अपने घर चल दिए...

Thursday, 14 November 2019

दुनियां से बहुत बार सुना...दुनियां बस अब खत्म होने को है..मगर कहते है हम,जब तल्क़ इस दुनियां

मे प्रेम का महकता रंग कायम है,दुनियां तब तल्क़ सलामत है..हज़ारो फूल जब खिलते है इस गुल्सिता

मे,बेपनाह लोग मिलते है मुहब्बत से...जब तल्क़ कायम है यहाँ,शुद्ध प्रेम की परिभाषा..जब तल्क़ प्रेम

मे भरी है बलिदान की भावना..जब तल्क़ यह प्रेम खिले गा,दो पाक रूहों  के साए मे..जान भी जाए तेरे

लिए,प्रेम तब भी निःशब्द है...समझ लीजे...दुनियां का वज़ूद तब तल्क़ कायम है...

Wednesday, 13 November 2019

शुद्ध प्रेम की वो परिभाषा,जिस को तुम ने भी कह डाला..तुम जैसा कोई नहीं..कोई भी तो नहीं..बहुत

बार सुनते है तुम से,खुद पे नाज़ फिर भी नहीं करते...हम कौन है,यह तुम भी ना जाने..परिभाषा हमारी 

तुम भी पूरी नहीं कर पाए..जो धरा पे आया तेरी खातिर,पूजा के महीन धागों मे लिपटा मेरी रूह का हर

इक धागा..हा...मैं ही राधा.. मैं ही शिव की पुनीत छाया..इस से आगे ना मेरी कोई छाया,तू ना समझा

तो मुझ को अब क्या है इस जग से लेना-देना..पूजा बस इक धर्म है मेरा,युगो युगो तक तू ही है मेरा..
किस ने जाना किस ने देखा..कृष्णा का रहा कौन सा धाम..तुम चाहे घूमो गोकुल या जाओ वृंदाधाम..

प्रेम-प्यार का उन का राधा से नाता,है आज तक सूंदर पावन मधुर सा नाम..दुनिया मे शुद्ध-प्रेम का

मतलब किस ने जाना,यहाँ रहा हर कोई मुहब्बत मे डूबा छोटा सा नाम..जाते रहते हज़ारो कृष्ण के

धाम,पर क्या प्रेम वैसा कर पाए जैसा राधा-कृष्णा का प्रेम..प्रेम की मधुशाला गर जानी होती,इस जग

की राधा के शुद्ध-प्रेम को जाना होता तो सच मे हम भी कहते,सिर्फ तुम्ही हो कृष्ण,तुम्ही हो कृष्ण..
यू तो तेरे हर रूप से वाकिफ है..पत्थर दिल है तू,इस की भी जानकारी है मुझे...हर छोटी बात पे बच्चे

की तरह रूठ जाना,इस अदा को भी जाना है मैंने...तंगहाल रहना मगर गरूर से भरे रहना,यह मुनासिब

नहीं तेरे लिए..प्यार की हर रीत को जाना होता,तो कभी-कभी ख्याल हमारा भी किया होता..खुद्दार तो

हम भी बहुत है,इस बार पहले तुझे ही झुकाए गे..गलती हर बार तूने ही की है,पहल बात करने की हम

ही करते आए है...मगर अब तेरे ही रंग मे रंगे है ऐसे,गरूर हम भी ऐसा लाए है की झुको गे अब तुम 

ही पहले..हम तो तेरे कहने के मुताबिक ''आसमान से उतर कर आए है ''
                                    ''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ''

सरगोशियां--जहां लिखे प्यार,प्रेम के शब्द,आप को अपने से जुड़े लगे..
सरगोशियां--जहां दर्द की लिखी भाषा आप को अपनी सी लगे..
सरगोशियां--जब विरह और जुदाई के मायने आप को रुला दे..
सरगोशियां--जहां प्रेमी अपनी प्रेमिका की याद मे घायल हो और आप उस अहसास को महसूस कर पाए ..
सरगोशियां--जहां शुद्ध प्रेम की प्रतीक''राधा''का रूप,इन शब्दों मे दिख जाये..
सरगोशियां--जहां प्रेम दूर जाने लगे और साथी को दर्द के आंसू दे जाये और आप महसूस कर पाए...
और भी बहुत कुछ,जो आप ''सरगोशियां,प्रेम ग्रन्थ''मे पढ़ सके गे...........आप की अपनी  ''शायरा ''
शामे तो रोज़ ही आए गी,पर अफ़सोस तेरी किसी शाम मे तेरे साथ हम नहीं आए गे..मसरूफ़ियत हो

या साथ तेरे कोई और हो,मुझे इस से क्या फर्क पड़ता है...तेरी शाम हसीं हो ना हो,अब मुझे क्या लेना

देना है...हमारी हसरतो का ज़नाज़ा जब उठ ही गया तो तेरी हसरतो से मुझे अब क्या करना है...दावा

इतना जरूर करते है,कुदरत अपने नायाब तोहफे धरती पे जयदा नहीं उतारा करती..बदकिस्मती तुम्हारी

है कि कोई राधा जन्म दुबारा नहीं लिया करती..
खुद को ले कर जितना गरूर उस मे आता गया उतना ही दूर हम उस से होते गए...वक़्त और ज़िंदगी

बार-बार नियामतें दिया नहीं करती..इतना समझने के लिए किसी को,कुदरत भेजा नहीं करती..कोई

बार बार पुकारे तुझ को और आवाज़ तेरे कानो को सुनाई ही ना दे तो वो आवाज़ हमेशा के लिए ही ग़ुम

हो जाए गी...बहुत सहा पर अब और नहीं..तुम तुम मे रहो,मैं खुद मे जिउ...ज़िंदगी ने अब सब कुछ ही

बदल डाला और हम सच मे दूर हो गए...
इबादत तेरी करे या मुहब्बत की..बात तो इबादत का अर्थ समझने की है..इबादत तुझ मे गरूर भर दे,तू

खुद को कही का राजा समझे..ऐसी इज़ाज़त नहीं देती मेरी इबादत..इबादत का इक रूप यह भी तो है..

तोड़ कर किसी कांच को हम ने उस के हज़ारों टुकड़े किए..हर टुकड़े को जोड़ा हर धर्म से,हर मजहब से..

साथ सब को मिलाना भी तो एक इबादत है..प्रेम और इबादत,दोनों ही कितने पावन है..अब हम अपनी

सरगोशियों को प्रेम ग्रन्थ से जय्दा ''महान प्रेम-ग्रन्थ'' बनाए गे..जहा प्रेम,मुहब्बत और प्यार सब ढले

गे इक ग्रन्थ के नीचे,समझ जिस की जितनी होगी,ग्रन्थ प्रेम को उतना ही समझ पाए गे...
बैठे है खुले आसमाँ के नीचे,मगर क्यों है बेहद ख़ामोशी यहाँ...कलम कह रही है क्यों ना लिखे ख़ामोशी

की दास्तां यहाँ...आज है ख़ामोशी खामोश यहाँ और यह कलम लिखती जा रही है क्या क्या यहाँ...जब

तक हम भी खामोश थे,ज़माना बहुत कुछ कहता रहा..कलम तब ना थी हाथ मे,जब यही ज़माना क्या

क्या उलझनें पेश करता रहा...कलम बोली,उठा मुझे और छा जा इस जहान पे..जो तू उठ गई,उलझनें

ज़माने की बढ़ जाए गी...डर के अब तू नहीं,ज़माना तुझ से डर जाए गा..राज़ सब तालो से खुल कर

सामने आ जाए गा...

Tuesday, 12 November 2019

जिसे तुम ने खोया,वो तेरा साया था..साया क्या वो तो तेरा हमसाया था...आज है जहां हम,वहां सिर्फ

जरुरतमंदो का इक सकून भरा मेला है..यहाँ हम झुक रहे है उन के कदमो मे,कदर के साथ-साथ दुआओ

का भी मेला है...हम देते रहे जिन को दुआएं,बदले मे लेते रहे उन की परेशानियों की वजहे..आज का दौर

कुछ और है,हम ले रहे है दुआएं और ना जाने कितनो के बने है मसीहा...इक हमराज़,इक हमसाया..
खुश है बहुत बिन बात के,नूर अपने ही चेहरे का देख दीवाने है,बिन बात के...पांव रखते है कही,पड़ते

है कही..बिन बात के...खुद ही खुद मे मुस्कुरा रहे है,क्यों..शायद यू ही बिन बात के...ज़िंदगी से कभी

शिकायतें थी हमे,रो देते थे बेवजह बिन बात के...है तो आज भी वही खड़े,मगर अंदर की आवाज़ ने

हिला दिया हमे..क्यों उदास रहे,क्यों अश्क बहाते रहे..परवरदिगार ने इतना जो दिया है,उसी के लिए

आज शुक्रगुजार है..खुश है बस.........बिन बात के....
पराकाष्टा प्रेम की कितनी गहरी रही,यह तुम को मालूम ना था...दौलत ने बाँधी तेरी आँखों पे इतनी

गहरी पट्टी,रुतबे की कुर्सी पड़े गी तुम को जब इतनी महंगी तो याद जरूर हम आए गे...दुआ से भर

कर तेरा आंगन,लौट कर अब क्यों आए गे...जीवन की राह तुझे दिखा दी,वक़्त की धारा भी तुझ को

समझा दी...जब समझ ना पाए पराकाष्ठा प्रेम की गहरी तो जीवन और वक़्त की धारा कहाँ समझ

पाओ गे..
किस ने किस को खोया,चलता वक़्त बताए गा...किसी रोज़ हम खो जाए गे अपनी मासूम दुनियाँ मे,

जहाँ से लौट कर फिर ना आ पाए गे..किलकारी इक बहती धारा,नन्ही हंसी पे हम ने दिल हारा..माथे

का तिलक बन गया उन सब का सवेरा,जिस जिस ने जीवन का दुःख हम से बांटा..तुम पारियों की वो

रानी हो,धरती की महारानी हो..पाँव छू लिए हम ने नन्हे,अब कौन है रानी और कौन महारानी..यह तो

चलता वक़्त बताए गा...

Monday, 11 November 2019

सहज सरल रहे और सदा धरा पे ही पाँव धरे,सामने यह ज़माना तारीफ करता रहा...सर पे भी बिठाता

रहा..ज़न्नत से सीधा उतरे है,इतना मान तक देता रहा..पर है तो ज़माना,इंसानो की यह बस्ती है..

खुद से जब खुद का साथ दिया,अपने आप से प्यार किया..शोहरत की बुलंदियों को हल्का सा जो

छूने लगे तो हम को हमारी कमियों का एहसास अब दिलाया गया..जो कभी लफ्ज़ो पे हमारे कायल

थे,आज यू हम को सीधा धरा पे गिराया..ज़माना क्या जाने,माँ-बाबा की दुआएं हम को अब गिरा नहीं

सकती...जो पहली सांस से धरा पे था वो अपनी आखिरी सांस तक धरा पे ही होगा...
दर्द गुजर रहा है दर्द की इंतिहा से..और कमाल तो देखिए,दर्द ही निजात दे रहा है इस गहरे दर्द से..

 दिल के किसी कोने मे रख दिया संभाल के,अब कोई ना दे पाए गा इस दर्द को किसी नए नाम से...

मुस्कुरा दिए दर्द की इस कहानी पे,आज तुम ने मजबूर कर दिया हम को फिर से मुस्कुराने पे..क्यों

रोए कि ज़िंदगी हमेशा तो नहीं मिलती..नियामतें जब साथ है परवरदिगार की,तो क्यों ना महके

बिन वजह बिन बात के...
प्रेम के स्वर साथ- साथ है..खोने के डर से इन को ,कभी खौफ मन मे आया नहीं..आसमां से जो बरस

रही उस मालिक की दुआ,इन प्रेम के स्वरों को साँसे देती जाए गी...सब कुछ खो कर गर उस मालिक

का करम साथ है,तो यहाँ इंसानो का क्या काम है..प्रेम के बेशकीमती धागे जब जुड़ते है रूहों के स्वरों

से,तो खुद ही प्रेम आता है धरातल पे..अब प्रेम ही ना समझे गर प्रेम की भाषा,तो खोने का डर किस

को आता है..इसलिए तो कहते है,प्रेम के स्वर हमेशा साथ है..
चलना है गर दूर तक साथ मेरे,चेहरे से अपने झूठ का नकाब उतारना होगा..एक झूठ को छुपाने के लिए

एक और झूठ ना बोल,मेरी रूह की आवाज़ तुझे सुन सकती है..दूर जाना है गर मुझ से तो बेवजह के

बहाने ना बना..किसी जंजीर से नहीं बांधा तुम को,किसी वादे के तहत साथ जोड़ा भी नहीं तुम को...

प्रेम का कोई मोड़ नहीं होता..यह वो सहज सरल धारा है,जो नसीब से किसी पाक दिल और पाक रूह

मे बहा करती है..दौलत से नहीं,रुतबे से भी नहीं,यह धारा प्रेम की सिर्फ सच के धरातल पे खड़ी होती है..

Sunday, 10 November 2019

हमारे रूढ़िवाद समाज मे,प्रेम प्यार और मुहब्बत के शब्दों को हर कोई इतनी बेबाकी से नहीं लिख पाता..विडंबना की बात कि जहा राधा-कृष्णा,शिव-पार्वती के प्रेम की अलौकिक गाथाएं हम सदियों से पढ़ रहे है पर उन का वास्तविक स्वरूप कौन समझ पाया..हमारा समाज आज भी प्यार को,प्रेम को गलत और गन्दी नज़र से देखता है..प्यार प्रेम,बहुत पवित्र  शब्द है,अगर लोगो की सोच सही हो..वासना प्यार नहीं..हवस को जो प्यार कहने लगे वो प्यार नहीं..प्यार,प्रेम...एक शुद्ध प्रेम का वो रूप,जिस मे प्रेमिका पूरी शिद्दत से अपने प्रेमी को समर्पित होती है..प्रेम का वो स्वरूप जहा प्रेमी भी कृष्ण के रूप मे उस के समर्पण को स्वीकार करता है...प्रेम,प्यार का यह रूप विरले है,तभी तो समाज प्यार को समझ नहीं पाता..''मेरी सरगोशियां,प्रेम ग्रन्थ''शुद्ध प्रेम की वो गाथा पेश करती है,जो आज भी है,बेशक विरले ही सही...प्रेम के वास्तविक रूप को जानिए और इस शब्द को सम्मान दीजिये......आप की शायरा

मुहब्बत को ना समझा तुम ने तो शुद्ध प्रेम को कहाँ समझ पाओ गे...रूह के धागों को ही नकार दिया

तो पूजा के धागों का मतलब ही कहाँ समझ पाओ गे...भगवान् की कृति को जब सम्मान ना दे पाए

तो तेरी बड़ी-बड़ी बातो का कोई वज़ूद नहीं मेरे लिए..प्रेम जब आधार है इस जीवन का,इस को ही ना

जान पाए तो दुनियाँ मे दौलत-रुतबा कितना भी कमा लो,हम को अब दुबारा उस रूप मे ना पाओ गे..

हम तो हम है,शुद्ध प्रेम की वो रचना,जिस को समझने के लिए तुम्हारे पास वक़्त ही नहीं...

चल इस मुहब्बत को इबादत का रूप दे कर जुदा हो जाए...तू मसरूफ रह अपनी ज़िंदगी मे,हम खुद

मे लौट जाए..फिर से वही अजनबीपन हो और खुद की ज़िंदगी के रेले हो..मुहब्बत तुझे रास ना आई

मेरी,कभी लहज़ा तेरा बेरुखी का तो कभी प्यार का..प्यार कोई किताब नहीं,जिसे सिर्फ फुर्सत मे ही

पढ़ा जाए..प्यार को वक़्त ना दिया तो वो सूख जाता है,किसी बेजान परिंदे की तरह..चल आज से तू

तू है मैं मैं हू..बस ख़ुशी ख़ुशी जुदा हो जाए..
कल कब कहाँ जन्म ले गे,पता नहीं..इन साँसों को जिए गे कब तक,पता नहीं..किस किस को छोड़ जाए

गे,यह भी पता नहीं...मंजूरे-खुदा को क्या होगा,यह राज़ भी मुझे पता नहीं..पता है तो सिर्फ इतना कि

जो सोचा है वो करना है..पता तो यह भी है,जिन राहो पे चलना है वो भरी है सिर्फ कांटो से..खुद के

कदमो को गर्म रेत की तपिश मे तपाया है इतना,खुद तो चले गे काँटों पे मगर जो साथ चले गे मेरे,

उन को इस तपिश से बरी करवाते जाए गे...खुद मे जो ताकत है,उस से उन सभी के हौसले बुलंद

करते जाए गे...
मुहब्बत की रस्मे बेशक ना निभा,बस करीब मेरे आता जा..इतने करीब,इतने करीब कि हवा को भी

आने की इजाजत लेनी पड़े..कुछ सपने जो अधूरे है तेरे,कुछ सपने जो मेरे भी है अधूरे...मिल के साथ

चल मेरे,अंजाम इन को देने के लिए...फर्क तुझ मे और मुझ मे सिर्फ है इतना,तू सपनो को मुकम्मल

करते हुए डरता है और हम है इतने बेखौफ कि इन सपनो को खुली आँखों से जिया करते है..कौन है

यह लोग,जिन से डरना है..रास्ते तो खुद हम को बनाने है,इन लोगो से क्या लेना है..
गौर करे तेरी बातो पे या ज़िंदगी की भूलभुलैया मे ग़ुम हो जाए..कब चाहा था दुनियां के मेले मे चलना,

बस यू ही मशहूर हो गए..पलट कर जो देखे तो दाग़ ज़िंदगी के याद आ जाते है..मसरूफ हो जाए और

इन झमेलों से परे हो जाए,बस इतना ही तो चाहा था..मेहरबान रहा वक़्त हम पे और साथ परवरदिगार

का मिल पाया..कहां से कहां आ गए और जज्बातों ने शोर मचा दिया..अब आलम है यह,देखते है ना

वक़्त..ना दिन ना रात..रचे है मेले मे बस...

Saturday, 9 November 2019

रंग-रूप से गहरा सावन जैसा हू,दुनियाँ की परख मे काला हू..जिधर से गुजरु,यह जहाँ मुझ पे हँसता

है...ख्वाब अधूरे अब रह जाए गे सारे,कितने काम रुके है जो पीछे रह जाए गे सारे..कैसे अस्तित्व बनाऊ

अपना..तुम भी जाओ अपनी दुनियाँ मे,छोड़ मुझे अकेला..बात सुनी तो हम रुक ना पाए..''काले बदरा

काले नैना..सावन का बादल भी काला..बरसे गरज़ के जब यह काले बादल,पानी बरसाए साफ़ मोती के

जैसा..दुनियाँ रहती सफेदपोश पर दिल देखो तो सब का काला..तुम हो सब से न्यारे-न्यारे,रूप से क्या है

लेना-देना,दिल तेरा तो सोना-सोना ''

Friday, 8 November 2019

बहुत ही मामूली इंसान है हम..दौलत की चकाचौंध से दूर धरा पे झुके इंसान है हम..ग़ुरबत ने सिखाया

दुनियाँ मे चलना,इसी दुनियाँ के तानों ने यह भी सिखाया,खुद के असूलों पे चलना..टूट के टूटे इतना कि

जान गए वज़ूद अपना..धरा पे झुकना फिर भी नहीं छोड़ा,संस्कारो का वो कर्ज आज भी हम पे भारी है..

दिल की आवाज़ आज भी सुन कर,कदम अपने आगे रखते है..कोई क्या कहता है,इस से बेखबर हर पल

अपना जीते है...
आज जो दुआ मालिक ने सुनी,खुद पे यकीं और करने लगे..खुद से जयदा अपने प्रेम पे यकीं करने लगे..

यह नन्ही सी दुआ जो मांगी हम ने,पलक झपकते खुदा ने की पूरी..इत्मीनान और सकून दोनों इक साथ

मिले..जादू उस की आवाज़ का और ख़ुशी से पागल होना हमारा बदहवास सा,दिल की यह धड़कन क्यों

धक्-धक् से बहकती है..आज तो जैसे यह शाम भी महकती है..लगता है आज तो खुदा से जो भी मांग

लेते,सब मिल जाता..मगर भरे है सब्र है,जानते है,बिन मेहनत कुछ नहीं मिलता...
दिन जैसे ही ढलने लगा,मेरी दुआओं का असर चलने लगा..आंख से निकला एक बून्द आंसू और उसी

इक बून्द मे मेरा संसार सजने लगा..सिर्फ बून्द नहीं यह तो प्यार के इंतिहा की आवाज़ है,जो तुम ने

सुनी और मैंने भी सुनी..अंधेरे सारे छंटने को है..जिस रूप मे तुम्हे देखा,वो रूप बस सच होने को है...

जीवन कब किस मोड़ पे करवट ले,आगाज़ मुझे-तुझे नहीं..कुदरत किस पल क्या कर देती है,अंजाम

किसी को भी पता नहीं...

Wednesday, 6 November 2019

मिलावट कैसे कर पाते तेरे प्यार मे,जब इस मिलावटी दुनियाँ से ही बाहर निकल आए है..कण-कण मे

भर के इस प्यार को,तभी तो पास तेरे आ पाए है..दर्द की वो लहर,आँखों मे बरसती अधूरे सपनों की वो

अजनबी सी इक खबर..पढ़ कौन सकता,जब खुद से ही दूर रहे इतना..अनंत काल के इस शुद्ध-प्रेम का

मतलब यह दुनियाँ कहाँ समझ पाती है..जो खुद इतनी अशुद्ध है कि हर रोज़ किसी ना किसी पे ऊँगली

उठा देती है..शुद्ध प्रेम-गाथा का मतलब बताने ही,इस मिलावटी दुनियाँ से बाहर निकल आए है..
खूबसूरत है यह शाम,जितनी सोची थी उस से भी जय्दा खूबसूरत है यह शाम..ख़ामोशी बेशक है आज

इस मे बहुत गहरी,पर एहसास दिला रही है कि गुफ्तगू है बहुत गहरी..गहराई मे डूबी है दो जान,साथ

साथ रहने को बैचैन..कुदरत के करिश्मे का है इंतज़ार,प्यार के सैलाब से महका है इन का संसार..रात

धीरे-धीरे सजने को है तैयार,किस ने किस को अपने रंग मे ढाला..इस का फैसला सिर्फ कुदरत करे गी

आज...
कदम बहुत थके है तेरे,अब लौट आ..ज़िंदगी के उजाले बुला रहे है तुझे,अब लौट आ..गर्दिश मे सितारें

तेरे थे कभी,अब जो होना है वो करे गा नामुमकिन को भी मुमकिन..यकीं कर मेरी बातो का,अँधेरे के

बाद कभी-कभी सुनहरी सुबह भी आती है..जो तेरे नाम को रौशन कर दे,ऐसी सुबह बस आने को है..

डगमगाए गे ना कदम अब तेरे,जो चाहा था तूने वो बस होने को है..कदम अब बहुत थक गए है तेरे,

लौट आ...अब लौट आ...

Tuesday, 5 November 2019

दिल की धड़कनो को संभाल,इन की तुझे अभी बहुत जरुरत है.. साथ-साथ मेरे चल कि तुझ को मेरी

भी अभी बहुत जरुरत है..लाखो नज़रें साज़िश के तहत है तेरे..तू बेशक हो अनजान इन से,तुझ से कही

जय्दा दुनियां देखी है मैंने...मसरूफ रह दुनियादारी के तहखाने मे,मुकाम अपना हासिल करने के लिए..

हम है ना तेरी हिफाजत और दुआ करने के लिए..
यू तो हर चलती सांस के साथ,तेरी ख़ुशी मांगी है..तुम जहां भी रहो,नियामतें तमाम तुम्हारे लिए बस

मांगी है..हाथ की लकीरें तेरी क्या कहती है,इस से परे तेरी ज़िंदगी कितनी बदले गी,लकीरों की तेरी

दुनियां मुझ को बदलनी आती है..गर यकीं ना हो तो खुद ही देखते जाना..वक़्त मिले तो खुद ही हम

को बता देना..यह प्यार का राज़ है यारा,जो जीवन तो क्या-हाथ की लकीरों को भी बदल देता है...

Monday, 4 November 2019

प्यार मे भीगे दो शब्द क्या कहे आप ने,हम तो जैसे महक महक गए..इस से जयदा क्या चाहे आप से,

हम तो इन दो शब्दों मे ही खो गए..प्यार ही पूजा,प्यार के सिवा कोई और ना दूजा..मेहरबां मेरे,यू ही

रहना संग मेरे..प्यार मे डूबे डूबे..ज़िंदगी दे गी अब साँसों को कितनी मोहलत..अब हर सांस मे रहना

आप यू ही बहके बहके संग मेरे..प्यार की भाषा है इतनी मीठी,जिस का कोई नहीं है छोर..आप तो

आप है,कोई नहीं आप के जैसा कोई और...
टुकर-टुकर देखते रहे आसमां की तरफ,क्या हम इस को छू सकते है..खुद को परखा,खुद को जाना..

तैयार किया खुद को उड़ जाने के लिए..बाबा की हर हिदायत-माँ की हर सीख,साथ आज भी रखते है..

ज़माना राहें ना रोके हमारी,खौफ बिना खुद मे जीते है..कदम बेशक धीमे ही चले,मगर आसमां तो अब

हमारा है..झुकना थोड़ा सा उस को भी होगा,पंखो का साथ हम को ना लेना है..
शुद्ध प्रेम का नाता सूरत से कब होता है..सूरत अच्छी हो या बुरी,प्रेम सूरत से नहीं होता है...प्रेम तो वो

हस्ती है,जब होता है..होने के बहुत बाद सूरत को देखा करता है...रूह का सूंदर होना,मन का बेहद सूंदर

होना..सिर्फ यह दो हो तो प्रेम बहुत खूबसूरत हो जाता है..फिर यह नाता इक जन्म नहीं,अनंत काल तक

होता है..रूप बदल यह प्रेम,हर जन्म अलग रंग मे ढलता है..रूह को जब पहचाने रूह,इक दूजे मे बस

जाए रूह..इक है घायल तो दूजा भी घायल,प्रेम है ऐसा पावन पावन..

Sunday, 3 November 2019

''सरगोशियां,प्रेम ग्रन्थ''..जिस मे लिखे जाने वाला हर शब्द एक शायरा / एक कलाकार /एक लेखिका
की मेहनत का निचोड़ है..अफ़सोस की बात है कि कुछ ग़लत मानसिकता वाले लोग इन शब्दों को या तो अपनी ज़िंदगी से जोड़ते है या फिर मेरी..एक सज़्ज़न लिखते है कि'' आप बहुत दुखी है क्या''..आप के शब्दों मे दर्द क्यों है ? क्या कहू इन जैसो से..क्यों कि इन शब्दों को लिखने वाली इक महिला है..क्या उस को यह समाज लेखिका /शायरा /कलाकार बनने से रोकना चाहता है ? गलत सोच के लोगो से दुःख होता है.पूछती हू इन जैसे तमाम इंसानो से कि अगर इन शब्दों को कोई पुरुष लिखता है तो क्या उस को भी आप की गन्दी सोच यही कहे गी ???? निवेदन करती हू आप जैसी सोच वालो से,जब किसी कला को आप समझ ही नहीं पा रहे तो मेरी मित्र-सूची से खुद ही बाहर हो जाए...एक महिला को उस के शिखर तक पहुंचने मे कोई मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उस के रास्ते का रोड़ा मत बने..पढ़ाई-लिखाई क्या आप जैसो को यह सिखाती है ???????? किसी के भी कहने से,मेरी कलम लिखना नहीं छोड़ सकती..अपनी सोच को विकसित करे,किसी के निजी जीवन मे ना झांके..शायद इतना काफी है,आप जैसो को समझाने के लिए......'''''''शायरा...सरगोशियां..इक  प्रेम ग्रन्थ.''''''''''''

ना जाओ दूर इतना मुझ से कि तुम हमी से वक़्त लेने को तरस जाओ...मसरूफ हम जो हुए अपने

जीवन मे तो तुम सिर्फ ढूंढ़ते हम को रह जाओ गे..यह भी इक बलिदान है हमारी मुहब्बत के लिए..

जो इतनी गहरे प्रेम की कदर ना कर पाया,वो जीवन मे किस बात की कदर कर पाए गा..सारी दुनियाँ

मे हम जैसे कोई मिल जाए तो सोच लेना,कि राधा एक नहीं दो भी हो सकती है..इसी यकीं को जब

दिलो दो गे मुझे,तो हम तो ख़ुशी-ख़ुशी तेरे जीवन से निकल जाए गे...
नज़रअंदाज़ हम को इतना करना..बेवजह हमी से दूर-दूर रहना..खता क्या है हमारी,समझ नहीं पा रहे..

तेरे प्यार की वो शोखी,ढूंढ़ते है तुझ मे आज भी..सहज सरल है आज भी उतना,मिले थे जब तुझे उतना...

वादा करते है,तेरी राहों मे तुझे बदनाम करने कभी ना आए गे..चाहने से गर सब मिल जाता तो हम तुझ

से अपनी खता ही पूछ लेते..प्यार का इक नाम त्याग-बलिदान भी है..तेरी खुशियों के लिए,हम खुद ही

धीरे-धीरे तुम से दूर हो जाए गे..
प्रेम की इस इंतिहा को तुम कितना समझे,पता नहीं..गर हमारी इतनी मुहब्बत के बाद भी,तुम हमारे

ना हो सके तो किसी और के क्या हो पाओ गे..अरसे बाद शायद तुम समझ पाओ गे इस मुहब्बत की

कीमत..तब तक हम त्याग की मूरत बन,अपनी ही दुनियाँ मे ग़ुम हो जाए गे..नाम तेरे को साथ लिए

जीवन का यह सफ़र निभा जाए गे..अफ़सोस,यह दिन तब लौट कर ना आए गे..
सुबह की इस खूबसूरती पे दिल से फ़िदा हो गए है..हल्की हल्की सर्द हवा मे जैसे खो गए है..कुछ

माँगा खुदा से और खुदा को ही समर्पित हो गए है..नमाज़ की रस्म अदा करे या मंदिर मे फूल अर्पित

करे..जब दुनियाँ चलती है एक ही नाम से तो अलग अलग सजदा क्यों करे..प्यार बिखरा है जब चारो

तरफ तो कैसे ना कहे,मालिक मेरे--आप का शुक्रिया..शुक्रिया..
शामे-ग़ज़ल लिखे आप पे या आप के रुखसार से नज़रे हटा ले..दुआ मे हर पल रखे आप को या दुआ ही

बन जाए आप के लिए..दुनियाँ क्या कहती है आप के लिए,क्या लेना-देना है मुझ को उस से..समझदारी

से आप को समझाए या मासूमियत से आप को पागल कर दे...दीवाना करने की वजह बने या खुद को

आप मे ही शामिल कर ले..क्या करे आप का..जलते दिए की लौ बने या दीपक बन आप को राह दिखाते

जाए...
दर्द आज भी तेरी बेरुखी का दिल को हिला देता है..कभी जो दो पल तू गुफ्तगू कर ले मुझ से,यह

दिल जैसे फिर खिल जाता है...छोटी सी यह ज़िंदगी और साथ है हज़ारो गम,दो पल जो मुझे दो

गे ज़िंदगी के अपने..यक़ीनन खुश हो जाए गे हम..साँसे रुक जाए,इस से पहले तुझी को तुझ से

मांग सकते है हम..डरो मत,प्यार कभी कुछ माँगा नहीं करता..प्यार जो देना जानता है सिर्फ,वो

अपने प्यार से भला क्या मांग सकता है..
समर्पण और हवस का खेला..फर्क इन का किस ने देखा..जिसे माना दिल का मीत,समर्पण बना इबादत

का रूप..पाक बनाया जब दोनों ने इस को,समर्पण बन गया पूजा का फूल..तू मेरा मैं भी तेरी,महीन सा

धागा बना इक प्रीत...''हवस,नाम है देह का इक खेल''..आज साथ है तेरा तो कल कोई और होगा मेरा

नया मीत..बंधन का वादा देते,हवस साथ मे बांधे रखते..पल का रिश्ता पल मे टूटा..''समर्पण इबादत

सदियों का नाता,तू ही साथी तू ही वादा''...

Saturday, 2 November 2019

कभी राधा कभी मीरा तो कभी पार्वती का रूप धर...यह प्रेम-गाथाएं जग को प्रेम सिखाती रही..राधा

जिस ने कृष्णा को कभी पाया ही नहीं,मीरा जिस के विष मे भी प्यार इक अमृत था...शिव को आराध्य

मान पार्वती उन से जुडी रही..प्रेम का यह अलौकिक रूप जितना जग मे होगा,प्यार का रूप उतना ही

सुंदर होगा..रिश्ते का मोहताज़ कहां है प्रेम..दौलत मे नहीं है प्रेम..तोहफों से बहुत दूर है यह प्रेम..भरोसा

विश्वास के धर्म से बंधा है यह प्रेम..राधा-कृष्ण के प्रेम को जाना तभी तो प्रेम को प्रेम माना.....
''खुद ही खुद की कदर का एहसास बार-बार दिलाना...कभी आप ने हम को प्यार से पुकारा था,कभी

हम को आप ने अपनी ज़िंदगी मे शामिल भी किया था..''  किसी से प्यार छीना नहीं जाता,किसी को

अपना जबरदस्ती बनाया भी नहीं जाता..इस प्रेम की लौ जब खुद से जले तो ही दो दिलो को रौशन

करती है..''प्यार जिस्मों का मेल नहीं शायद,प्यार दौलत का खेल नहीं शायद..प्यार तो सिर्फ प्यार

है,जो रूह को रूह से जोड़े..प्यार की इंतिहा ऐसी ही है''....


कभी टूट के चाहना तो कभी दिल ही तोड़ देना..कभी बेइंतिहा रुला देना तो कभी प्यार से सकून की नींद

सुला देना..पलकों को भीगने पे मजबूर कर देना,इतना भिगो देना कि बरसात का असर भी फीका

पड़ना..क्या प्यार ऐसा भी होता है..''प्यार को प्यार मे रंगो इतना,कि मिसाल इस से जयदा प्यार की

कोई दे ना सके..पूजा के धागों मे जो बंध जाए इतना कि प्यार को कोई नाम,कोई रिश्ता देना की जरुरत

 ना हो..गर प्यार को हर कोई समझ पाता,जान पाता तो प्यार इक दास्तां बन कर ना रह जाता''



जो भी किया रूह के कहने से किया...रूह की इज़ाज़त के बिना कुछ ना किया..राह की तलाश मे कितना

भटके,रूह का साथ तब भी रहा..जब भी उदास हुए,जब भी आंसू बहने लगे..ज़िंदगी से जब कभी बेज़ार

हुए,आवाज़ तब भी रूह की सुनते रहे..कमज़ोर ना पड़ना कभी किसी के आगे,मजबूती से चलना आगे..

यह आदेश जब खुद रूह ने दिया,आंसू सूख गए..मुस्कुराने के लिए लब जो हिले,हम तो बस अपनी रूह 

के साथ हुए..
बात इतनी सी है मगर समझ-समझ की है..प्रेम जो पाक-साफ़ रहे गा तेरा-मेरा,तभी साथ इक दूजे के

रहे गे..ज़िंदगी मे गर तेरे या फिर मेरे.. किसी और की दस्तक भी हुई,तो दूर हमेशा के लिए हो जाए गे..

बेवफाई का दर्द क्यों सहना है,मुहब्बत को ही खतम कर जाए गे..ज़िंदगी का नाम है''जीना है इसे या

नहीं जीना है''प्यार इतना भी नहीं इस जीवन से..तेरे साथ मे गर वफ़ा नहीं,तो जीना भी क्या जीना है..

Friday, 1 November 2019

तुझ को चुने या अपने आत्म-सम्मान को चुने..तुम को जब हमारी कदर ही नहीं,तो क्यों ना अपने

आत्म-सम्मान के साथ चले..दौलत-रुतबा शौक नहीं हमारा..जग हमारे बारे मे सब जाने,यह अधिकार

किसी को नहीं दिया हम ने..ख़ामोशी से सब को जीना सिखाया,रोने वालो को हंसना भी सिखाया..दर्द

अपने को भूल कर तुम को भी,दर्द से निकलना सिखाया..बेवफाई कर के तुम ने आज,मेरा मन बहुत

दुखाया..देह का मैला होना और रूह को भी मैला करना..इन दोनों का फर्क अब खुद ही जान लेना...
ना कर इतना गुमान अपनी सूरत पे..तेरी इस सूरत को तो हम ने कभी देखा ही नहीं..ना इतरा देह पे

अपनी कि इस देह से कोई नाता रखा ही नहीं..प्रेम ना कभी सूरत से ना कभी देह से होता है..वो तो बस

रूह से होता है..तेरी बेवफाई ने आज यह साबित कर दिया कि मुहब्बत,प्यार और प्रेम के फर्क से  तू

कभी वाकिफ हुआ ही नहीं..शायद तुम ही अब काबिल नहीं हमारे शुद्ध प्रेम के..रूह के नाते से तुम कभी

जुड़े ही नहीं..रूह अपनी को मैली ना करना कि तेरी इबादत फिर ना करे सके गे कभी...
गुफ्तगू का अंदाज़ बदला तो हम को उन की बेरुखी समझ आई..वक़्त नहीं है अब हमारे लिए,यह बात

ठीक से अब समझ आई..दबे थे जब काम के बोझ से तो पास हमारे आने की जरुरत क्या थी..कोई और

आया है गर ज़िंदगी मे आप के तो क्या हुआ..अब टूटे गे नहीं बेहद ख़ामोशी से आप की ज़िंदगी से

निकल जाए गे..वो प्यार ही क्या जो तेरी बेरुखी पे दम तोड़ दे..किसी और को बेशक चाहो,याद रहे

प्यार की हमारी यह इबादत कोई और नहीं करे गा,आप के लिए..आप को आज़ाद करते है,नई

मुहब्बत के लिए..
राह मे रुकी कोई इमारत नहीं है हम...खामोश रहते है बहुत,मतलब इस का यह तो नहीं..जुबान-बंद

है हम..यह लब खुलते है सिर्फ दुआ बन कर..आँखों का यह आशियाना उठता है तुझे पनाह देने के लिए..

खुद को देख मेरी नज़रो से जरा,पलकों पे बिठाया है तेरी हर ख्वाईश को सुनहरे सपने की तरह..दिल

की धड़कन बेशक रूकती है तो रुक जाए,तेरे रुखसार पे कोई ऊँगली क्यों उठाए...मखमली पिटारे मे

रखते है तुझे संभाल के,नज़र किसी की ना लगे..काला टीका लगा देते है बचा के सब से..
प्यार पे जितना भी लिखा..इन्ही पन्नो को सौंप दिया..प्रेम-ग्रन्थ बना कर इस को दुनियां वालो के

हाथों मे दिया..यह दुनियां जो वाकिफ नहीं इस प्यार की सच्चाई से..दुनियां जो जानती है इस प्यार

को,लेने-देने की इक परछाई सी..पाने की जो सोचो गे तो प्यार की भाषा कैसे समझो गे..समर्पण को

खुदा मानो गे, तभी काजल की तरह प्यार को आँखों मे बसा पाओ गे..हम ने जितनी बार इन पन्नो को

छुआ,हर बार...बार-बार इस प्यार की खुशबू को महसूस किया...
रूप इबादत के कितने देखे..तुझे कभी देखा नहीं,फिर भी प्रेम की डोर तुम से बाँधी..इबादत है ऐसी..

मिले गे शायद कभी नहीं,पर खवाब तेरे देखे..यह भी इबादत है ऐसी...कुछ माँगा नहीं तुम से,फिर

भी सब पाया मैंने..इबादत है ऐसी..बेरुखी को सहते गए,मगर प्यार फिर भी तुम्ही से हुआ..इबादत की

हद है ऐसी..गुफ्तगू तू भले कभी ना करे,मगर बात तो खुद से करते है तेरी..देख ना,मेरी इबादत तेरे

लिए,है कैसी...

ख़ामोशी आप की कभी तो कुछ बोले गी..सदियों जो इंतज़ार किया आप का,वो दुआ कभी तो कुछ खोले

गी..मेहरबान जो रहा खुदा हम पे,मुहब्बत रंग लाए गी हमारी..जो ढली इबादत मे,जो शिरकत हुई आप

की खुशियों मे..नमाज़ खुदा की हम पढ़ते है,मस्जिद मे भी हम झुकते है..मंदिर की चौखट पे सर झुका

अपना,आप के लिए हज़ारो मन्नतें मांगते है..एहसान कोई नहीं करते आप पे,सिर्फ अपनी मुहब्बत को

दुआ देते है..रूह को किया जब हवाले आप के तो खुदा के बाद,खुदा भी तो आप को ही कहते है..
प्रेम और चाहत..चाहत और प्रेम..इन दोनों को जब धयान से जांचा,फर्क दोनों मे नज़र आया..''देह का

जहा मोल नहीं,मिलना भी जहा कोई खेल नहीं..साथी को पूजा इतना..बेशक मिलन लिखा नहीं,प्रेम का

रूप तो ज़िंदा है..खुश रह अपनी दुनियां मे..प्रेम हमारा तो तब तक है,जब तक दुनियां कायम है''..बात

करे जो चाहत की ''चाहत का रूप दूजा है..तुझ को चाहा,मगर तुझे पा लेना अब मकसद है मेरा..क्यों कि

तू है सिर्फ अब मेरा''...प्रेम की भाषा इतनी प्यारी,हवा मे घुलती जान हमारी..रूह से तू मेरा मैं हू रूह

तेरी..सदियों चले गी तेरी-मेरी गाथा ऐसी..

Thursday, 31 October 2019

प्रेम के महीन नाज़ुक धागों को जब पिरोया बेहद शिद्दत से,बरसो बाद बना वो धागा रूह के पवित्र

बंधन मे..पूजा की थाली मे रखा फूल समझ क़र जो हम ने,कुदरत का आदेश हुआ लिख अब प्रेम

को,पूरी शिद्दत से..बरसो लिखना,सदियों लिखना...अनंत प्रेम की अनंत यह गाथा..शायद कभी कोई

तो होगा,जो समझे गा इस प्रेम की पावन गाथा..कलयुग हो,बेशक हो..प्रेम की गाथा पढ़ते पढ़ते शायद

जग समझे इस की महिमा..प्रेम से ही लौटाए गे इसी जग को,इसी प्रेम की सूंदर प्यारी भाषा..
बेहद सरल मीठी बोली के मालिक रहे बरसो तक...लोग फायदा उठाते रहे बरसो तक..हर बात पे खुद

को दोषी समझ लेना..हर छोटी बात पे सुबक सुबक रो देना..तन्हाई मे भी खुद ही को दोषी ठहरा देना..

बरसो बाद यह ख्याल आया,क्यों ना थोड़ा सा खुद को खारा कर ले,समंदर के पानी की तरह...जब ठान

लिया तो बस ठान लिया..आज यह आलम है,घोल लिया थोड़ा सा समंदर खुद के मीठे पानी मे..जीने के

लिए जितना काफी है..अब तन्हा होते नहीं,बस शोख अदा से चलते है मीठे-खारे पानी को संग-साथ लिए..

Wednesday, 30 October 2019

प्यार की भूलभलैया मे गुम होंगे मगर खफा तो फिर भी है..जितनी ख़ताये की है तुम ने,सजा के

हक़दार तो फिर भी हो..सहज सरल होना कुदरत का तोहफा है,आत्म-सम्मान से जीना अलग कहानी

है..आसमां से तारे ले आओ,इस को वाज़िब नहीं मानते..तोहफों से लाद दो हम को यह भी नहीं कहते..

प्यार की इबादत मे रंग जाओ हमारी तरह..यू ही हम राधा-कृष्णा की गाथा नहीं लिखते..
दोस्तों...  ''सरगोशियां..इक प्रेम ग्रन्थ'' मे यह शायरा,लेखिका आप सब का तहे-दिल से स्वागत करती है..''मेरी सरगोशियां''इस प्रेम ग्रन्थ मे लिखे जाने वाले हर शब्द को आप सभी ने जो प्यार और अपनापन दिया है / दे रहे है..यह शायरा आप सभी को हाथ जोड़ कर शुक्रिया कहती है...साथ मे यह गुजारिश भी करती है कि मेरे लिखे शब्दों मे कभी आप को कोई कमी नज़र आए तो भी बताना ना भूलिए गा..दोस्त भी तो हू आप सब की.. मेरा हर लफ्ज़ आप के दिलो मे सीधे से उतर जाए,मेरी पूरी कोशिश रहती है..प्रेम,प्यार और मुहब्बत के करोड़ो रंगो से सजी मेरी यह ''सरगोशियां'' आप को रोज़ हर रोज़ इस के नए नए रूप से परिचित करवाती रहे गी..और आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार भी करे गी ''''''' मेरी सरगोशियां''''आप की अपनी शायरा..
बेशक सितारों के झुरमुट मे चाँद नहीं है आज..मगर सितारों का मेला क़ाबिले-तारीफ है..दूर तक

नज़र जहाँ भी रूकती है,सितारों की महफ़िल ही दिखती है..गौर से कभी देखा नहीं इन को,चाँद को

घिरा देखा बस इन्ही की आगोश मे..खूबसूरती पे इन्ही की हम फ़िदा हो गए..चाँद की इंतज़ार करना

ही भूल गए..झुरमुट के किनारे-किनारे हम दूर तक इन्ही को देखते चले गए...
''तुम जैसा कोई नहीं''कहने वाले अक्सर मुहब्बत मे..हमारा खास दिन भूल जाया करते है..खास तारीख

को खास मुकाम कहने वाले,अक्सर तारीख भूल जाया करते है..जो पाक नहीं  वो मुहब्बत खास हो भी

कैसे सकती है..जब दिल की चाह है दौलत रुतबा पाना, तो मुहब्बत की तारीख याद कहां रह सकती है..

एक खड़ा है मुहब्बत के उसी मोड़ पर तो दूजा दौलत शोहरत पाने की होड़ मे ग़ुम है..कौन सा दिन और

कौन सी तारीख..उन को हमारे सिवा और भी हज़ारो काम है..
प्रेम की इंतिहा जहां भी होती है..समर्पण को साथ ले कर चलती है..समर्पण जो इबादत है,समर्पण जो

इक सजदा है..समर्पण इक काजल है,पर समर्पण कलंक नहीं है..काजल जो प्रेम की नज़र उतारता है..

कलंक है वहां जहां इश्क इक सौदा है..जो समर्पण को मांग अपनी मे भरे...जिस के लिए साथी उस का

कृष्ण रहे..मगर ऐसा होता नहीं..जब साथ-साथ दोनों साथ चले,समर्पण को दोनों इबादत मान चले..

वो प्यार ही पाक है..मुहब्बत जहां बस्ती है,मीठी गुफ्तगू के तले...
प्यार का मतलब समझने के लिए,जरुरी है प्यार को पहले समझा तो जाए...प्यार कोई बेजान किताब

नहीं,जिस को सिर्फ फुर्सत मे पढ़ा जाए..जब सारे काम खतम हो जाए,तब वक़्त मिलने पर साथी को

वक़्त दिया जाए..''बेहद प्यार है आप से''यह कह कर उस को बहला दिया जाए..साथी को तवज्जो ना

देना,सिर्फ यह सोच कर...अब तो यह मेरा है..ख्याल ख्याल का फर्क है,हम अपना वक़्त काट कर आप

को वक़्त देते रहे और आप...सब निबटा कर हम को वक़्त देते रहे...

Tuesday, 29 October 2019

खुद को खुद से प्यार करने का वादा किया और सब कुछ भूल गए...खुद ही राधा है अब और कृष्णा भी

खुद ही बन गए..पूजा के धागों मे आज भगवान् को पूर्णतया समर्पित हो गए..इस शक्ति को रूह से

सदा ही माना मगर आज.. अपने बदले रूप से खुद से इन को सब कुछ कह डाला..जो ख़ुशी हासिल की

हम ने आज,रूह की गहराई से अपने भगवान् को बता डाला..खुद से प्यार कर के आज जाना हम ने,

किसी के प्यार की जरुरत नहीं हम को..समय और कदर खुद को दे कर,खुद को अपना प्रेम बनाए गे..
दर्द की बेहद इंतिहा से गुजरे है हम..क्या कहे वो इंतिहा थी या दिल के टूटे टुकड़ो की आवाज़..धीमे

धीमे जले या एक बार ही खुद को जला दे..रौशन था जहां जब जलते दीपक की लो मे, तो हम ने

बेहद ख़ामोशी से दर्द अपना जला दिया..सकूँ पाया इतना कि वज़ूद खुद का बदल डाला..जब बेकदरी

ही पानी है तो खुद को ही क्यों ना सलाम करे..बदलने के लिए तो इक लम्हा ही काफी है..जहां जज्बातों

को बार-बार हर बार रौंदा जाए तो सोचा क्यों ना अब खुद को ही बदल दिया जाए.....
हमारी हर बात को हवा मे उड़ा देना..खास पूजा को भी तवज्जो ना देना..रिश्ते को बेशक कोई नाम ना

दो,मगर पूजा का मान तो रखा होता..पूछने पे हमारे बात घुमा देना और प्यार का झूठा दावा करना..

समझते है सब कुछ मगर धीमे-धीमे खुद को बहुत पीछे ले जाना..मुहब्बत या तो होती है या फिर नहीं

होती है..इस के बीच दरमियाँ ना कुछ होता है,ना कुछ मिलता है..तन्हा रहना बहुत आसान है मगर यू

बात बात पे बात बदल देना,सहना आसान नहीं अब हमारे लिए..
लिखना है बिंदास,लिखना है बेबाक..लिखते लिखते डरना कैसा..मौत का खौफ ही नहीं जब रहा वैसा..

रूप बदलते लोगो को देखा,प्यार नहीं पर प्यार जताते देखा..वादे किए किसी और से मगर,संग किसी

और के जीते देखा..संग साथी जी रहे है जीवन पर दुखड़े किसी और से रोते देखा..प्रेम प्यार के बंधन

की दुहाई दे कर,मतलब अपना किसी और से साधते देखा..पन्नो की यह स्याही सूखने कभी ना देंगे..

नस्लें आए नस्लें जाए,मुहब्बत के गीत यही से पढ़ते जाए...
सतयुग के प्रेम के पन्नो को जो खंगाला. तो प्रेम का रूप बहुत अलौकिक पाया..इक दूजे के लिए रूह से

समर्पित पाया..एक को चोट लगी तो घायल दोनों को पाया.रूह के तार जुड़े थे इतने कि इक दूजे की सूरत

मे कोई फर्क तक नज़र नहीं आया..यह कलयुग का प्रेम,जहां प्रेम से जयदा दौलत-रुतबे को भारी पाया..

एक ग़ुम है रुतबा पाने के लिए,नाम कमाने के लिए और रुतबा हासिल करने के लिए..ना वक़्त है अपने

साथी के लिए..साथ तब चाहिए जब,पाना है साथी का साथ..यह प्रेम नहीं,सिर्फ जरुरत है..लिखे गे

कलयुग को भी इन्ही पन्नो पर..क्यों कि लिखने के लिए,सदा नहीं रहे गे इन पन्नो पर..

Monday, 28 October 2019

आसमां को छूना है तो खुद को सोने की तरह तपाना तो होगा..रंजिशों से परे खुद को खुद ही बनाना

होगा..मंज़िल का तो अभी नाम ही मालूम नहीं..मगर पहुंचना है शिखर तक,यह ख़्वाब तो खुद के

अंदर जगाना होगा..जज़्बा ज़िंदा रखे गे तो ही खुद को उठा पाए गे..जहां भी जाए गे,माँ की यह बात

साथ-साथ ले कर जाए गे..''कामयाबी मिलती उन्ही को है,जो दिल से पाक रहते है..खुद को उठाने के

लिए,दूजो को ना गिराया करते है..रहना सदा धरा पे ही,चाहे आसमां की बुलंदियों को भी पा लो'' माँ,हम

कही भी जाए गे,तेरी सीख़ कभी ना भूल पाए गे..
कंगना...जो अक्सर हमारी मुहब्बत मे खलल डालते है..चूड़ियों को अपने इर्द-गिर्द ना आने देते है..

यह करधनी अब तेरी जरुरत नहीं लगती मुझ को..खनक इस पायल की साजन को बुरी लगती है,

जब यह खन-खन से उन को दुखी करती है..चाहत के रंग मे डूबे दो दिल,किसी का खलल ना चाहते

है..ज़िंदगी जो गुजर जाए तेरे अशियाने के तले,महक जाए जो जिस्म तेरी मुहब्बत के तले..इस के

सिवा किसी और का खलल ना चाहिए मुझे..
''सितारों से परे भी क्या कोई दुनियां होती होगी'' सुन के इसे हम जो हंसे तो रुक नहीं पाए..देख कर

हमारी हंसी बोले वो,सितारों का तो पता नहीं..पर मेरी दुनियां को सजाने तुम इक सितारा बन कर,

कैसे कब क्यों चले आए..हम ने उन को इक गहरा राज़ बताया..सुनो जानम,जो छोड़ आए थे तुम

हम को पिछले दौर मे,अधूरा जो रह गया साथ पुराने दौर मे..शिरकत तभी तो की है हम ने ज़िंदगी मे

तेरी,खुदा ने खाया तरस और पूरी की मन्नत तेरी-मेरी..
जो भी किया शिद्दत से किया..प्यार को आसमां की बुलंदियों का नाम दिया..हम प्यार की अलग मिसाल

बने,खुद को अपने प्यार मे शीशे की तरह उतार लिया..पूछते है वो अक्सर हम से,तुम क्यों हो सब से जुदा..

क्यों हो इक नदिया की तरह,कभी चंचल तो कभी इक शांत सतह..हम बोले,प्यार की इंतिहा जो देखी है

तो इबादत का रुतबा भी,हमारा देख लेना..नज़र अपनी मे यू ही रखना ..ना खुद से करना जुदा हमे..

नफरत का लावा गर बह निकला,तो डूब जाए गा सारा जहां..कि हम जो भी करते है शिद्दत से ही करते है.. 

Sunday, 27 October 2019

ज़िंदगी देती रहे बेशक लाख मुश्किलात,मगर दीप की लौ की तरह हर पल साथ तू है मेरे..तूफान आए

आते चले गए,तू रहा हर पल साथ मेरे..खुशबू से तेरी आज भी मेरा यह जिस्म महकता है..तेरे ही प्यार

मे पगे शोख अदा से चलते है..तेरी ख़ामोशी की यह भाषा सिर्फ मुझ को ही समझ आती है..दुनियाँ क्या

जाने,सपनो मे भी तेरा आना-जाना रहता है..रूह को मेरी इतना भी कमजोर ना समझ लेना,दुनियादारी

को समझने की परख अब पास है मेरे..
बहुत उजाला है आज मगर दिल तो तेरी बातों से झिलमिल झिलमिल है..सारा जहां रहे बेशक खुद

मे मगर हमारा इरादा तो तुझ को सताने का है..अब यूँ बेवजह ना मुस्कुराइए,कातिलाना अंदाज़ तो

हमारा भी है..कितने ही उजाले आज रहे जहाँ भर मे,रौशन खुद को करने के लिए साथ तेरा जरुरी है..

खुशियाँ ही खुशियाँ बिखरी है चारों तरफ,जो मंज़िल जाती है तेरी तरफ...हमारा रास्ता तो सिर्फ इतना

ही है..

Saturday, 26 October 2019

दीपक से दीपक को जलाया तो उजाला हो गया..कुछ नन्हे-मासूम हाथो ने जैसे ही सर झुकाया,तो

परवरदिगार भी हैरान हो गया..ख़ुशी से चमक उठी कुछ जोड़ी आंखे,यूँ लगा फ़रिश्तो ने हम को 

अपना नूर दिखाया..महक रहे है ख़ुशी से इतना,क्या पा लाया सोच रहे है इतना..काश,सारी दुनियाँ

इतनी ही खूबसूरत होती..ना कोई बेहद गरीब होता,ना कोई जरुरत से जयदा अमीर होता..सब के घर

सदा खुशियों के दीपक जलते..छुप-छुप के कोई आंसू अपने ना छिपाता...
कलम हमारी लिखती है,बना मुहब्बत को,प्यार को,प्रेम को इतना हसींन..लफ्ज़ो को उड़ा आसमान मे

इतनी दूर,जो दिल से है बेज़ार..जो टूटे है मुहब्बत के बाजार..जो प्यार से है महरूम,जो बुझे है किसी

पुराने दीपक की तरह..मर-मर भी मर ना सके,जीने की ख़्वाहिश भी पूरी कर ना सके..डर-डर के इतना

डरे कि प्यार की डगर भूल गए..कलम हमारी सन्देश देती है,भूल जा कल हुआ था क्या..भूल जा किस

ने तोडा था दिल यह तेरा..प्यार को अब बना इबादत अपनी,जी ले सारी साँसे जो अधूरी थी कभी..
''कही हम से आप को प्यार तो नहीं हो गया'' पूछा उस से हम ने..हम तो धरा पे है,धरा से अलग..जो

साथ नहीं किसी के चल सकता,प्यार भी किसी से कर नहीं सकता..जुड़े है बस ऐसी जगह जहाँ वक़्त

भी पहुँच नहीं सकता..फ़रमाया उस ने''मेरा भी अपना इक जीवन है,धरा पे हू मगर धरा पे सब से जुड़ा

हू..देख कर आप को विचलित नहीं,मगर कदमो मे झुकता हू'' ... देख ऐसा सच्चा इंसान खुदा को

हम ने शुक्रिया कहा..चल रही है दुनियाँ जब इन जैसो से,तो बिंदास हम सब लिख सकते है..



Friday, 25 October 2019

आसमाँ की बुलंदियों को गर छूना है तो बेखौफ तो लिखना होगा..प्रेम की भाषा सब को समझाने के

लिए इक प्रेम-ग्रन्थ तो लिखना होगा..हवस से परे,मुहब्बत के लफ्ज़ो को पाक तो रखना होगा..सोच

से परे जो रूहे-मुहब्बत होती है,सदियों से जो चलती आई है,सदियों तक चलती जाए गी..समर्पण-

इबादत जो समझ गया,सज़दा साथी का जो करना सीख़ गया..सही मायने मे मुहब्बत का अर्थ जान

गया..तू मुझ से परे मै तुझ से परे,मगर दिल-रूह तो साथ जुड़े..इस रिश्ते का नाम जो समझा,वही है

बना मुहब्बत के लिए..
बसे हो जब रूह मे तो कैसे कहे पास नहीं हो तुम..जब पास ही हो तो क्यों कहे,ख़ास नहीं हो तुम..हंस

दिए सोच कर तुझे..बात को घुमा देना तुम्ही से सीख रहे है हम..याद क्यों करे,जब याद ही हो गए हो

तुम..माशाअल्लाह..जवाब नहीं तेरा..कायल हो गए कब से तेरे..घायल हो गए सिरफिरी बातो से तेरे..

कुछ भी हो,बहुत ख़ास हो तुम..जिस ने बनाया तुम को,उस के शुक्रगुजार है हम..सब कुछ अब तुझी

से सीख कर,तेरे ही हो गए हम..

Thursday, 24 October 2019

सब कुछ दिया,सब कुछ किया..प्यार की पराकाष्ठा तब भी समझ ना पाए तुम..ना कुछ माँगा,ना

कुछ चाहा..फिर भी मुझे अपना ना समझ पाए तुम..जीने को तो हर कोई जी लेता है,मगर जो जिए

प्यार मे अपने ऐसा नसीब सब को कहाँ मिलता है..कहने को बहुत कुछ था,पर अब सब सपना है..

तुम कहाँ और हम कहाँ..मिलने का अब क्या सोचे कि तुम तो खुद के ही खुदा हो गए..और हम तुझ

को खुदा माने खुद से ही जुदा हो गए..
उन्हों ने फरमाया मैं खुश हू अपनी ज़िंदगी मे,आप अपनी ज़िंदगी मे आबाद रहे..दुआ देते है आप को

दुआ हमारी क़बूल करे..मुस्कुरा दिए पर साथ मे रो दिए..अजीब मुहब्बत है आप की..बोलिए तो,किस

बात को भूले तो किस को याद रखे..बसे है जब हर सांस मे आप तो अब किस नाम की और सांस ले..

वाजिब है  कहना आप का,हम ने तो सदा ख़ुशी ही चाही आप की..ज़िंदगी अपनी मे गर खुश है आप,

हम भी खुश है साथ आप के..जाते-जाते यह तो बताते जाइए,कितनी साँसे दे गे अब अपने नाम से..
रुक जाइए जरा..मुहब्बत-प्यार का मतलब तो समझते जाइए जरा..अगर हर जगह दगा होती,तो

यक़ीनन यह मुहब्बत ख़ाक होती..और गर यह ख़ाक होती तो ना ज़िंदगी कही आबाद होती..हल्की

सी खुमारी मे डूबा हुआ यह जहाँ सारा,याद करता है अक्सर मुहब्बत का जनून सारा..क्यों लगता है

आप को कि मुहब्बत जनून नहीं होती..सुनिए जरा,गर यह जनून नहीं होती तो आप की हम से

मुलाकात क्यों होती...
दर्दे-मुहब्बत हो या दास्तानें-इश्क...क्या क्या ना लिखा हम ने इस मुहब्बत के लिए..लगता है अभी भी

बहुत बहुत कुछ है ऐसा,जो लिखना बाकी है..यह जहां बहुत बड़ा है,हर इंसा अपनी तरह का है..यहाँ हर

कोई इस मुहब्बत को कहां समझा..किसी के लिए यह इक बदनुमा दाग़ है तो किसी के लिए मुहब्बत

बेकार है..कोई इसी मुहब्बत मे शिद्दत से डूबा तो कोई इस मे संग साथी के समर्पित हुआ..हम लिखते

जाए गे मुहब्बत को आखिरी सांस तक,''सरगोशियां''को इक प्रेम ग्रन्थ बना जाए गे..आने वाली हज़ारो

नस्लें मुहब्बत को समझे,हम तो इस को अपने पन्नो पे छोड़ जाए गे..
नज़ाकत और नफासत..मुहब्बत और शराफत..इज़्ज़त और झुकावट..तक़दीर से यह मिला हम को..

ढूंढ़ने जब निकले दुनियाँ के बाज़ार मे,कुछ मिला..मगर सब कुछ नहीं मिला.. जो होते है बुलंदियों

पे वो अक्सर गरूर से भर जाया करते है..नज़ाकत हो तो नफासत को भूल जाया करते है..शराफत

से जो मुहब्बत को ताउम्र निभा जाए,दुनियाँ के इस बाज़ार मे ऐसे शख़्स कहां होते है..मुहब्बत को

जो यह सभी नाम दे,ऐसे नाम कहां मिलते है..

Wednesday, 23 October 2019

यह मुहब्बत की दुआएं कहां कहां बसेरा कर जाए गी..कितनी सदियों से चल रही है,कितनी सदियों

तक चलती जाए गी..निर्मल मन साथ लिए,यह कभी ना रुक पाए गी..देख खुद को,किस मुकाम से

किस मुकाम तक तुम को ले जाए गी..मुहब्बत नाम है बहुत नामो का..जहां खवाब है.मन्नतें है.छू

जाने वाली ख्वाइशें है...डर मत कि बुलंदियों पे अक्सर पाक मुहब्बत ही ले जाया करती है..साँसे कब

तक है कौन जाने..मगर दुआएं सदियों सदियों तक साथ चला करती है..

 भोले भाले वो नैना..उस के दिल के आर-पार हो गए..वो भोले थे इसलिए ही तो उस की खास पसंद बन  गए..जब वो झुकते तो दिल उस का चीर जाते..जो उठते तो उ...