Sunday, 30 June 2019

नज़रे इतनी भी ना झुकाइए,पलकों को हलके से तो उठाइए..जान ले ले गी कसम से तेरी यह अनोखी

अदा..चाँद को इतना भी ना शर्मिंदा कीजिए,सितारों की छाँव मे अपना घूँघट उठाने की.. हम को इज़ाज़त

दीजिए..अच्छे भले इंसान को क्यों दीवाना बनाया आप ने,जब बना लिया,तो ज़िंदगी मे अपनी हम को

शिरकत तो करने  दीजिए...
फिर से अजनबी होने के लिए जन्म तो लेना होगा..जब संभाले गे होश,तो फिर से इसी तरह जुड़ना

होगा..हीर-राँझा की कहानी हो या लैला-मजनू के किस्से..बहुत दूर है हमारी गाथा से..नायाब हीरे

को चुन के सारे कंकर राह से हटा दिए हम ने..साथ आखिरी साँस तक दे गे,यह वादा दे के कोई

एहसान नहीं किया हम ने...रिश्ते की बहुत नाज़ुक डोर है,जिसे अपने प्यार से कभी टूटने ना दे गे ..
गीली मिट्टी की तरह हो गए है हम...जितना भी मोड़ लो,वैसे ही मुड़ते रहे गे अब...शिकायते बहुत

सुन चुके,अब खुद को खुद से ही जुदा कर दिया..अरमानो की बस्ती से कब से निकल आए है..

चादर पे दाग ना लगे,चादर ही फेंक आए है..दुपट्टा संभाले इक नई राह पे निकल आए है..जो शायद

जाए गी छोर तक..कुछ वादे कर चुके अपने आप से,ताउम्र निभाते रहे गे अब...

Saturday, 29 June 2019

सफर ज़िंदगी का बहुत लम्बा है...और तुझे बहुत आगे तक जाना है..मुकाम को पाने के लिए,कितनी

हदों को पार करना है..तेरे हर कदम पे हम अपनी पलकों को बिछाए गे..रास्ते तेरे लिए और भी आसान

हो जाए गे..गौर करना,जो निकलती है दुआ रूहे-अफ़सान से..वो कभी खाली नहीं जाती..उस को क़बूल

करने के लिए खुदा को भी अर्ज़ी मंजूर करनी होगी..जिस दुआ मे खोट नहीं,उस को वो मालिक भी

हिफाजत से रखता है..तेरे हर कदम पे अपनी शाही नज़र रखता है..
दरिया का आना और मौज को बहा कर ले जाना..अपने अस्तित्व को साथ लिए,दरिया को अपना लेना..

कौन कहता कि मौज प्यासी है अपने दरिया मे..प्यास का होना या ना होना,मगर दरिया को खुद से

बांधे रखना..दरिया की सच्चाई को जान कर भी,अनदेखा कर देना..कभी खफा होना,कभी खुद मे

गुमसुम हो जाना..दरिया सोचता रह जाए गा कि मौज ने क्या कुर्बान किया उस पर..जब तल्क़ समझे

गा,मौज तो बेखौफ दूर बहुत दूर निकल जाए गी...
आज फिर दिमाग की सोच पे अभिमान हो आया..और दिल..इस की बातो मे बह कर,कल इस ने हम

को खूब रुलाया..उम्मीदों को ले कर यह क्यों तन्हा हो जाता है..समझने को राज़ी ही नहीं,कि यहाँ तेरा

कोई हमसाया ही नहीं रहता..जो तुझ को दिखा,वो सिर्फ नज़र का धोखा है..वो तेरा है ही नहीं,जिस के

लिए तू ज़ार ज़ार रोता है..मुबारक दे उस को,उस के खुशनुमा जहान के लिए..और तू लौट जा फिर से

अपने तन्हाई के तहखाने मे..
बातो मे बात चली,तो वफ़ा का नाम भी आया...ना जाने कितनो को होती है यह मुहब्बत,और कितनो

को इस का अर्थ समझ मे आया...किसी ने किसी को दौलत और तोहफों से नवाज़ा, तो यह एहसास

उस को मन से भाया..कभी कोई तारीफो के पुल बांधने पे आया,तो साथी को वो प्यार का मोल नज़र

आया...वफ़ा के नाम पे अक्सर धोखे ही हुआ करते है,यहाँ कौन किसी के जज्बात और सच्ची वफ़ा को

सच मे समझ पाया...

Friday, 28 June 2019

वो कही कोई रिश्ता भी ना था..दूर दूर तक कही मिलना भी ना था..शक्लों-सूरत की कोई पहचान

ना थी..घरौंदा कभी कोई अपना भी होगा,यह भी नसीब के खाते मे ना था..फिर भी वो रिश्ते मे मेरा

कृष्ण बना और मैंने राधा का रूप धरा...लोग कहते है यह कलयुग है,यहाँ मुहब्बत पाक नहीं होती..

धरती के किसी कण मे मुहब्बत आज भी ज़िंदा है,सोचने की बात है यहाँ किसी रूप मे राधा है तो कही

कृष्ण भी उसी के साथ ज़िंदा है..
इज़हार करना ही नहीं,.मगर हम से जुदा होना भी नहीं..रास्ता रोकना ही नहीं,मगर राह से हटना

भी नहीं...गुफ्तगू के लिए लब कभी खुलते ही नहीं,मगर ख़ामोशी से भरे उस के इरादे कही कम भी

नहीं..ज़िद है हम को पा लेने की,मगर सीधे सीधे बात कभी करनी ही नहीं..वल्लाह..तेरी इसी अदा

पे तो दिल आया है..घुमा घुमा कर बाते करना,मगर जुबान से इकरारे-मुहब्बत करना ही नहीं..
बादलों की ओट से तो कभी चांदनी के छोर से...हज़ारो पर्दो मे घिरे हो मगर सोचना सिर्फ हमारे लिए...

इक लफ्ज़ मुहब्बत का लिख देना और चोरी छिपे हमारे चेहरे के रंगो को पढ़ना...रातो को जाग जाग

कर कुछ कुछ लिखना और हमीं को मुहब्बत की देवी कहना..हमारी ही सलामती के लिए दुआ पे दुआ

करना..पांव टिका दिए हर मंदिर हर मस्जिद मे हम ने..बादलों से कहा तो कभी चांदनी से पूछा,इतने

पर्दो मे ना रख मेहबूब को मेरे कि उस को ढूंढ़ने के लिए जन्म हज़ारो लेने पड़े..
इश्क की दुनियां क्या अजीब है..कभी है आग तो कभी बर्फ का गोला है..कभी सुलगते है अरमान तो

कभी साथ छूट जाने की बात होती है..गले लग कर वादों की बौछारे भी हुआ करती है..अचानक से

आंधी की तरह नया साथी कोई,दस्तक देता है..हुस्न जवां हमेशा रहे और इश्क कभी बदगुमा ना हो ..

शर्त सिर्फ इतनी है,मुहब्बत का सौदा दिल से नहीं रूह को ही ज़न्नत मे उतारा जाए ...
बूंदे तो हज़ारो साल से बरस रही है यू ही...देती है कभी सपनो को उड़ान तो कभी तक़दीर ही बदल

देती है...कभी कोई गुमसुम सा बैठा,इन्ही बूंदो के साथ रोया करता है..तकलीफ मे देख उसे मन

हमारा भी कुछ सोचा करता है..''''बरखा कभी ऐसी भी आए गी जीवन मे तेरे,खिले गे फूल भी तब

गुलशन मे तेरे..तब तुझे मिलने आए गे इक हमदर्द की तरह...बरखा को करे गे शुक्रिया,जो बरस

रही है बरसो से यू ही'''... ..

Thursday, 27 June 2019

धुंध की चादर मे लिपट गए है...वज़ूद अपने को समेटे उसी की नज़र हो गए है..आगे कोहरा है बहुत

गहरा,क्या होगा यह देख भी नहीं पा रहे है..चाल अभी मद्धम मद्धम है,मगर इरादे बहुत मुकम्मल

है...मोहलत साँसे दे गी जब तक,कोहरे मे रह कर ही ले पाए गे..फिर धुंध हमारी अपनी है,उसी की

चादर मे लिपट कर सदा के लिए खो जाए गे...
चंचल से यह तेरे नैना,जब जब शरारत करते है..लबो से तेरे वो दिल-आफ्ज़ा लफ्ज़ जो निकलते है..

हमारी पायल की रुनझुन को सुन कर क्यों तेरे होश उड़ने लगते है..ना आज़मा हम को इतना ,हम 

तो पत्थर को भी आग लगा देते है..मुहब्बत की क़शिश सूख जाए,वो मुहब्बत कहां होती है..जो टूटी

दरारों को भर दे,वो मुहब्बत से भी जयदा.....बस रूहे-आवाज़ होती है...
रहते है खुदा की इस धरती पे,उसी के रहमो-करम के साथ..बेशक हर नियामत नहीं मिली,मगर फिर

भी जी रहे है किसी देश की राजकुमारी के ठाठ के साथ..पलकों के शामियाने को जो गिराते है,रात

गहरा जाती है..सपनो की दुनियां मे मिल कर अपने राजकुमार से,वापिस इसी धरा पे लौट आते है..

आंख जो खुलती है, सुनहरे आँचल की तरह यह सुबह खिलती है...गुनगुनाते रहते है,फिर किसी देश

की राजकुमारी की तरह..

Wednesday, 26 June 2019

गर्दिश मे सितारे हमारे थे और वह साथ किसी और के चल दिए...जिस के लिए मन्नते मांगी,वह तो

अमीरी की राह पे चल दिए..टूटना तो लाज़मी था,टूटन को छुपाना भी वाजिब था..खिलखिलाहट देख

कर हमारी,ज़िंदा कितना जहान था...खुद की टूटन दे रही थे कितनो को नई ज़िंदगी..मुस्कराहट से

खिल रही थी कोपलें बेहद प्यार से,फूल खिलते रहे हमारे रोज़ आने की इंतज़ार मे..क्यों बताते बुझ

गया अंदर से कुछ,जब की दीपक जल रहे थे हमारी इक मुस्कराहट से..
 छनन छनन यह चूड़ियाँ और माथे की बिंदिया..सजी मुस्कान होठो पे..क्यों लुभा रही मुझे, तेरे लबो

की शरारती सी नमकीन बतिया...राज़ छिपे है मुझ मे इतने,आँखों से सब ना कह पाए गे..चप-चप

कर के कितना बोले,तुम फिर भी समझ ना पाओ गे ..नटखट नैनो से संभल कर रहना,दिल तेरा ले

जाए गे..रूह का चैन जो उड़ा लिया हम ने,तुम किसी काम के फिर ना रह जाओ गे...

Tuesday, 25 June 2019

दोस्तों...मेरी शायरी को पसंद करने के लिए तहे-दिल से शुक्रिया...इस के हर पहलू को आप सभी ने,बहुत मान दिया है....आगे भी देते रहिए गा...हौसला-अफजाई के लिए शुक्रिया..शुभ रात्रि ..
यह खुशियां कही उधार की ना हो,डर लगता है..ज़िंदगी ने ज़हर पिलाया है इतना जयदा,कि अब यह

अमृत भी धुआँ धुआँ सा लगता है..गहरी नींद मे सोते है अब,गर आंख खुले तो घबरा जाते है..टप टप

गिरते है आंसू और बेहाल हो जाते है..तन्हाई कही फिर से ना डस ले,ज़हर ज़माना फिर ना पिला दे..

ज़हर वो अब ना पी पाए गे,खुशियों को सीने मे दबा कर अपनी माँ के पास लौट जाए गे..
यकीन को डाला अपनी झोली मे और बची चंद सांसे के हवाले कर दिया..एक लम्बे वक़त के बाद मिला

कुछ ऐसा,जिस का आना हीरो का जगमगाना लगा..बहुत रंग देखे इस दुनिया के और फिर इसी दुनिया

से बेगाने से हो गए...बिखरते बिखरते इतना बिखरे कि यकीन को खुले आसमां के हवाले कर दिया..

फिर इक नगमा कुदरत ने ऐसा दिया,यकीन को डाला अपनी झोली मे और सांसो को  इसी के हवाले

कर दिया..
क्या है यह ज़िंदगी का फलसफा..कल मिलती है कुछ खास ख़ुशी,आज दिल दर्द से रोता है..चाहता

है फ़ना होना,मगर कुछ कर ही नहीं पाता है..बार बार बेचैन हुआ कभी रो देता है तो कभी बहुत उदास

हो जाता है..परवरदिगार तेरी इस दुनिया मे ऐसा क्यों होता है..ज़न्नत होती है बिलकुल पास,मगर

वो चार कदम पार करना ही क्यों नामुमकिन हो जाता है..

Monday, 24 June 2019

बहते झरने की तरह वो प्यारी सी हंसी..मुद्दत बाद मिली झिलमिलाती सी..खूबसूरत सी ख़ुशी..

बेशक चेहरा उस मासूम का देख नहीं पाए..पर फिर भी लगा कही तो उस को देखा है..शायद

खवाबो मे..शायद मुझ मे..या शायद हर जन्म मे..झरनो को हम ने नज़दीक से बहते देखा है..

समंदर को उस की सतह पे गुजरते देखा है..क्या कीमत लगाए इस अनमोल हंसी की..सारी

ज़न्नत भी लुटा दे,कीमत फिर भी ना दे पाए गे..

Sunday, 23 June 2019

रेखाएं हाथ की क्या कहती है..सितारे किस्मत के क्या कहते है..आने वाला वक़्त क्या लिख रहा है

तक़दीर हमारी मे...सब से बेफिक्र चल रहे है यू,जब चाहतों को तबज्जो ही नहीं दिया..ऐशो-आराम

को सिरे से ठुकरा दिया..दौलत के ढेर से किनारा ही कर लिया..बस देखा हर इंसान मे खुदा का रूप..

जरूरतमंद जो दिखा,गले उस को लगा लिया..अब रेखाएं और सितारे किस्मत के क्या कर पाए गे..

झुकना तेरे आगे कोई गुलामी तो नहीं..हर बात को सर-आँखों पे लेना मजबूरी भी तो नहीं..दिल की

धडकनों ने समझाया इबादत जब की है,तो सज़दा करने मे क्या डरना..कोई इतना अपना है तो साथ

चलने से क्या डरना..प्यार पाने के लिए लोग ना जाने क्या क्या किया करते है..इबादत के लिए जब

चुना उन को,तो कदमो मे उन के झुक जाना कोई गुलामी तो नहीं...
आज फिर चुपके से दस्तक दी तन्हाई ने..हम मुस्कुराते रहे और वो थी कि रुलाने पे आमदा थी..धीमे

से एहसास यह दिलाने लगी,कि कोई नहीं तेरा जो दूर तक साथ जाए गा..अकेले ही कदम बड़ा,अब

मेरा साथ ही तुझे भाए गा..क्यों मुस्कुरा रहे हो,जब कि जानते हो मेरे सिवा तेरा अब कोई भी नहीं..

सोचा,तन्हाई क्या सच कहती है..गज़ब है कि मुस्कुरा तो रहे है पर आंखे बहुत नम है...

Saturday, 22 June 2019

हम कहते है आप से,कभी तो मुस्कुराया कीजिए..इस ज़िंदगी को शिकायत का मौका मत दीजिए..

जो मिला है उसी को संभालना सीखिए..कभी कभी एक नज़र हम पे डालिए..अपने दर्दो को हंस कर

उठा लेते है..रोए कितना भी,दूसरो को फिर भी जीना सिखाते है..माशाअल्हा..खुद को सवारते है इतना,

किसी रोज किस रूप मे ज़िंदगी हम को देने आए सौगाते,ऐसा ना हो कि देख कर रोनी सूरत वो कही

और लौट जाए..
शहनाई बजी भी नहीं और बारात आ गई..नगाड़े नहीं बजे फिर क्यों रौनक छा गई...हल्दी नहीं लगी

हाथो मे, पर चेहरे पे तेरे नाम की चमक आ गई..बिना तुझे देखे,आसमां से फ़रिश्तो की दुआ खुद ही

आ गई ..यह कौन सी रस्मे है,जो यह पगली तेरे बिना निभा गई..सदियों तक साथ निभाने का वादा

कर के,तेरी दुल्हन इस जन्म मे अकेले क्यों रह गई..
नाचीज़ समझ कर फिर हम को माफ़ कर दीजिए..औकात मे अपनी रहना सीख ले गे,बस एक बार

प्यार से हम को अपना लीजिए..कण कण मे बसा कर आप को,दुनिया को देख ही नहीं पाए..इस

दुनिया से क्या लेना क्या देना,जब रास्ते ही सारे पीछे छोड़ आए ..दीवानगी की हद कहां तक जाती

है,यह सुबह कब होती है कब रात दस्तक दे जाती है..बेखबर तो खुद से है,अब आप को क्या क्या बताए
सरसराहट हवाओ मे है या हुस्ने-इश्क की कहानी मे..दर्द आँखों मे है या जिस्म की रवानगी मे..पल

पल की खबर रख रहा है ये मौसम,भिगो के क्या साबित कर रहा है जालिम..तेरे डर से किस्मत की

लकीरों को नहीं मिटाए गे,जो कह दिया कर के दिखाए गे..फिर कोई कहानी अधूरी ना रह पाए गी,

तू कितना भी बरस.बेखौफ बरस..पालकी प्यार की इस बरसात मे भी साजन के घर जाए गी..

Friday, 21 June 2019

कुछ नहीं है पास मेरे,फिर भी लगता है सब कुछ है..नींद आँखों मे नहीं,पर सवेरा फिर भी प्यारा दिखता

है..रोज़ रोज़ मरते है,ज़िंदगी को फिर भी गले लगा लेते है..खवाहिशे दम तोड़ देती है कई बार,हसरते

फिर भी जन्म लेती रहती है..कुदरत देती रहती है इशारे जीने के,पर यह जो दिल है मौत का सौदा एक

दम कर लेता है..आंखे दमकती है किसी के प्यार मे,जुबां फिर भी खामोश रह जाती है..
किसी ने आज दिया ऐसा एहसास कि यह ज़िंदगी लगी बहुत प्यारी प्यारी..हवा बहुत गर्म है मगर

ऐसा लगा बरखा बरसी है जम कर आज ..किसी ने फिर आज रूह मेरी को नज़दीक से छू लिया..

लगा ऐसे पत्थर को पिघला कर पारस कर दिया जैसे..नरम नरम सी दूब उस पे किसी ने,झरना

बहा दिया जैसे.. बहुत हलके से हो गए है, मोतियों मे तोल दिया हो किसी ने जैसे..
परिभाषा प्रेम की..प्रेम मे क्या पाना है,क्या खोना है..इस मे तो बस डूब जाना है..राधा तो राधा बन

जाए गी,पर कृष्ण किस हद तक साथ निभा पाए गा..क्या राधा के लिए अपना सर्वस्व छोड़ पाए गा..

सदियों का साथ पाने के लिए,एक जन्म की जुदाई क्या सह पाए गे..राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम

को समझ पाए गे ..कलयुग मे अगर राधा होगी तो कृष्ण भी यही मिल जाए गे...

Thursday, 20 June 2019

फिर कर रहे है शुक्राना तुझे मालिक..कदम कदम पे साथ देने के लिए..दौलत भी नहीं,शोहरत भी

नहीं..जग दे रहा है इतना मान,कि तुझे यह भी ना कहे..जो मिल रहा है वो सिर्फ तेरी वजह से है..

नैनो ने कहा, मेरी इबादत का जो सिला तुम ने दिया,हम तो खुदा आप के सज़दे मे फिर से हज़ारो

बार झुक गए...बस रखना मुझे,जमीन पे कि आसमां को छूना तो है हसरत मेरी..पर पांव रहे इस

जमीन पर,इतना करम करना अपने वादों से ना मुकरे कभी..आमीन...
क़यामत की वो रात आई और सब बहा ले गई..सपने जो संजोए थे,टूट कर सब ढह गए..पलट कर

क्या देखते,वो जहां कब का छोड़  आए थे..आंखे भरी थे रंगीन सपनो से,क्या क्या सोच कर आए थे..

समझौता कितना करते,हक़ ही सारे तक़दीर ने मिटाए थे..लड़ते तो किस अधिकार से,साँसों का बोझ

तक तो उठा ना पाए थे..पांव रखा बाहर दहलीज़ से,रास्ते अब खुद बनाने अपनी मर्ज़ी से आए थे..
महकना और अपनी महक तुझ तक पहुँचाना..राह मे किसी को महक का एहसास ना होने देना..लबो

को बंद रखना,गुफ्तगू तभी करना जब तेरे इशारो को समझना..खामोशियां भी कभी कभी बहुत कुछ

कह जाती है..दिन ढले या महीनों,एहसास तेरे पास होने का हर दम दिलाती रहती है..टिक टिक घड़ी

की वक़्त को कहां से कहां ले जाती है,इस जन्म से उस जन्म तक सदियों मे पहुँचाती है..

Wednesday, 19 June 2019

यह पन्नो की दुनियाँ खास बहुत हमारी है...डबडबाई आँखों से,कभी मुस्कुराती बातो से. यह सब कुछ

हम को कहती है..स्याही फैले जब जब इन पे,दर्द हमारा पी लेती है..खिलते मन से जो कुछ लिख दे,

साथ हमारा देती है..रिश्तो की दुनियाँ समझ ना पाए,कभी जिए कभी दिल से घबराए..कोई ना समझा

मन यह मेरा,हम ने सब कुछ इन पन्नो पे खोला..झूठे प्यार का लेखा-जोखा,पन्नो की क़ुरबानी का

मौका..सच्चा साथी है यह पन्ने,जब जी चाहे बाते कर लेते है इन से..


चन्द लम्हे मिले है ख़ुशी के जीने के लिए..बरसो बाद कही फूल खिले है दिल के सकून के लिए..खिल

रहे है जैसे नई सुबह खिलती है..कोई रोक नहीं कोई टोक नहीं,खुल के आज़ाद बरसती है..जानते है

ख़ुशी के लम्हे बहुत थोड़े है..किस मोड़ पे धोखा मिल जाए और हम सूनी राहो पे कब उतर आए..खुद

 को उस पल के लिए राज़ी कर रखा है,मौत तो आखिर हमारी खास दोस्त है..ले जाए गी वो संग अपने

 हमें,खास उस से कह रखा है..



ना पूछ मुझ से,मेरी रज़ा क्या है--खता की है तो रज़ा का सिला क्या है--झिलमिल कर रही है यह पलके-

कजरारे नैना बहक रहे है खुद के ही सागर मे--नींद से तुझे जगाए कैसे,बस पायल को खनका देते है

धीमे से--परिंदे भी चहक रहे है,देख कर मेरे भीगे आंचल को--खुश है बहुत यह बेज़ुबान भी,सुन के इस

पायल की रुनझुन को--तू ही ना समझे इन नैनो की भाषा को--तभी तो कहते है ना पूछ कि मेरी रज़ा

क्या है--

जो हुआ सो हुआ..चल आ दुनिया के इन झमेलों से कही दूर चले..हलकी सी मुस्कान से सारे शिकवे

दूर करे..देख ना,मौसम का जादू आज कितना कातिल है..यह तो बता मेरी अदाओ से जय्दा कातिल

है..हंस क्यों दिया मेरी नादानी पे,ना रोक हंसी अपनी, इसी हंसी पे तो हम थे फंसे..रूमानी सा मौसम

है आज,पर तेरे पास तौबा...है कितने सवाल..हर सवाल का जवाब है हम..चल आ..इन झमेलों से दूर

कही दूर चले...
धरती का नन्हा सा जर्रा हू..तेरे काबिल भी नहीं हू...आसमां का फरिश्ता है तू,तुझे आंख उठा कर देखू

इतना खुशनसीब भी नहीं हू..झुकता है जहां तेरे कदमो मे,हम बिछा रहे है दुआए तेरे जीवन मे..मासूम

है,बेवफा नहीं..दीवाने है पर गैर नहीं..कभी फुर्सत मिले तो झांक लेना इन आँखों मे,वफ़ा की पूरी किताब

लिखवा कर लाए है अपने परवरदिगार के घर-आंगन से..नस नस तो भरी है उलझनों के ताने-बानो

से,मगर लड़ जाए गे ज़माने से किसी भी आजमायश से... 
यह कौन सी लौ है,जो सीधे सादे  मासूम से दिल की बाती से जलती है..वादा कर रहा है दिल इस बाती

से,तू जलते रहना सदियों तक..जब तल्क मुहब्बत का पाक रूप कायम है..अँधिया आए या जलजला

तुम्हे थामे रहू गा मैं सदा..जिस्मो का क्या है,कभी तो फ़ना होना है..मगर मुहब्बत को हमेशा ज़िंदा

रहना है..इक दूजे की रूह मे शिरकत करे गे हर जन्म,जिस्म बदल जाए गे मगर तेरी-मेरी रूह मे

वो फिर समा जाए गे...
यह शुरुआत है या अंत है..मिलन का तोहफा है या जुदाई से पहले की घड़िया है..आंसू की पहचान कैसे

करे,जो बहते है उन की कीमत क्या है..कभी लगता है कि दे रहे है आवाज़,बेपनाह मुहब्बत आगे राहो

मे है..कभी डरा देते है,अंधेरो का खौफ आने को है..कभी होते है खुश तो कभी खुद मे सिमट जाते है..

अल्लाह मेरे ,देनी है गर जुदाई तो साँसों को भी ले लेना,खौफ अंधेरो का अब कभी ना देना...
बार बार एक ही खता क्यों हो जाती है..दिलो-दिमाग की जंग मे हार दिल की क्यों हो जाती है..देता

रहता है इशारा ना जाने कितनी बार दिमाग...दिल जो हसरतो के जाल मे फिर खता कर लेता है...

काम करता है सिर्फ इतना कि आँखों को रुला देता है..और जुबान से खता ना करने की माफ़ी भी

मंगवा देता है..समझाए  तो इस दिल को कैसे समझाए ,कम्बख़त..अब मेरे पास रहता ही कहाँ  है...

Tuesday, 18 June 2019

बिस्मिल्लाह...कह कर हम फिर आदाब से,खुदा के दरबार मे झुक गए...जो खवाबों मे ना था,जो इरादों मे

 भी ना था..ज़न्नत कहते है जिसे,तहजीब का तोहफा बुलाते है जिसे..हम तो फ़क़ीर जैसे ही थे,इस दुनिया

से अलग-थलग बेगाने से थे..नूर चेहरे का लौटाया है तुम ने खुदा मेरे,दिल को जीना सिखाया भी तुम

ने.है खुदा मेरे....तेरे दरबार से ख़ाली ना जाए गे,जो हमारा है वो तो साथ ले कर ही जाए गे..
संगेमरमर की कोई तराशी मूरत भी नहीं,किसी कलाकार के हाथो बनी कोई तस्वीर भी नहीं,सोने-चांदी

के सिक्को से सजी किसी थाली की आरती भी तो नहीं...किसी के दर्द मे खुद को फ़ना कर देना..जरुरत

मे अपना हिस्सा भी किसी बेबस को दे देना. मुस्कुरा कर जो दे दे दुआए,उस को गले से लगा लेना..

लोग कहते है परी-कथा की रानी हम को,और हम..उन्ही के प्यार मे अपनी ज़िंदगी लुटाते रहते है..
कोई पढ़ रहा था हमे रात रात भर जाग कर..नग्मे भी लिख रहा था,हम को अपना प्यार मान कर..

बेखबर इस से हम तो सो रहे थे नींद चैन की...कोई नज़र भी रखे है हम पे प्यार की,मस्त थे खुद

ही खुद की बात मे..नग्मे मिले,नग्मे सुने..असर तब भी ना था किसी बात का..हंस रहे थे खुदा की

खुदाई पे,कौन है जो इत्मीनान से पढ़ रहा है हमे इतनी तन्हाई मे..मुस्कुराए इतना कि आखिर वो

नग्मे हम को भा गए..तन्हाई मे अब हम है और वो सो रहे है इत्मीनान से...
धक् धक् धक्..क्यों धड़क रहा है आज यह दिल जोरों से...बरखा भी बरस रही है क्यों बेहद शोर से..

आसमां मे कहर बरसा रही यह बिजली की कड़क,रह रह कर किसी की याद सता रही है मुझे...तेज़

हवा जो भीगी है तेज़ बौछारों से,कर रही है शरारत हमारे मासूम चेहरे से..खुश है बहुत जैसे खज़ाना

मिला है हमे,वो दिल ही क्या जो धड़के ना किसी के लिए..इतना धड़के,इतना धड़के कि आवाज़ पहुंच

जाए किसी को जोरों से..
क्यों भीगती है यह पलके,जब भी दिल के तार खनकते है..क्या यह बूंदे जुडी है इबादत से,जो पलकों

के किनारे आ कर थम जाती है..रफ्ता रफ्ता खुल रही है राहें,और हम उन्ही के कदमो को सज़ा रहे है

फूलो की पखुड़ियो से..पाँव जहा जहा रखे गे आप,हम अपनी पलकों को वही बिछाए गे..जिस दिन यकीं

हो जाए गा,यह बूंदे पलकों की भरी है वफ़ा की सच्चाई से..राहो पे खुद ही खुदा का साथ मिलता चला  जाए गा..

Monday, 17 June 2019

आसमां की बुलंदियों को छूना है,आगे जाना है इतना कि सब को पीछे छोड़ देना है..नज़र ज़माने की

कहां लगती है,जब कोई खास दुआ साथ साथ चलती है..बिखरते तो वो है जिन को दुआओँ पे यकीं

नहीं होता..कुदरत का करिश्मा है,दुआ से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता..बेशक मेरी बातो का यकीन ना

कर,पर जो सच आए गा उस को क़बूल करने की हिम्मत तो रख..
इक धड़कन जब दूजे से मिली,कही दूर जैसे शहनाइयाँ बजने सी लगी..तार एक बंधा,पहला उस से

खुद ही खिंचा..मिलन की रात जरूर आए गी,खुदा ने हंस कर कहा..पाकीजगी है तेरे तारों मे,मन की

उलझन को मिटा..वक़्त मेहरबान हुआ करता है,जब दो सितारों का धरती पे आना लिखा होता है..

धीमे धीमे नज़दीकियों को बड़ा,शहनाइयों को तो आना ही है.. इंतज़ार को थोड़ा और बड़ा...
पर्दे मे ना रहो,पर्दे से बाहर आ जाओ..दर्द को दिल मे ना भरो,दिल से निकाल फेको..दुनियां तो किसी

की भी नहीं,इस की गुस्ताखियों को माफ़ करो..जो कहे ज़मीर अपना,उसी की बात मान लो..दर्द सहते

सहते कही उम्र ना बीत जाए,ऐसा ना हो कोई साथी ही दूर चला जाए..वक़्त रहते जी ले अपनी खुशियां

क्या पता यह लम्हे फिर लौट के आए ना आए..

Sunday, 16 June 2019

दुआ लेने के लिए किसी ने मंदिर ढूंढा..कभी मस्जिद की और तो कभी वाहेगुरु को ढूंढा..झुक झुक के

सलाम करते रहे हर दरबार मे...आंसू भी निकल आए अपने दुखो के बोझ से..कभी दौलत के लिए,कभी

रुतबे के लिए तो कभी किसी से होड़ मे आगे निकलने के लिए..काश,मंदिर के आगे भी उस भगवान् के

रूप को देखा होता..जो कर रहे थे नमन आप को,रोटी के टुकड़े के लिए ..बड़ी गाड़ी से बड़ी भूख थी जिन

 की ..और आप तो बस मस्त थे,अपने भगवान् को याद करने मे..
टूट रहे है घुंघरू बार-बार,काजल बिखर रहा है आँखों से बाहर..आवाज़ दे रही है मेरी खामोशियाँ यहाँ

से दूर निकल जा साँसे लेने के लिए..हर दिन एक इंतज़ार होता है..रात को हर नया शख़्स नई ज़िंदगी

देने का वादा करता है..बिक जाने पर यही शख़्स यमराज नज़र आते है..फंस गए है इस भूलभुलैया मे

जहा रौशनी नहीं बस अंधेरो के तूफ़ान नज़र आते है...
सांसे अब तो तेरे नाम की है..जितनी भी है क़यामत की रात तक है..ज़मीं से आसमां तक,इन की

रवानगी की सीमा पता नहीं कहां तक है..हो जहां तक भी,विश्वास की जुबां मे है...ज़िंदगी बाक़ी है

कितनी,इस का हिसाब नहीं रखे गे अब..कि हर सांस जब भी उठती गिरती है,तेरी खुश्बू के रेले से

मिलती जुलती है...अब तो रूह अपनी से भी, तेरी ही रूह की वो महक आती है..जो सांस शुरू हुई

थी तेरे नाम से,वो आज भी मेरे दिल को महकाती है...
वो अक्सर पूछते है हम से,प्यार कैसा होता है..क्या यह प्यार,एक शख्स को बदल भी देता है..सुना तो

बहुत है,पर सच है क्या बता सकते हो..''जो रस-बस जाए मेहबूब की राहो मे,जो ढाल दे सुरो को बेजान

मुहब्बत मे,जो दे मेहबूब को इतना सकून कि ज़न्नत की राह भी वो भूल जाए..उस के दुखो को अपने

नायाब रिश्ते से गायब कर दे..जो अपने हर कदम को,मेहबूब के साथ साथ रख के चले..बिखरने से

पहले ही उस को थाम ले बाहो मे अपनी'''प्यार की परिभाषा बहुत लम्बी है,तुम मेरे साथ चलो,चलते

जाओ..प्यार की ज़न्नत तो बस ऐसी ही होती है..
दोस्तों...मेरी शायरी को पसंद करने के लिए शुक्रिया..आभार..दोस्तों,मेरी शायरी का किसी भी इंसान या उस के जीवन के किसी भी पहलू से कोई सम्बन्ध नहीं है..इस को सिर्फ एक शायरा की शायरी मान कर,सुखद या दुखद एहसास महसूस कीजिये..अपनी प्रतिक्रियाए समय समय पे लिख कर मेरा हौसला-अफ़्जाई कीजिये...शुक्रिया..धन्यवाद ....

Saturday, 15 June 2019

मशक्क्त है या फिर कोई जलजला उधार का..जल जल के खाक ना हो जाए फिर कोई सिलसिला..

पायल अब बजने से इंकार करती है,फूलो की यह वेणी,गज़रे के साथ रो लेती है..घुँघरू की ताल पे

नाचे भला कब तल्क,बेड़ियों मे बंध कर रहे क्यों अब भला..नज़र ढूंढे किसे कि यहाँ सब शैतान है...

प्यार का दावा करे,ज़ख्मो को फिर नया इक ज़ख़्म दे..खाक होते रहे या जलजला बन घुटते रहे...
लम्हा लम्हा..दिन बनते है..दिन दिन ही बन कर सालो मे ढलते है..कह रहा है हर लम्हा,खुद को खुद

से जुदा कर दे.. दिल को दिमाग से ही जुदा कर दे...कदमो को चलने दे उन्ही राहो पे,जो सकून की और

 जाती है..नन्हे नन्हे हाथो को थाम,इक नई दिशा मे ढाल उन्हें...मुस्कुराने की वजह जो देते है,हाथ थाम

 गले लग जाते है..उदासियों को पल भर मे मिटा देते है..परी-लोक की रानी बन कर,हम बेहद खुश हो

जाते है...
भरभरा कर जो गिरी है दिल की दीवारें,बहुत दर्द है इन मे अभी भी...थामने के लिए जो हाथ उठाते है

तो एहसास होता है,यह दिल तो बुझा चिराग बरसो से था..हज़ारो बहाने थे खुशियाँ लुटाने के,क्या यह

कम था पाँव के नासूर पे चल कर किसी की जान बचाने के..माँ सच ही कहती थी,इस दुनियाँ के साथ

तू कैसे चल पाए गी..तेरी इक छोटी सी खता,तुझे हज़ारो आंसू रुलाए गी...

Friday, 14 June 2019

कारवाँ गुजरता रहा और कोई तन्हा होता रहा..बेशकीमती लिबास पहने फ़कीर बन जीता रहा...कौन

था उस का जो यह कहता,आ दर्द बाँट लू मैं तेरा..सतरंगी दुनिया थी कभी उस की,आज सोने की थाली

मे भूखा सोता रहा..बहुत मतलबपरस्त है लोग यहाँ,कब चैन से जीने देते है..थाली सोने की भले हो,

मगर प्यार के दो बोल देने से कतराते है..
लौटना--और लौट के फिर नए आगाज़ से चलना...महकना है मगर खुद को पीछे छोड़ देना..उलझनों

को समझना मगर अपनी उलझने छुपा लेना..आंसुओ को सिरे से विदा करना,खुद को ही बदल लेना..

चाहतों को फिर पुराने बक्से मे संभाल कर रख देना,बिंदास जीना और बेखौफ हो कर दुनिया को

खुशियाँ देना...खुद से खुद को पराया कर देना,मगर ज़माने को प्यारी सी मुस्कराहट देना....
तूफान रहा इतना भारी,लगता रहा कि सरहदे ही टूट जाए गी...राह नई थी,डर था तूफान से बच

ही नहीं पाए गी...अंदर भी था गहरा तूफान,हिचकियो से किस को यह सन्देश पहुंचाए गी...थके

हारे थे मगर,सहारा आज भी उस मालिक का था..सैलाब बहाया इतना,याद दिलाया इतना कि रोक

दो इस तूफान को..इस के बाद हम खुद की सलामती भी तुझ से कभी नहीं मांगे गे.. 

Thursday, 13 June 2019

दोस्तों..आज विश्व रक्त-दान दिवस है.. किसी भी दान से बड़ा दान है,रक्त-दान..आप द्वारा दिया गया रक्त किसी मासूम जरूरतमंद की जान बचा सकता है..पर,दे कर कोई दिखावा मत कीजिए..यह तो कुदरत आप के खाते मे यू ही लिख दे गी..ना भी लिखा जाये,पर एक आत्म-संतुष्टि कि आप ने एक नेक काम किया..किसी को जीवन-दान दे..शुभकामनाए...
अफरा-तफरी की इस दौड़ मे,जहा हर शख्स मशरूफ है अपने कामो मे...इस दौड़ से परे आज जो पाया

हम ने,कुदरत की मेहरबानी का एक अजूबा था..भोला सा मासूम सा चेहरा,वो प्यारी प्यारी दो जोड़ी

आंखे..उस ने ''माँ'' कह कर जो पुकारा मुझ को,मेरे दुपट्टे को नन्ही ऊँगली मे जो पकड़ा उस ने..निहाल

हो गए कुदरत के करिश्मे पे..ममता-दुलार क्या इतना लुटाया था उस परी पे हम ने,यह सवाल कौंधा

ज़ेहन मे अपने..आज भूल गए है सब,कि किस ने हम को सताया,या किस ने कितना रुलाया..इन दो

जोड़ी आँखों मे सब कुछ, पाया .सब कुछ पाया ...

Wednesday, 12 June 2019

धीमे धीमे तो कभी जोरों से,तेरे दिल के तार कभी तो बजते होंगे..इकरार कर या इंकार कर,तन्हाई मे

 दो अश्क तो जरूर बहते होंगे..धड़कनो का हिसाब तो तेरे पास भी होगा,और मेरे पास तेरे लिखे हर

लफ्ज़ का ज़ज्बाते-बयां भी होगा..आज भी तेरे हर लफ्ज़ को सलाम करते है..शाम मुहब्बत की एक

हो या चार हो,वादे तो वही हुआ करते है...संभाल अपने दिल की धक् धक् को,हम तो यारा पाक

मुहब्बत को सलामी दिया करते है...
साथ जय्दा नहीं रहा लेकिन,यादो मे तेरी आज भी जीते है..कोई तुझ जैसा कहा होगा,तभी तो तेरी

उन्ही बातो को बार बार याद करते है...दुनिया समझती है हम को रानी झाँसी की,पर राज़ तो यह है

कि रूह पे मेरी राज़ तेरी मुहब्बत ही करती है..मिलना है तुझ से,मगर तेरे दिए अधूरे काम पूरे करना

बाक़ी है..सजना है,सवारना है अब भी तेरे ही लिए,तेरी उसी खवाहिश को मद्देनज़र रख कर तेरी ही

तस्वीर से बात करते है...

Tuesday, 11 June 2019

किस ने क्या खोया,किस ने क्या पाया..ना अब सवाल है कही,ना कोई जवाब है..मद्धम मद्धम जब

जलता है दिया,रोशन फिर भी आस पास करता है...बुझाता है कोई जब उसे झटके से,दिया गिरने से

पहले उसी के दामन मे आग लगता है..झुलसने का एहसास होता है जब तक,तब तल्क सारा आशियाना

खाक हो जाता है..मगर बुझते बुझते दास्तां जलने की सब को सुना कर जाता है...
कुछ कहानियो मे किरदार नहीं होते..सिर्फ होते है ज़ख्म पर इरादे बुलंद होते है...रिश्ते कही भी नहीं,

मगर हसरतो के द्धार खुले होते है..ख़ामोशी होती है भारी,लफ्ज़ सीने मे दबे होते है..कुछ करने की

ठान ले,तो चट्टानों से भी टकरा जाते है..ज़माने की परवाह करनी क्यों,जब कफ़न सर पे बांध लेते

है..ज़ख्म को भरने के लिए,इरादे हर पल बुलंद होते है..

Saturday, 8 June 2019

खता नहीं हमारी फिर भी,सज़दे मे तेरे फिर भी झुकते है..इल्ज़ाम कितने भी दे दे,कुछ भी कहने से

बचते है..अपना मान कर बहुत हक़ से मांग लिया  कुछ हम ने...एक बच्चा सा मन खिल गया था जैसे..

ज़िद कभी की नहीं,बस याद है इतना माँ-बाबा के सामने ज़िद्दी होते थे ऐसे ..सोचा,बार बार सोचा ...

बड़े हो गए है अब,ज़िद की तो क्यों कर की हम ने..इतना अपनापन पाया कि औकात सच मे भूल

गए अपनी..माफ़ कीजिये हम को,अपनी औकात से आगे नहीं बढ़े गे कभी...

Friday, 7 June 2019

फिर ना कहना क्यों इंतज़ार मेरा नहीं किया..भूल तो होती है सब से,यकीं इतना भी नहीं किया..यारा....

अपनी सफाई देने का एक मौका तो देते मुझ को..हा -इंतज़ार कर रहे है,मौका फिर से देने का..सब कुछ

कहने के बाद,कुछ नहीं रहा कहने को अब पास मेरे...कब तक जान मेरी,मुझ से नज़र बचाओ गे..जो है

हमारा,उस को लौटाने कब वापिस आओ गे..कुछ वक़्त और सही,फिर अपनी राहो मे हम  हमेशा

हमेशा के लिए गुम हो जाये गे ...
मुहब्बत की सीमा नहीं होती...यह तो वो इनायत है,जो सब के पास नहीं होती..जज्बा इस मुहब्बत

का इक पल मे ही खिल जाता है..सालो की बात नहीं,कुछ दिनों मे क़ुरबानी पे आ जाता है...हवस के

नाम को मुहब्बत नहीं कहते,जो दूजे पे यकीं ना करे उस को पाक मुहब्बत के मायने समझ ही नहीं

आते...बेबसी को आड़े रख कर,जो मुहब्बत से डरा करते है..अक्सर वो प्यार नहीं सिर्फ दगा दिया करते

है...
अक्सर लोगो से सुना है,खुशियां तो बस पैसो से मिलती है..आलीशान मकानों मे,सजे संवरे कीमती

फर्नीचर मे रास बसता है ....आशिक भले कैसा भी हो,मगर महंगे तोहफों मे ही सब सजता है..दिलो

मे खार भले रोज़ चले,महंगी गाड़ियों मे यह प्यार फिर भी पनपता है..इन सब से परे हम ने,अपने

साजन से छोटा सा तोहफा माँगा..इस यकीं के साथ,कीमत से हम को मतलब ही नहीं..पर जो हम ने

माँगा,वो सिर्फ अपने पास से देना ..मांग के दूजे से कुछ ना देना,बस अपने रिश्ते की लाज पाक साफ़ मन

से रखना...
ज़ख़्म यह पांव का,जिस मे आज भी है वो गहरा कांच चुभा...ज़ख़्म से रोज़ लहू बहाते है,गलती से

भर ना जाए इस का पूरा ख्याल रखते है..यह ज़ख़्म दिया भी तूने,अपनी बेवफाई से..असर पहले दिन

ही दिखा दिया तेरी बेवफाई ने...लफ्ज़ो को घुमा घुमा कर कहना,खुल के पूरी बात ना कहना..पहले

समझे हम इस को तेरी मासूम  अदा,अब लगा कि यह तो है मुझ को दगा देने की वजह..मासूम  तो ढहरे

 हम यारा ,कि जो दिखा पहली बार हमे उसी को क्यों सच माना ....
लिखते जा रहे है बरसो से,इश्के-दास्तां अपनी...शायद सदियों पुरानी है मुहब्बत यह अपनी..जन्म पे

जन्म लेने होंगे,तुझ को सही से समझने के लिए..दिल जो तेरा डरता है,उस को मजबूत बनाने के लिए..

सूरत बेशक किसी की ले ले,हम तो रूह की खुशबू से तुझ को सदियों से पहचानते आए है..दगा देना

बेशक तेरी फितरत हो,मगर हम तो खुदा से पाक मुहब्बत मांग कर लाए है..लौटना तो होगा तुझे ,क्यों कि

जन्म तो सारे तेरे नाम से ले कर आए है..

Thursday, 6 June 2019

बटोर रहे है  हर रोज़ जीवन की,छोटी छोटी खुशियाँ..जिन का ना वास्ता है सिक्को से,ना ज़माने के

रिवाज़ो से...पूरा कर रहे है दबी हसरतें,अरमानो को दे कर खुली हवा..हा..चुनौती भी दे रहे है खुद की

रूहे-आवाज़ को,ना डरना कि दिन तेरा आखिरी कौन सा होगा..यह कागज़ के पन्ने रहे गे गवाही

बन कर,कोई पाप नहीं किया ज़िंदा रह कर..बस कुछ सांसे अपनी मर्ज़ी से लेने का हक़,खुद को दिया

हम ने..कि घुटन से दम घुटने लगा था अब तो...
दौलत के ख़ज़ाने हो या ऐशो-आराम का मसला...हम तो बस महकते रहे,ज़िंदगी के अहसान तले..

छोटी छोटी खुशियों मे जीते रहे,शिकायते किसी को ना देते हुए...बरखा मे हसते हसते बिना वजह

भीगते ही रहे..कहता है कोई तो कहता रहे,दीवाने है हम..ज़िंदगी जब तल्क दे रही है भरोसा,जिए

गे हम..कल कौन जाने कौन सा गम बदल दे दुनियाँ  अपनी..तब होंगे ...इस पार या उस पार,.
ज़िंदगी जीने का यह तेरा अंदाज़,जैसे हो बेरुखी का कोई भटका पैगाम..धक् धक् दिल तो कभी करता

ही नहीं,लगता है जैसे रेगिस्तान की कोई मधुशाला हो....रेत ही रेत बिखरी है तेरे इस रेगिस्तान मे,

लगता है किसी सावन ने तुझे संवारा ही नहीं..अगर संवारा होता तो रेगिस्तान मे रेत के टीले ना होते,

धड़कनो के तार बजाने के लिए,गरज़ के बारिश के छींटे ना पड़ते...

Wednesday, 5 June 2019

प्रेम शुद्ध है कितना,गहराई है इस मे कितनी.मासूम से दिखते कुछ चेहरे,सुनहरे सपनो की छाँव मे

ले जाने का वादा करते कुछ अपने..प्रेम से लबालब भरने का वो प्याला कहने वाले,आंच से दूर रखने

की दुहाई देने वाले...धयान से परखा,खोट है प्रेम की दुहाई मे..कोई यहाँ राधा नहीं,कृष्ण भला कहा

होगा..शुद्धता देने के लिए,सोने की तरह जलती आग मे तपना होगा...
बगीचों के माली अक्सर लोग बदल लिया करते है...फूल हमेशा खिले रहे,लोग तो अमूमन खाद ही

बदल दिया करते है..ओस की बूंदे गिरती रहती है,इन की खुशगवारी के लिए...और यह भी महकते

रहते है हज़ारो हसरतो के तले...सच तो यही है,बहकावे मे फूलो के आ कर माली ज़ार ज़ार रोया करता

है...जिसे सींचा रूह की शिद्दत से,वो क्यों माली को मलबे मे धकेल दिया करता है...
छोटी सी बातो पे अक्सर सुबक कर रोने वाले.. इस दिल को आज खुद से जुदा करना पड़ा...जो समझ

ना पाए खुद के ही इशारे,उस नाचीज़ को अंदर किसी तहखाने मे गहराई तक छुपा दिया...फैसलों को

फिर दुबारा खुद से ना ले सके,धमका कर जलती आग मे झुलसा दिया...दिमाग की हमेशा सुनने के

लिए,इसी को खुद से जोड़ लिया...

Sunday, 2 June 2019

फिर आज भभका मन का यह आशियाना..फिर कही से बरसा इन आँखों का सावन..झड़ी लगी है

इन आंसुओ की आज..किसी के रोके ना रुके गी यह बरसात...गुजरा गहरा तूफान फिर से क्यों आज

दिख गया..टुकर टुकर आसमां को हसरतो से देखना क्यों याद आ गया..बिलख बिलख कर ना रोये

इस डर से मन के आशियाने को फिर से समझा दिया...
दोस्तों...मेरी हर रचना को पसंद करने के लिए आप  सभी का तहे-दिल से शुक्रिया...इस शायरा को,हौसला-आफ़जाई करते रहे,ताकि मैं बेहतर और बेहतर लफ्ज़ो को आप के लिए लिख सकू..शुक्रिया..शुक्रिया और शुक्रिया..आभार..
साज़िशों की दुनिया,रिश्तो का धोखा और रोज़ बदलते साथी..मुहब्बत के नाम पे वफाओ को झुलसाती

नफरतो की कहानी..अक्स किस को किस मे नज़र आया,दीवानो की तरह मुहब्बत कौन कर पाया...

तू समा जा मुझ मे,मैं तेरी रज़ा बन जाऊ..फासला भले मीलो का हो,मगर दूरी मुहब्बत को नज़र ना

आए..टूट के यहाँ कौन किस के प्यार को निभाता है,दौलत पाने के लिए जज्बी-मुहब्बत से कोसो दूर

हो जाता है..
दूर तल्क़ मन था जाने का,सो फूलो के शहर निकल गए..रूह मे थी हलचल,खुशबू के एहसास भर से

महक रहे थे अंदर ही अंदर..नज़ारो का वो मेला होगा कैसा,सिहर रहे थे अंदर ही अंदर..कुछ खिल रहे

थे अरमान इस दिल के तहखाने मे,कभी डर भी रहे थे फूलो के आने वाले आशियाने से...ओह,यह नज़र

का फेर है या धोखा,हम खड़े थे फूलो के मलबे मे..शायद मुहब्बत को पैरो तले इतना बर्बाद किया होगा

यह मलबा गवाही है उस ज़ख्मे-दास्ता का..लौट रहे है अपने ही गरीब-खाने मे,जहा सिर्फ एक फूल

को ही संवार रहे है,ओस की बूंदो से...
रेखाएं ही रेखाएं है..कोई सरल नहीं,कुछ टेढ़ी कुछ मेढ़ी,कुछ जिंदगी को उलझा देने वाली..ढूंढ रहे है

इस मे कहां बसी है जीवन-रेखा..फिर बहुत कुछ सोच कर शिद्दत से अपने खुदा को याद किया,झुक

गए उस के सज़दे मे...पलके भीगी तो इतनी भीगी कि आंखे खोली जो इन को सूखाने के लिए,अपनी

लक्ष्मण-रेखा को गिरा पाया..सामने था अपने खुदा का दरबार,मुद्ददत बाद उस को सामने पाया..ओह,

मेरे खुदा इस दिल को अब करार आया,अब हर रेखा को सरल ही सरल पाया..

Saturday, 1 June 2019

दिन भी वही है,शाम भी वैसी ही है..रात भी वही होगी...दिल को जो आज सकून है,उस के लिए

ईश्वर को शुक्राना देने इन्ही पन्नो पे उतर आए है..फूल तो आज भी खिले है रोज़ की तरह,कलियाँ

भी मुस्कुराई है पहले की तरह...पर हम को जो सकून उस मालिक ने दिया,उसी के कर्ज़दार बन कर

इन्ही पन्नो पे उतर आए है..ना भूले कभी उस की रहमतों को अनजाने मे,इसीलिए इन पन्नो पे

शुक़राने की मोहर लगाने आए है...

                                    ''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ'' सरगोशियां--जहां लिखे प्यार,प्रेम के शब्द,आप को अपने से ...