Wednesday, 30 September 2020

 भोले भाले वो नैना..उस के दिल के आर-पार हो गए..वो भोले थे इसलिए ही तो उस की खास पसंद बन 


गए..जब वो झुकते तो दिल उस का चीर जाते..जो उठते तो उसी पे ही क़यामत ढा जाते...एक दिन पूछा 


उस ने भोले नैनो वाली से,कौन दे देस से आई हो जो इतनी भोली सूरत और भोले नैना संग लाई हो..इक 


जवाब उस का काफी था...यह उस देस की माटी से पाए है,जहां धर्म बिकता नहीं..दिल मे बैर पलता नहीं..


अब समझने की बारी उस की थी..शीश झुका अब उस के देस के आगे,जहां से यह अपने दो भोले नैनो 


को लाई थी...

 वो बहुत छोटी सी थी...हां..कद-काठी मे..गुणवान थी उच्च-कोटि मे..प्यारी सी मुस्कराहट और प्यारा सा 


दिल...बहुत कुछ था उस मे,जो सीखा जा सकता था..पर यह दुनियां उस को कितने अजीब नामो से 


पुकारा करती थी...तुम कुछ नहीं कर पाओ गी जीवन मे,तानों से सज़ा देती थी..वो माँ की गोद मे छुप 


के बहुत ही रोया करती थी..माँ की सीख,''जिस दिन तू आसमां का छोर छू ले गी,यह पगले सारे चुप 


हो जाए गे''..अब वो ताने अनसुने कर देती थी...वक़्त की छाया गुजरी..अब वो ऊँची गद्दी पे बैठी है..


वही लोग जो उस को ताने देते थे,आज उसी के कदमो मे सर झुकाया करते है...

Tuesday, 29 September 2020

 सोने सा उज्जवल मन  मिला और चांदी सी शुद्ध देह मिली...दिल को सकून की इक धड़कन मिली..


भोर की पहली किरण जब मुस्कुराते हुए हम-तुम से मिली..क्या खूब यह ज़िंदगी मिली...कोई शिकवा 


किसी से भी नहीं..खुद मे मस्त यह ज़िंदगी उस की दया से खिलखिलाती रही..कभी तो उस पे यकीन 


कर..कभी तो अपनी मेहनत को जनून का हिसाब दे..किसी और के हिस्से का क्या करना...जो होगा 


खुद का वो खुद ही चल कर आ जाता है..यू बात-बात पे रोता है तो जो मिला है वो भी चला जाता है...

 महकती चहकती इस सुबह ने बताया...बहुत कुछ खो कर जो पाया वही तो अपना है...कितना कुछ 


गवा दिया फिर कुछ हासिल किया..यक़ीनन वो सब ही तो अब अपना है...रंजिशे छोड़ी तो अपनापन 


पाया,सच कहे तो वो अब सच मे अपना कहलाया...हाथ कंगन को आरसी क्या...जो बोया वही काटा..


फिर किस बात पे रोया...मेहनत से,सेवा से जो मिल पाया..हां आज वो ही सब अपना है...सेवा मे गर 


अपना स्वार्थ दिखाया तो याद रख..कुछ भी ना पाया...

 साजन बोले..यह इंद्रधनुष बहुत मनमोहक है..सात रंगो का मेल और अनोखी छाया से भरा है..छटा है 


निराली,ऐसा लगता है प्रेम के हज़ारो रंगो से भरा-पूरा है...देखे तो बस देखते ही रहे..मगर यह तो जाने 


वाला है..बरखा के जाते ही यह ग़ुम हो जाए गा...हम बोले...इस को जाना तो है पर यह हम को क्या 


सिखा के जाने वाला है...सोचिए जरा..गर ऐसे ही रंग सुहाने हम दूजो के जीवन मे भरे तो हम इंद्रधनुष 


को कहां जाने दे गे..जैसे यह हम को जीवन सिखा गया..वैसे ही हम दूजो को जीवन सिखा ग़ुम हो जाए गे 

Monday, 28 September 2020

 दूर बहुत दूर तक फैली है दुआओं की खूबसूरत नगरी..किस को चुने और किस को संभाले..किस को 


लगाए गले तो किस दुआ को रूह से जोड़े...आदतन अपनी....मुस्कुरा दिए इतनी दुआओं के सुन्दर  


मेले मे...क्या यह सब हमारी है...क्या यह हमारी ज़िंदगी की धरोहर है...किसी ने अंदर से आवाज़ दी,


हां यह सब तेरी ही तो है..मगर तब तक जब तक,तेरे दिल का आईना साफ़ है..जिस दिन गरूर की 


छवि इन पे छा जाए गी..जिस दिन सिक्को की चमक तुझ पे हावी हो जाए गी..यह लुप्त हो जाए गी..

 यही कही हू आस-पास तेरे फिर जीवन तेरा सूना क्यों है..खिलखिलाती हंसी है मेरी चारों तरफ तो तेरे 


मन मे क्यों अँधेरा है...दर्द-दुखों का भंडार तो मेरे पास भी है फिर भी जीना हंस के है..यही तो तुझ को 


भी सिखाना है...ज़िंदगी तो हर रोज़ इक नया गम सामने रख देती है..उस से निकलना है कैसे,यही 


खूबसूरत अंदाज़ ही तो तुझे सिखाना है...मर मर के जीना भी कोई जीना है..कफ़न सर पे बांध कि 


मौत का आ जाना एक इत्तेफाक इक मौसम का खेला है..जब तक है यह साँसे,खुल के जी..ना इस के 


लिए ना उस के लिए..जी सिर्फ अपनी ख़ुशी के लिए...सब कर भी भी सब ने शिकायतों का थैला ही 


पकड़ा देना है..बस उतना कर जितना तेरे लिए मुनासिब है..मुस्कुरा दे अरे पगले,क्या पता यह सांस 


आखिरी और अंतिम बेला है...

 भोले भाले वो नैना..उस के दिल के आर-पार हो गए..वो भोले थे इसलिए ही तो उस की खास पसंद बन  गए..जब वो झुकते तो दिल उस का चीर जाते..जो उठते तो उ...