Wednesday, 20 June 2018

बहुत ही ख़ामोशी से उस ने अपनी ख्वाईशो का जिक्र किया हम से....कही कोई और ना सुन ले,परदे मे

ही रहने का इकरार किया  हम से ....एक एक  ख्वाईश जैसे बरसो पुरानी थी,जुबाँ मे जैसे लरजती हुई 

कोई कहानी थी...यू लगा जैसे रिश्ता सदियों का था,जिक्र ख्वाईशो का भी जाना जाना सा था....अश्क

थे कि बहते रहे सैलाब की तरह,वो रोते रहे किसी तड़पती रूह की तरह...गले लगे तो अलग हो नहीं पाए

लब थरथराए और जवाबो का हिसाब ले गए हम से....

Tuesday, 19 June 2018

मेरी सलामती चाहने के लिए,उस के पास कोई वजह ना थी...इकरार के धागो को बांधने के लिए,कोई

मजबूत डोरी साथ ना थी....शब्दों को जानने के लिए,दिल मे दूर दूर तक कोई जगह ही ना थी....कही

दूर आसमां तक परिंदो के उड़ जाने की कोई खबर ना थी....वो पत्थर दिल रहा या बेजान कोई पुतला

कि मेरी भावनाओ की कोई उस को कद्र ना थी...अक्सर पूछ लेते है मेरे मालिक,इस को दुनिया मे

भेजने की क्या कोई और वजह भी थी....

Monday, 18 June 2018

समंदर की लहरों मे वो तेरे पांवो का भिगोना...खिलखिला कर तेरा वो हस देना,क़यामत बन कर

मेरे दिलो-दिमाग पर छा जाना...पानी की बौछारों मे मुझ को भी भिगो देना...अल्हड़पन तेरा,ऐसी

 मासूम अदा..जो भी देखे हो जाए फ़िदा...नज़ाकत से भरी,फूलो सी खिली...कौन हो तुम...ज़न्नत की

परी या खुदा की तराशी कोई संगेमरमर की कला....ख्वाईशो की जरुरत होगी कहाँ,तुझ को देखा और

दिल ने कहा सज़दा करना तेरा,है तेरी जगह....
वफ़ा के नाम पे हज़ारो बाते करने वाले,क्यों अचानक बेवफा हो गए....पाक मुहब्बत की दुहाई देते

देते खुद ही मुहब्बत के नाम से दूर हो गए....आज़मा लेना कभी भी फुर्सत मे,हमारे नेक जज्बातो

को....धुआँ धुआँ ना होगा रिश्ता कभी ,कि दुनिया बहुत देख चुके बेवफा इंसानो की....बेबाक लफ्ज़ो

के मालिक होते होते क्यों इतने खामोश हो गए....यही खामोशिया कभी कभी डस भी लेती है,डर डर

के बात करने वाले,अचानक से क्यों ग़ुम हो गए.... 

Sunday, 17 June 2018

मुकम्मल तो नहीं ज़िंदगी लेकिन अधूरापन कही भी नहीं....हर दुआ कबूल रही हो,ऐसा नहीं हुआ पर

कोई बददुआ साथ हो ऐसा भी नहीं रहा....दौलत के ख़ज़ाने भरे हो हर वक़्त,हर जगह...यह तो हुआ

नहीं,पर कोई कमी ज़िंदगी मे रही ऐसा भी कभी हुआ नहीं....कोई दर से मेरे ख़ाली गया,किसी की दुआ

से यह मन रचा बसा रहा...यह कमाल सिर्फ उस कुदरत का है,जिस के हाथ यह मेरा जीवन रहा...

Thursday, 14 June 2018

 ऐसा चेहरा जो मासूम था किसी फूल की तरह....नहीं था काजल आँखों मे,फिर भी सुरमई जादू था

किसी को खुद की तरफ खींच लेने के लिए....पलके झुकी ऐसा लगा दिन कैसे रात मे यू ढल गया ...

जुल्फे खुली तो शामियाना बादलों का जैसे बन गया....कैसे छुए हिम्मत नहीं सादगी का रूप है...

सर झुका बस सज़दा किया,नज़र उतार दी दूर से और अदब से उस मालिक को शुक्रिया कहा....



Wednesday, 13 June 2018

कहानी राजा रानी की सुनाते तो सुन लेते....कहानी परियो की बताते तो सुन लेते....अपने ज़ख्मो

का गहरा दर्द बयां करते तो दिल थाम के सब सुन जाते....किसी ने बेवजह सताया होता तो कसम

तेरी,आसमां सर पे उठा लेते....किसी दौराहे पे किसी एक को चुनना होता तो साफ़ नीयत से राह

बता देते...मगर अपनी किस्मत के लिए इलज़ाम खुदा को दे कर,उस पे तोहमत ना लगाते...जा

छोड़ दिया तुझे तेरे ही हाल पे,खुदा के अपमान के लिए हम अब तुझे माफ़ नहीं करते....