Tuesday, 29 May 2018

आज यादो के ख़ज़ाने को टटोला तो इक नायाब सा तोहफा पाया..वो लम्हे जो साथ गुजारे थे कभी,

उन को रूह मे आज भी समाया पाया.... खिलखिलाती झरनो की तरह वो हसी,मै रुठु तू मनाए...

मै बहकू तू संभाले,मेरे नाज़ उठाने के लिए तेरा मुझे यूँ आगोश मे लेना...कोई देखे या ना देखे,इस

खौफ से परे रहना...ज़िंदगी के साथ यह लम्हे आज भी है,पर यादो को याद करना..वो तोहफा किसी

ज़न्नत से कम तो ना है...

Monday, 28 May 2018

तू टूट के चाह मुझ को,यह शर्त मैंने कभी रखी ही नहीं...मेरे सिवा तू किसी और का हो,इस बंदिश के

तले तुझे कभी बांधा भी तो नहीं..रिश्ते मे मुझे अपना बना,यह सवाल पहले ही दिन से कभी उठाया ही

नहीं...दौलत के ख़ज़ाने बस मुझ पे लुटा,इस के माक़िफ़ कोई ख्याल मेरे ज़ेहन मे कभी आया तक भी

नहीं...हा.. बस अपनी पाक मुहब्बत से मेरी रूह को रंग दे,इस के सिवा और कुछ तुझ से चाहा ही नहीं...

Sunday, 27 May 2018

आ चाँद को धरती पे उतार लाए हम...जो जितना दिल मे रहा,उस सब को दुआओ मे बदल जाए हम...

तारे चाँद को कभी छू नहीं पाते मगर उस को देखने के लिए रात भर नज़र रखते है वो...दिल के अंधेरे

उजाले कभी दिखते नहीं मगर,दिल से दिल जुड़े हो जहां धडकनो को बुलाया करते है वहाँ...कुछ मेरी

सुनो कुछ हम तेरी सुने,आ इसी चाँद को अपने आशियाने मे उतार लाए ज़रा ....
ताउम्र इंतज़ार करे गे तेरे लौट आने का...उसी घर को आबाद करे गे तेरे कदमो के चले आने का...

हर दीवार सजे गी,हर दरवाज़ा दस्तक दे गा तेरे साथ के आ जाने का....फूल महके गे,कलियाँ

गुनगुनाएं गी..बेसाख्ता एक हसी की लहर लौट आए गी तेरे आने से...करिश्मे होते है ऐसा सुना है

मैंने,करिश्मो को देखना है अपनी ज़िंदगी के होते होते...बुझ जाए वो उम्मीद नहीं होती,छोटी सी

चिंगारी से दीया जल जाए,वो हो जाए गा तेरे आने से....

Saturday, 26 May 2018

पलके जो भीगी तो बस भीगती चली गई...एक अनजान रास्ते पे चलते चलते,यह पाँव लहू-लुहान

होते चले गए....खुद को कोसा तो इतना कोसा कि पाँव के छालों को नज़र अंदाज़ करते चले गए ....

क्यों नहीं तेरा साथ देने के लिए,तेरे  हमकदम ना हो सके....क्यों नहीं वादों को निभाने के लिए,तेरे

इशारे ना समझ सके...दम भरते है तेरी मुहब्बत का लेकिन,क्यों इन खुली आँखों से तेरी सूरत भी

ना पढ़ सके...ज़ार ज़ार रोती है यह आंखे मगर,तेरी तलाश मे भटके तो आज तक भटकते ही चले गए 

Friday, 25 May 2018

क्षितिज के उस पार समंदर को देखा....ठहरा ठहरा  सकून से भरा भरा....लहरों ने कितना सताया

उस को,हद से जयदा उत्पात मचाया कितना...मौसम की वो तूफानी गर्मी,तूफ़ानो की कितनी

भारी हलचल...कभी चाँद ने रात भर सींचा उस को कभी सूरज ने किरणों को बरसाया उस पर...

फिर इक लम्हा आया ऐसा,थक कर टूटे बारी बारी...पर समंदर फिर भी वैसा...ठहरा ठहरा..उसी

सकून का राजा राजा...

Thursday, 24 May 2018

किस रंग मे रंगी हो,जो इतनी भली सी लगती हो...किस रूप मे ढली हो,जो अलग सी दिखती हो...

इस लहजे को मुबारकबाद कहू या इन्ही लफ्ज़ो पे फ़िदा हो जाऊ....निखारा है रूप किस ज़न्नत की

परी ने आ कर,या खुदा ने फुर्सत से बनाया है तुम को....कोई नाज़ नहीं कोई नखरा भी नहीं,शर्म से

झुकती यह आंखे कह रही है बाते कई....जवाब बस एक रहा....तेरे प्यार ने निखारा है मुझ को,तेरे

मुबारकबाद से हर रंग सजा है मुझ पर...अब यह ना कहो कि रब ने फुर्सत से बनाया है तुम को...
खूबसूरत ना सही खूबसीरत तो है...इश्क भले ना सही मगर नफरत के निशाँ भी तो नहीं...दिल के

जज्बात समझने के लायक ना सही,पर साफ़ दिल के मालिक ही सही...शातिर दुनिया से निपटने के

लिए कही कोई गलत मंशा ही नहीं,मगर यही दुनिया तुझ को दीवाना कह दे यह सुनना मुझे कतई

माक़िफ़ ही नहीं...तुझे प्यार करने के लिए तेरी सूरत को नहीं चुना मैंने,एक पाक मुहब्बत है रूह मे

दाखिल तेरे...बस यही सोच कर तेरे दिल के दरवाजे पे दस्तक दी है मैंने......

Wednesday, 23 May 2018

सवाल सवाल एक और सवाल.....बस कीजिये मेरे मुर्शिद..सवालो पे सवाल उठाने के लिए....माना कि

तेरे कदमो के तले है दुनिया मेरी...माना कि तेरे साथ से दुनिया आबाद भी है मेरी...यह भी माना कि

गर तू नहीं तो कोई इस दुनिया मे मेरा होगा भी नहीं...मेरे नाज़ उठाने के लिए फिर जनम कोई लेगा

भी नहीं....कितनी खूबियाँ है तुझ मे,यह बताना लाज़मी तो नहीं...पर ना उठा सवाल पे सवाल कि अब

तेरे बिना मेरा गुजारा कही भी तो नहीं...
गवाही दे रहे है आज भी वो नज़ारे,तेरे संग बिताए हसीन लम्हे उन्ही हसीन वादियों के लिए...फुर्सत

मिले तो लौट आना मेरे गेसुओं मे वोहि कातिल शाम गुज़ारने के लिए...खामोश लबो पे वो अफ़साने

बार बार दोहराया नहीं करते...ज़िंदगी जो मिले कभी दुबारा उस को यू जाया नहीं करते...गुजारिश है

तुझ से आज भी,वो तेरे साथ के लम्हे फिर से लौटा दे मुझे...गवाही देने के लिए यह दिल बेचैन है,तुझे

नज़दीक से देखने के लिए....

Thursday, 17 May 2018

अश्को को दफना दिया दिल के दरीचे मे इस कदर कि दुनिया सिर्फ चमक देखे इन आँखों के तहत .....

यादो को समेटा फिर से इन पन्नो के तले कि तेज़ अँधियाँ ना उड़ा ले कोई इन की परत...खुल के

मुस्कुरा दिए ऐसे कि ना पढ़ पाए कोई इस चेहरे की कोई शिकन....थक गए है कितना वक़्त की इन

बदगुमानियों से फिर भी जज्बात बिखरते है उन की शानो-शौकत मे...लब अचानक से थरथराते है

मगर यह अल्फ़ाज़ है कि जुबाँ से आगे निकलते ही नहीं...

Tuesday, 15 May 2018

मौसम की तरह जो बदलना होता तो कोई वादा ना करते....यह जो सुबह आई है,उस की बदौलत

अपनी नाकामयाबियों का खुले - आम तुझ से कभी इज़हार भी ना करते....मुहब्बत जो दबे पांव

दस्तक दे जाती है,जब तक समझ आती है तब तल्क़ खुद को सपुर्दे यार कर जाती है....खुद को खुद

से बेगाना करने के लिए कभी कभी अपने ही दिल के आर पार हो जाती है.....यह कौन सी शै है,जो

शीशे की तरह दिल मे उतरती तो है,पर ज़िंदगी को अपने आप से बस जुदा ही कर जाती है....

Monday, 14 May 2018

यह कौन सी ख़ुशी है,जिस ने आज ज़िंदगी के नाज़ उठाने पे मजबूर कर दिया....यह कैसा एहसास

हुआ है,जिस ने मुस्कुराने का हक़ दे दिया....टूटन होती है क्या,दर्द होता है कहाँ..बात बात पे आँखों

को भिगोने वाली उन काली रातो को हमारे जीवन से बस दूर कर दिया.....तारे टिमटिमाते है रोज़

चाँद भी हर रात निकलता था,क्यों आज इसी चाँद मे हम को नायाब प्यार मिल गया....पूछ रहे है

खुद से बार बार,क्या हुआ आज ऐसा,कि इस ज़िंदगी से प्यार हो गया....

Saturday, 12 May 2018

जिस को देखने के लिए यह निगाह आज भी तरसे,जिस के साथ जीने के लिए ज़िंदगी आज भी मचले

जनम देने वाली वो मूरत,घर आंगन मे बसी इक और माँ की सूरत...फर्क दोनों मे कुछ नहीं रहा...

जिस को नमन किया वो भी माँ है,जिस के साथ कुछ साथ जिया...वो भी तो माँ है ...माँ सिर्फ माँ है

शब्दों का कोई खेल नहीं...माँ को समझने के लिए किताबो का ज्ञान जरुरी भी नहीं...जो छोटी सी ख़ुशी

मे दुआ दे जाए,जो आंसू भी मिले तो भी ज़न्नत बरसा जाए...दुआ का सागर सिर्फ माँ ही होती है,दर्द

से भरी भी हो, तो भी रूह अपनी से  औलादो के लिए भगवान् से भी भिड़ जाती है...माँ....तुझे प्रणाम.....

Wednesday, 9 May 2018

ना कीजिये नज़रो से यह शरारती गुस्ताखियाँ,दिल हमारा मचलने पे आमादा हो जाए गा...दूर रह

कर बात कीजिए,खलल मत डालिये अपनी गुफ्तगू से हमारे सवालिया गेसुओं पे....यह जो बिखरे

तो रात गहरा जाए गी,हमारी पलकों के शामियाने पे कितने सवाल उठा जाए गी..इन नरम कलाइओ

को ना मजबूर कीजिए खुद की बाहों मे आने के लिए,सोच लीजिए यह जिस्म यह जान फ़ना हो जाने

पे आमादा हो जाए गा....

हर दौड़ ज़िंदगी की आसान नहीं होती...कितनी मशक्कत के बाद कोई एक राह ही सफल होती है 

हज़ारो दिए बुझते है वक़्त की हवाओ मे,रात भर जगते है गर्म फिजाओ मे....ना चाहते हुए भी लब

बेवजह मुस्कुरा देते है....इक नन्ही सी आरज़ू के साथ,हज़ारो सपने जुड़े होते है...कभी कभी अकेले

यह ज़िंदगी दूर कही बहुत दूर निकल जाती है....सोचते सोचते उम्र भी निकल जाती है....हिम्मत का

साथ ना छूटे कही,कि यह दौड़ ज़िंदगी की बड़ी मुश्किल पकड़ मे आती है....

Tuesday, 8 May 2018

क्या कुछ ऐसा था जो मुझे सुनाई नहीं दिया...कुछ ऐसा अनदेखा जो इन आँखों से छुप सा गया...

क्या कहा उस ने कुछ खास ऐसा,जो मैंने सुन कर भी अनसुना करा....धक् धक् धड़कनो की वो आवाज़

जो मेरे दिल तक पहुंचते पहुंचते रुक क्यों गई....नज़र अचनाक उस की ऐसे भर आई,पर मेरी नज़र 

कही और थम क्यों गई....बेसाख्ता उडी इश्क की वो आँधी,मेरे हुस्न को मुझ से चुरा कर उस की और 

क्यों ले चली...

Sunday, 6 May 2018

बहुत आहिस्ता से,बहुत धीमे से...कुछ उस ने कहा...मुनासिब तो नहीं तेरे संग जीना..पर मुमकिन

तो है तेरी बातो मे घिरे रहना...नरम होठो से कुछ अल्फ़ाज़ मुहब्बत के कहना और फिर खुद ही खुद

मे सिमट जाना....पलकों की चिलमन मे हज़ारो बातो को छुपा लेना..कभी यूं ही शरमा के मेरी गिरफ्त

से खुद को जुदा करना..कच्ची उम्र का यह खूबसूरत मोड़ है कैसा,जहा बहुत धीमे से जो उस ने कहा

मेरे इस नन्हे से दिल ने उस नगीने को वफ़ा का नाम दिया...

                                    ''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ'' सरगोशियां--जहां लिखे प्यार,प्रेम के शब्द,आप को अपने से ...