Sunday, 29 April 2018

इन पन्नो पे कितना लिखा मैंने कि हिसाब अब खुद के पास भी नहीं...कभी चुराए ख़ुशी के लम्हे

कभी दर्द को दिल से थाम लिया...हॅसते हॅसते हज़ारो बार यह नैना मेरे छलक गए,कभी अधूरी आस

लिए यह पलकों को बस भिगो गए....जनून लफ्ज़ो का कैसा है कि रात दर रात कलम चलाते ही रहे

कभी लिखा कही कुछ ऐसा कि बंद दरवाजे भी काँप गए...लिखना है कब तक,नहीं जानती  वक़्त की

धार,एक पन्ना बचा कर रखा है खास......जहा होगा सिर्फ मेरा आखिरी पैगाम .....

हर बात को हवा मे उड़ा देना,तेरे बताए रास्ते पे चलने की हिम्मत रखना....कब से अपनी आदत मे शुमार

कर लिया हम ने ....खुल के हर बात पे हंस देना,किसी ने क्या कहा,और हम ने क्या सुना....सोच से भी

परे नकार दिया हम ने....डर के जीना भी कोई जीना है,दुनिया से मिले तो यह खास राज़ उन्ही से जाना

हम ने...तेरी कही हर बात आज सही वक़्त पे,सही तरीके से सामने आई है....तेरे उसी वादे से बंधे हर उस

धर्म को निभाए गे,जो मेरे तेरे रिश्ते के नाम से ऐसी धर्म से टकराए गे .....

Thursday, 26 April 2018

ख्वाईशो के इस जहान मे,हर वक़्त कुछ नया पा लेने की चाहत मे....आज तेरी तलाश है,कल किसी

और का साथ होगा,क्या ज़िंदगी सिर्फ इसी का नाम है.....टुकड़े दिल के कभी इस के किए,दिल को दर्द

दे कर आंसू कभी किसी और को दिए.....ज़िल्लते दे कर फिर खुद से दामन खींच लिया....खुदा के नाम

से मुहब्बत का कभी सौदा किया....क्या मायने प्यार के सिर्फ इतने ही है....मुहब्बत के पाकीजा अल्फाज

गिनती के नाम है,मगर मिलते जरूर है तभी तो इस जहान मे मुहब्बत सांस आज भी लेती है....

Wednesday, 25 April 2018

आप खास है या आम,इस सवाल का जवाब दिल ने कभी बताया ही नहीं...रफ्ता रफ्ता चलती जा

रही यह ज़िंदगी,इस अहम् सवाल से दूर इस का ख्याल कभी आया ही नहीं....कभी मशगूल रहे तो

कभी बेबस रहे,नज़दीकियों के चलते किसी बात का धयान इस तरफ आया ही नहीं...अपने आस पास

किसी ने हम मे क्या देखा,क्या सोचा...इस से बेखबर किसी और का वज़ूद कभी सोचा भी नहीं...अब

ज़िंदगी के उस मोड़ पर है,जहा काम के सिवाए कुछ और सोचा भी नहीं....
सुबह कितनी ही आती है....सुबह कितनी ही आए गी....जो निकल रही दुआ आज इस मन से,वो

ना जाने फिर कब मन से आए गी....आंख खुली तो सब से पहले अपने उस मालिक को देखा..जिस

ने बनाई हर सुबह और रात को ढलते देखा....चरण छुए तो सब से पहले एक खास दुआ इस मन से

निकली,तूने जाना है उस मंज़िल तक.....जहा ख़्वाब होता है सब का.....इस दिल की अब एक ही आस

तू जल्दी पहुंचे उस मंज़िल तक..मेरी इन साँसों के जाने से भी पहले...बस निकल रही,एक दुआ,तेरी

मंज़िल सब से आगे.....सब से आगे....
एक मामूली सी हस्ती को,किसी ने आसमां पे बिठा दिया....पथरीली राहो से उठा कर,साफ़ रास्ता

दिखा दिया....सीधा सादा सा एक जीवन,ना कोई ताम ना कोई झाम....इबादत मे जो बीत गया

वोहि सुबह तो बस वोहि है शाम....दुनिया क्या कहती है,क्या सुनती है...इन से दूर बहुत ही दूर .

अपनी मस्ती मे जी रहे अपनी किस्मत का हर पैगाम....ना शिकायत ना कोई शिकवा,ना रूठने का

अब कोई काम...फिर भी एक मामूली हस्ती,जिसे बनाया किसी ने खास.....

Monday, 23 April 2018

अपने आशियाने मे तेरी यादो को समेटा और सांसे लेने के लिए खुली हवा मे आ गए....क्यों दिल ने

फिर झकझोरा और तेरी तलाश मे नए आशियाने मे बसर गए....यह कैसा असर है तेरे वज़ूद का, जहा

भी जाते है तेरी तस्वीर मे तुझी को पा जाते है.....बाते तुझ से हज़ारो कर के,अपने दिल का हाल बताते

है....क्या कहे यह बात तुम से हज़ारो बार कि तेरे बिना हर सवाल अधूरा है तेरे जवाब के बगैर....खशबू

आज भी मेरे जिस्म से तेरी ही आती है,दिल जितनी बार धड़कता है उस मे आवाज़ तेरे ही दिल की

आती है....
सितारों के झुरमुट मे एक सितारा ऐसा देखा...चमक उस की मे कुछ खास नज़ारा देखा....देखते

देखते रात गुजर गई कैसे,किस अंदाज़ से उस का रूप निहारा हम ने....यह जानते हुए भी कि बात

हमारी वो ना समझ पाए गा,पर पैगाम हमारा मेहबूब तक पंहुचा दे गा इस यकीं से गुफ्तगू का सहारा

लिया हम ने....गुजारिश करे या मिन्नतें उस की,कि उस सितारे को हम ने खूबसूरत सा नाम दे कर

खास सलामे-अर्ज किया हम ने.....
यू ही तो नहीं कहते कि मुहब्बत बेजुबान होती है...जो आँखों के एक इशारे से दिल मे उतर जाए,वो

ही जुबान का काम कर जाती है....पलकों के शामियाने से जो धडकनों को हिला दे,पलकों को उठा दे

तो दुनिया ही हिला दे....कुछ नहीं कह कर यह बहुत कुछ कह जाती है....समझने वालो के लिए यह

कहर बन कर ज़िंदगी को बखूबी सब जतला जाती है...कुछ ना कह कर जो सब कह जाए,मगर

इलज़ाम खुद पे यह ले जाए कि मुहब्बत बेजुबान होती है....
हर उस नज़र को सलाम करे गे हम ,जो दिल हमारे को जीत जाए गी....नज़र ना लगे हमारे उसूलो

को,जिस के सहारे हम ने अपनी ज़िंदगी को गुजार दिया....दौलत को नहीं,रुतबे को भी नहीं...झूठी शान

को भी हम ने नकार दिया ....सीधा सादा इक मन हमारा,जो खरे सोने जैसे प्यार के लिए तरस गया...

पर उस खरे सोने जैसे प्यार की तलाश मे,जीवन हमारा बस गुजर गया...आज भी ढूंढ रहे है उसी नज़र

को,जिस नज़र के लिए हमारे दिल ने अपनी ज़िंदगी को गुजार दिया....

Friday, 13 April 2018

एक कहानी जो तक़दीर ने मेरे लिए लिखी....एक कहानी जो मैंने अपनी कलम से लिखी....फर्क दोनों

मे सिर्फ रहा इतना,तक़दीर की कहानी के आगे सर हमेशा झुकाया मैंने....लेकिन  जब कलम मेरी ने

लफ्ज़ उतारे पन्नो पर,तो किसी के सर झुकाने की आहट तक ना सुनी...कलम तो कलम ही है,जिस

का काम है लफ्ज़ो पे चलना...आहट सुनने के लिए अब कौन रुके,जब टूटे गी कलम,कहानी खुद ब खुद

रुक जाए गी ....
चाँद की चांदनी की तरह आ तुझ मे सिमट जाए....रहे ना फासला कोई,तेरे ही वज़ूद मे ग़ुम हो जाए...

प्यार की इंतिहा कितनी है,यह सवाल तुम ने कई बार उठाया था....जहा जन्मो के बंधन की कोई सीमा

ना रहे,आसमां के खतम होने का कोई अंदेशा ना रहे....जहा रूहों के मिलन मे कोई ग़ुस्ताख़ नज़र ना

बचे,जब तू मेरे सामने हो,तो कोई पत्ता भी ना हिले....तेरे इक इशारे पे यह सांसे रुकने के लिए तैयार

रहे...अब तू ही बता इसे इंतिहा कहे या तेरे सवाल का जवाब कहे....

उस मुहब्बत का क्या करे,जो तेरे साथ साथ तेरी रूह से मुहब्बत कर बैठी है.....इन नशीली आँखों

को कितना समझाए,जो तेरे लिए अपनी पलकों का आशियाना बनाए बैठी है...चूड़ियों की खनक

जानती है,कि यह इंतज़ार बहुत जल्द खतम होने को है....इन लबो की मुस्कराहट बरक़रार हमेशा

रहने को है....तेरी दुल्हन तेरे लिए क्यों ना सजे,कि मेरे मन के मीत के आने की खबर बस आने को

है....वोही लम्हा,वोही दस्तक,वो तेरे छूने की अदा...तेरी ही दुल्हन अब तेरे लिए बाहें फैलाए बैठी है  ...

Thursday, 12 April 2018

हा .. फिर से तेरे साथ जन्मो जनम साथ रहने का वादा करते है...उन्ही तमाम कमियों के साथ,एक

बार नहीं करोड़ो बार साथ निभाने का वचन देते है....ग़ुरबत भी हो या दौलत के ख़ज़ानों का अंबार

प्यार कहा देखता है इन इशारो का हिसाब....जीने के लिए इक छोटा सा घर,उस मे बसी हो तेरी मेरी

सांसो की महक...सुबह उठू तो तुझे देखु,रात तेरी आगोश मे बसे...तेरी सूरत पे मै जाऊ वारी वारी,और

तू मेरी हसी की इक पहचान रहे...काफी है यह सब हर जनम साथ निभाने के लिए...

Tuesday, 10 April 2018

ज़िंदगी चलती रही,हम भी उस के साथ साथ चलते रहे...वो कभी सुख देती रही,वो कभी दुखो का

रैला भी देती रही...भगवन से सिर्फ इतना कहा..तू जो भी दे...ख़ुशी हो या गम...सब कुछ मंजूर

हमे...उसी के नाम से बहुत कुछ हासिल किया,उसी के आदेश से दुखो मे भी जीवन जी लिया....

हर घडी खुद को यह सन्देश देते रहे,तू जो रुक गया तो ज़िंदगी भी थम जाए गी...हिम्मत का

दामन थाम ले,देखना सारी मुश्किलें भागती नज़र आए गी....
सजा रहे है नन्हे से आशियाने को,इस एहसास के साथ कि मुकम्मल होना है आज भी तेरी उन्ही

हसीन बातो के साथ.... तेरे लिए ही सजना है,तेरे लिए ही सवारना है....वादा जो दिया था तुझ को

कभी,उसी वादे के तहत हौसला-अफजाई से जीना है अभी....तेरे रूठ जाने से आज भी डर लगता है

तेरे लिए अपनी नज़र उतार ले,उन्ही होठो को आज भी वैसे ही मुस्कुराना है....दुनिया से दूर बहुत दूर

हो चुके है हम....तेरे सिवा इतना प्यार कौन लुटाए गा हम पे ,कोई भी नहीं...यह अच्छे से जान चुके है

हम.....

Monday, 9 April 2018

बहुत दूर तक यह नज़र जहा जाती है....तेरी तस्वीर मुझे वहां तक नज़र आती है....फासले ही फासले

और एक लम्बी दूरी...नज़र जब जब भी भर जाती है,उदासी मे नैनो को झर झर भिगो जाती है....फिर

ना कोई सुबह और ना कोई शाम ही नज़र आती है....आंखे जो मूंदे क्यों तेरी तस्वीर साफ़ नज़र आती

है....प्यार कोई खेल नहीं,जन्मो का इक बंधन है.....दुनिया की नज़र मे हम  भले कोरा कागज़ ही सही,

पर तेरे नाम से खुद की दुनिया सतरंगी ही नज़र आती है....

Sunday, 8 April 2018

दुआ...जो ज़िंदगी देती है....दुआ,जो दुखो से निजात दिलाती है....कुदरत के कहर के आगे जो

नतमस्तक होता जाए,जो हर हाल मे खुद को हौसला देता जाए.....टूट टूट कर फिर जीवन को गले

लगाता जाए..... खुद के इरादों को मजबूती से निभाता जाए....रो कर ज़ार ज़ार खुद की हिम्मत को

बढ़ाता जाए,बिन सहारे मुश्किलों को संभालता जाए...मालिक की दया साथ होती है अगर,तो दुआ

भी साथ होती है...यह दुआ ही तो है,जो हर पल,पल पल.....सांसो को चलाती है....

Tuesday, 3 April 2018

बहुत ख़ामोशी है इन हवाओ मे आज,इतनी ख़ामोशी कि धडकनों को सुनाई दे रही है धडकनों की आवाज़ ..

क्यों बेताबी है बादलों मे आज,बिजली की चमक से गूंज रहा यह आसमां कुछ खास.... फूलो ने बिखेरी

है खुशबू कुछ अलग अंदाज़ मे आज....एक हलकी सी परत शर्म की छाई है चांदनी के उस पार....कुछ

समझ से परे है बाते उन की आज...लापरवाही इस दुपट्टे की,संभाले नहीं सँभलती आज...बस सुनाई दे

रही है धडकनों को सिर्फ धडकनों की आवाज़....

Sunday, 1 April 2018

उड़ जाए हवाओ मे,आज यह मन करता है...ना रोके कोई ना टोके कोई,अपनी मर्ज़ी से हर पल को जिए

आज यह मन करता है...टुकड़े टुकड़े अब ना  जिए,बिंदास जिए, खुशहाल रहे....ना अब नफरतें किसी

की सहे,ना जबरदस्ती किसी भी बंधन मे बंधे....फूल बिछाए कोई राहों मे मेरी,मेरे जज्बात समझ मुझे

अब समझे कोई...उदास नहीं,परेशां भी नहीं...मनमर्ज़ी से सब अपनी करे,आज यह मन करता है....

                                    ''सरगोशियां,इक प्रेम ग्रन्थ'' सरगोशियां--जहां लिखे प्यार,प्रेम के शब्द,आप को अपने से ...