Monday, 18 June 2018

वफ़ा के नाम पे हज़ारो बाते करने वाले,क्यों अचानक बेवफा हो गए....पाक मुहब्बत की दुहाई देते

देते खुद ही मुहब्बत के नाम से दूर हो गए....आज़मा लेना कभी भी फुर्सत मे,हमारे नेक जज्बातो

को....धुआँ धुआँ ना होगा रिश्ता कभी ,कि दुनिया बहुत देख चुके बेवफा इंसानो की....बेबाक लफ्ज़ो

के मालिक होते होते क्यों इतने खामोश हो गए....यही खामोशिया कभी कभी डस भी लेती है,डर डर

के बात करने वाले,अचानक से क्यों ग़ुम हो गए....