Tuesday, 21 August 2018

मुकम्मल ना सही ज़िंदगी पर तेरे नाम के साथ ज़िंदा तो है....बहारे अब कभी लौटे या ना लौटे,उन

बहारों के निशाँ आस पास तो है....सितारों के झुरमुट मे एक सितारा ऐसा भी है,जिसे निहारने के लिए

हम रातो को जगा करते है...निहारते निहारते ना जाने कितनी ग़ज़ल तेरे नाम लिखा करते है...हर 

ग़ज़ल तेरे प्यार की मिठास मे डूबी है...तन्हाई भी इसी मिठास मे मचल कर हज़ारो अफ़साने बयां कर

जाती है..बहुत कुछ है अभी लिखने के लिए,तभी तो अब तल्क़ ज़िंदा है...