Monday, 30 July 2018

बदलते बदलते इतना बदल गए कि खुद की ज़िंदगी मे खुद की पहचान ही भूल गए...जरा सी ठेस पे

दिल को दुखा लिया,छोटी छोटी बातो पे खुद को रुला लिया...आँखों की नींद उड़ने पे,खुद को दोष दे

दिया...ज़माना इलज़ाम देता रहा,कभी बेवफा तो कभी खुदगर्ज़ कहता रहा...सब सुना और पलकों को

जार जार बहा दिया...भीगे नैना तो इतने भीगे कि सारा समंदर ही सूख गया...खुद को फिर जो ऐसा

बदला कि खुद की पहचान ही भूल गए...