Monday, 30 July 2018

धीमे धीमे पास आ कर मेरे कानो मे,कुछ उस ने कहा...फिर हवाओ की,फिजाओ की,बहारों की चंचल

शोख अदा से ऐसा खास पैगाम दिया...छन छन पायल के शोर को कहा सुन पाए,कगना जो बजे उस

की खनक भी कहा सुन पाए...धड़कने बताती रही रफ़्तार सीने के बदलते पैमाने का...पर कहा समझ 

आया शोर पायल का और खनक कंगना की...गूंजते रहे बस लफ्ज़ वही जो कानो मे मेरे उस ने कहा...

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चाँद मुखातिब है मुझ से फिर इक बार..क्यों जलता है मुझ से,ऐसा भी क्या है मुझ मे जो नहीं है तेरे पास..''प्यार की इंतिहा समझने के लिए...