Friday, 30 March 2018

एहसास जो आहट देते रहे बार बार.जज्बात जो दिल के किसी कोने मे जगह बनाते रहे साथ साथ ....

टुकड़ों मे जीते जीते जिंदगी को देते रहे सही मुकाम....तक़दीर के हर फैसले को ना मानने का हौसला

जुटाते रहे हर सुबह,हर शाम....दस्तक जो कभी दी किसी ने,बाहर ही बाहर से लौटते  रहे हर बार....

किसी ने कहा कि खुद्दार है हम,कोई कहता रहा दगाबाज़ है हम...पर कहना हमारा रहा यही...अपनी

मर्ज़ी के है मालिक,दुसरो के नक़्शे-कदम पे नहीं चले गे अब बार बार....