Friday, 16 March 2018

तेरे चले जाने से बहुत खामोश हो चुकी यह ज़िंदगी मेरी .....हर ज़र्रा खामोश है,सब कुछ  खामोश है....

कभी कभी तेरी यादे बोलती कुछ बात है....इतनी गहन ख़ामोशी मे मुझ से कहती हर बात है ....

आंख भीगी जब जब मेरी,कुछ अल्फ़ाज़ हवा मे बिखर गए....यूँ लगा मुझे जैसे,कि तुझ तक मेरे

जज़्बात पहुंच गए...कभी दूरिया तो कभी नज़दीकिया,चलती जा रही यह ज़िंदगी....हर बार तुझे मेरा

यही पैगाम...तेरे जाने से बहुत खामोश हो चुकी यह ज़िंदगी मेरी....