Monday, 1 January 2018

दिन बदले,तारीखे  बदली और कितने ही बरस बीत गए---जुड़ी रही कितनी यादे,कुछ रुला गई..कुछ

हसा गई और कुछ.... दिल के आईने मे अंदर तक समा गई---कुछ रूमानी पलों का साथ,कुछ महके

एहसासो का एहसास....आंखे बंद करे तो लगता है तेरी बाहो के घेरे मे,लाज से भाग जाने को है तैयार

बस--उन्ही लम्हो मे जीते है....नहीं तो यह दुनिया आज भी हर जगह मात देने  को है तैयार---नूर लिए

चेहरे पे,सालो को चुनौती देते जाये गे---तेरे नाम के साथ यह ज़िंदगी बिंदास जीते जाये गे----