Saturday, 6 January 2018

कभी रुक दिए तो कभी चल दिए---कभी वफ़ा के नाम पे हज़ारो सलाम कुर्बान कर गए---खामोश

हुए तो बस लब ही सिल लिए----मुस्कुरा दिए जब तो हज़ारो दीए झिलमिला दिए----और दर्द दिए

तो अंदर तक ज़ार ज़ार रुला गए----इतनी इंतिहा है हर अदा की,तो भी यक़ीनन दिल हमारे मे

मुहब्बत जगा गए---- आदाब करे या तेरे सज़दे मे झुक जाए,ज़िंदगी के नाम पे सांसे अपनी लुटा कर

वो खामोश क्यों हो गए---

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चाँद मुखातिब है मुझ से फिर इक बार..क्यों जलता है मुझ से,ऐसा भी क्या है मुझ मे जो नहीं है तेरे पास..''प्यार की इंतिहा समझने के लिए...