Tuesday, 2 January 2018

अगर कभी बिछुड़ गए तो मिले गे ज़न्नत मे....हर जन्म चाहा है तुझे,हर जन्म ही चाहे गे---तू अगर

दुनिया है मेरी,तो तेरे लिए इस दुनिया को भी छोड़ जाए गे--आज भी याद आते है तेरे कहे यह अल्फ़ाज़

तो रूह मेरी काँप जाती है---चेहरे की मासूमियत मे तेरे इस रूप का अंदाज़ कहा था मुझे---बेवफाई का

सदमा देने वाले,ज़न्नत तो नहीं पर जीवन के किसी मोड़ पे जो मिल जाओ गे तो पूछे गे जरूर....रास्तो

पे साथ चलने के वादे करने वाले दर्द मुझे दे कर ज़न्नत मे क्या जा पाओ गे -----