Tuesday, 29 May 2018

आज यादो के ख़ज़ाने को टटोला तो इक नायाब सा तोहफा पाया..वो लम्हे जो साथ गुजारे थे कभी,

उन को रूह मे आज भी समाया पाया.... खिलखिलाती झरनो की तरह वो हसी,मै रुठु तू मनाए...

मै बहकू तू संभाले,मेरे नाज़ उठाने के लिए तेरा मुझे यूँ आगोश मे लेना...कोई देखे या ना देखे,इस

खौफ से परे रहना...ज़िंदगी के साथ यह लम्हे आज भी है,पर यादो को याद करना..वो तोहफा किसी

ज़न्नत से कम तो ना है...