Tuesday, 6 February 2018

मंद मंद मुस्कुराते हुए,मेरे कानो मे हौले से जो उस ने कहा.....दिल की धड़कनो को कुछ समझाया

कुछ को जिगर के आर-पार किया.....रेशमी जुल्फों को अपना नाम दिया और घटा बन उन को

बरसने को कहा....हाथो की लकीरो पे नाम अपना लिख कर,जन्म भर का साथ मांग लिया....यह

इत्फ़ाक रहा या कोई मीठा सपना मेरा,जो उस ने हौले से कहा मेरे दिल ने आसानी से सुन जो लिया...