Thursday, 23 November 2017

दोस्तों...कल मेरी संस्था मे रहने वाले एक बच्चे ने मुझे से पूछा...मैडम..आप हमेशा इतनी खुश कैसे रहती है..हर पल मुस्कुराती हुई...क्या आप के पास कोई दुःख नहीं ???? उस बच्चे का सवाल मुझे सब कहने पे मज़बूर कर गया.....बेटा..जब आप जीवन के बेहद कठिन दौर,बेहद दर्द और अपमान से बार बार गुजरते है और कई बार आप ईश्वर से हाथ जोड़ कर यह भी कहते है कि अब और नहीं...अब सहा नहीं जाता...तब आप मे एक नई ताकत,नई शक्ति जनम लेती है..यह वो वक़्त होता है जब आप भगवन  के करीब और करीब होने लगते है..पूजा मे जब हमारा मन रमने लगे,धयान मे बैठे तो वक़्त का अहसास ही ना हो..तो समझ लीजिये कि अब वो रिश्ते,वो लोग ज़िन्हो ने आप को दुःख-दर्द दिए..वो तमाम परिस्तिथिया ...अब आप के लिए कुछ भी मायने नहीं रखती...जब कही से भी प्यार,सम्मान लेने की इच्छा तक ना रहे तो अपमान का कोई मायने नहीं रहते..बेटा..याद रखे कि जब भी आप का समय अच्छा ना हो तो रोने मे खुद को संताप ना दे बल्कि इस वक़्त हम को धैर्य की बहुत जरुरत होती है...खुद को इस अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार कीजिये..पुस्तके पढ़े,उन महान विद्वानों की,लेखकों की...जो इस वक़्त हमारे साथी,हमारी प्रेरणा बन जाते है...बेटा..मेरे दुखो ने ही मुझे जीना सिखाया है..हम सब को कोई ना कोई दुःख दर्द होता ही है..बस जरुरत है खुद को सँभालने की..कि आप कौन सा रास्ता चुनते है...मैंने पूजा का,किताबो का,भगवन का साथ चुना...तुम सब की खुशियों मे अपने दुखो को होम कर दिया..अब मे खुद को भूल कर आप सब के अंदर जीती हु...इसलिए हमेशा खुश रहती हु...हमेशा...उस बालिका ने मेरे हाथो को अपने माथे से लगाया और कहा ...मैडम ..आज से आप मेरी प्रेरणा हो...दोस्तों..आज सही मायने मे मैंने अपने दुखो पे विजय पा ली......शुभ रात्रि....