Saturday, 11 November 2017

शुक्रिया ना करू ..इबादत भी ना करू...तेरी तारीफ़ मे मेरे मालिक गर सज़दा ना करू....यक़ीनन इस

ज़िंदगी का कोई मायने ही नहीं होगा...दौलत मिले या शौहरत मिले या ज़माने की हज़ारो खुशिया भी

क्यों ना मिले....तू अगर मेरे साथ नहीं,तेरा मेरे सर पर अगर हाथ नहीं..क्या करू गी इन तमाम चीज़ो

का...तेरी पूजा का अगर वरदान मिले,तुझे दिल मे बसाने का बस एक ख्याल मिले तो मेरे दाता,इस

जीवन मे इस से बड़ी नियामत और क्या होगी...अब भी तुझे याद ना करू तो यह ज़िंदगी कुछ नहीं होगी...