Monday, 15 May 2017

चुभन उन गहरे ज़ख्मो की,दिल को आज भी तार तार कर जाती है--भरने लगे है घाव लेकिन,पर टीस

फिर भी अक्सर चली आती है---हौले हौले यह दर्द जब कम होता है,यक़ीनन काम के बोझ से जीवन

का सफर फिर आगे चलता है---साँसे है कायम जब तल्क़..धड़कने बज रही है जो आज तक...हर बात

इन्ही कागज़ो पे लिखते जाए गे--नसीहते माँ की ज़ेहन मे रख कर,ज़िन्दगी के आर पार हो जाए गे---