Saturday, 13 May 2017

जन्म नहीं दिया मुझे,पर तुझी को माँ कहती हूँ...सांसो का साथ भले ही कम रहा लेकिन,तेरी हर

नसीहत को आज भी पल्लू से बाँधे रखती हूँ...जब जब दुनिया की बातो से दुखी हुआ है मन मेरा,तुझ

से मिलने तेरे उसी घर मे चली आती हूँ...यह दुनिया क्या जाने कि आज भी तेरा वज़ूद उस घर के हर

कोने मे मिलता है...माँ..तेरे बताए हर राज़ को मैंने आज भी अपने सीने मे दफ़न रखा है...प्यार कैसा

होता है,नहीं जानती लेकिन आज भी तुझे नमन करने के लिए तेरे ही घर आना होता है...