दोसतो---मेरी शायरी...पयार..मुहबबत..इबादत..वेदना..विरह..सजदा..कलपना..पूजा..तडप..मिलन..और उन तमाम रॅगो को बयान करती है...जिसेे सिरफ सचची मुहबबत करने वाले ही समझ पाए गे....मेरी शायरी के हर पनने को इतना सहयोग देने का..तहे दिल से शुकरीया..शुकरीया----
Sunday, 7 February 2016
दे कर रंग इन लबो को तेरे प्यार का.... .....
दे कर रंग इन लबो को तेरे प्यार का,हम ने अपने लबो को सिल लिया...कुछ कहते नहीं अब इस ज़माने से कि इन से कहने को अब बाकी रह क्या गया...नज़रे चु...
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तेरी उन बचकानी हरकतो को याद करतेे है हम..वो मुझ से रूठना फिर मना लेना. नही भूूल पाए है हम...आज ना वो बचपन है ना ऱिशतो की वो बाते...ना ...
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आहटे कभी झूट बोला नहीं करती,वो तो अक्सर रूह को आवाज़ दिया करती है...मन्नतो की गली से निकल कर,हकीकत को इक नया नाम दिया करती है...बरकत देती ...
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एक अनोखी सी अदा और हम तो जैसे शहज़ादी ही बन गए..कुछ नहीं मिला फिर भी जैसे राजकुमारी किसी देश के बन गए..सपने देखे बेइंतिहा,मगर पूरे नहीं हुए....