Friday, 20 July 2018

कदम से कदम चलने की बात करे तो यह कदम अक्सर खो जाया करते है...कभी कभी बहकावे मे

आ कर साथ छोड़ जाया करते है...तीतर-बीतर हो जाती है दुनिया जब  कदम रेत मे धस जाया करते

है...सवालो के घेरे मे खामोशिया भी खामोश हो जाया करती है...गरजते बरसते बादलो मे तेज़ आहट

से कभी कभी डर से कदम मिल भी जाया करते है....

Sunday, 15 July 2018

क्या लिखू तुझ पे,कि शब्द कम पड़ जाते है....कितना याद करू तुझ को कि यादो का सागर कहा

कम होता है....घर के हर कोने मे तेरा साया आज भी है....उन्ही सीढ़ियों पे तेरे नन्हे पैरो की छाप

आज तक भी है...भूला कहा जाए गा मुझ से,कि हर लम्हा तेरा ख्याल आज भी है...तूने जो जोड़

रखा था पूरे घर को एक धागे से,तुझे देखे बिना चैन कहा किस को था...नम आँखों से याद क्यों

करू तुझ को कि तू तो सदियों तलक मेरे दिल मे ज़िंदा है....
जो मिल गया वो नसीब था...जो ना मिला वो हसरतो का कोई दौर था ...मिलने पे ख़ुशी वाज़िब थी

हसरते पूरी ना होने का गम क्यों रहा...वक़्त तो देता ही रहा गवाही,पर समझ से परे ज़िंदगी मे तब

कुछ भी ना था...कुछ छोड़ दिया तो कुछ छूट गया...कुछ संभल गया तो कही सब बिखर गया....रेले

खुशियों के गर नहीं मिलते तो दर्द का मौसम भी जय्दा नहीं चलता...नसीब तो नसीब है,कभी चमक

गया तो कभी रात के अंधेरे के तले बिखर सा गया ...

Saturday, 14 July 2018

आप को सिर्फ सोचा,और हमे इस ज़िंदगी से प्यार हो गया...दिल की धड़कनो की आवाज़ सुनी और

यह दिल ना जाने कब आप के करीब हो गया...पलकों के शामियाने मे कब कैसे आप को बसा लिया..

रातो पे आप का कब और क्यों पहरा हो गया...खुद को आईने मे निहारा,खुद ही को खुद ने पहचानने

से इंकार कर दिया....सोचा सिर्फ आप को,और अपनी ज़िंदगी से बरबस प्यार हो गया...

Thursday, 12 July 2018

वो हमारे कदमो मे फूल बिछाते रहे...हमारी पसंद नापसंद की बेइंतिहा फ़िक्र करते रहे...हमारी ख़ुशी

का हिसाब पाने के लिए दौलत के लिए मेहनतकश होते रहे...आंसू एक भी छलका,तो वो बस घबरा

गए... खुशियाँ गर मोहताज़ पैसो से होती,तो प्यार का मोल भला कहा होता...खुशियाँ गर सोने के

सिक्को से मिली होती तो हर अमीर ख़ुशनसीब ही होता...तेरी बाहों के घेरे मे,तुझे खुद के हाथो से

ख़िलाने मे..जो प्यार का दरिया मैंने पाया,वो कहा मिल पाए गा इन फूलो और दौलत के ख़ज़ानों मे ..

Wednesday, 11 July 2018

प्यार मे डूबने के लिए यह जन्म ही काफी है...हसरते सारी पूरी कर ले कि उम्र का दौर पता नहीं

कितना बाकी है...कहते है सात जन्मो का साथ लिखा बाकी है...किस ने देखे वो सात जन्म,किस ने

देखे रिश्तो के वो भरम....जो आज है वो कल भी होगा,जिस बात का वादा किया क्या वो भी पूरा होगा

छोड़ दे अब इन बेहिसाब की बातो को...मुहब्बत को फ़ना होने दे इस जन्म के बंधन मे..तभी तो कहते

है,प्यार मे डूब जाने के लिए यह जन्म ही काफी है...
दरख़्त की छाँव मे बैठे कि हवा का इक झोका करीब से मेरे निकल गया...क्या कह गया,क्या बता

गया...इसी उलझन मे जो उलझे  तो दुबारा इक इशारा फिर से दे गया....इस बार का यह झोका दिल

के तारो को क्यों झकझोड़ गया....किस्मत की लकीरो मे जो उस ने लिखा,मै और तुम क्या बदले गे..

खुली हवाओ ने जो सन्देश दिया,अब तो हर सांस को बस ख़ुशी ख़ुशी ही जी ले गे ...

दे कर रंग इन लबो को तेरे प्यार का.... .....

 दे कर रंग इन लबो को तेरे प्यार का,हम ने अपने लबो को सिल लिया...कुछ कहते नहीं अब इस ज़माने  से कि इन से कहने को अब बाकी रह क्या गया...नज़रे चु...